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मानसून की लुकाछिपी:बादल छा रहे पर बरसे नहीं रहे, गहराया जलसंकट, 2 दिन इंतजार के बाद भी तीसरे दिन नहीं मिल रहा पर्याप्त पानी

मंदसौर12 दिन पहले
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तीसरे दिन मिल रही पानी की एक-एक बूंद सहेजने के लिए जुटे रहवासी। - Dainik Bhaskar
तीसरे दिन मिल रही पानी की एक-एक बूंद सहेजने के लिए जुटे रहवासी।
  • जिले में अब तक औसतन 6.4 इंच वर्षा, चंबल से सप्लाई नहीं बढ़ाई तो पानी के लिए मचेगा हाहाकार

मानसून के ब्रेक से शहर में पेयजल का संकट गहराता जा रहा है। नगर के जलस्राेत सूख गए हैं। इस कारण नपा भी दो दिन पानी एकत्र कर तीसरे पेयजल सप्लाई कर रही है। शहर क्षेत्र में नलों का समय कम होेने व पर्याप्त प्रेशर से पानी नहीं मिलने से रहवासी परेशान हैं। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार बारिश नहीं होने से सोयाबीन पर वायरस का खतरा है। इधर मौसम वैज्ञानिक बंगाल की खाड़ी के उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में सिस्टम तैयार होने से आगामी दो दिन में बारिश की संभावना जता रहे हैं।

जिले में औसतन लगभग 6.4 इंच वर्षा हुई है। इससे पेयजल संकट गहराने लगा है। लाेगाें का अधिकतर समय पानी की व्यवस्था करने में ही लग रहा है। टैंकर से पानी भरने को मजबूर हैं। लोगों का कहना है कि आर्थिक बोझ बढ़ रहा है लेकिन अन्य विकल्प भी नहीं है। राधा सोनी, संगीता राठौर, खुशबू सोनी ने बताया कि दाे दिन बाद भी नलों से सिर्फ आधा घंटा ही पानी आ रहा है। पर्याप्त दबाव नहीं होने से इंतजार के बाद भी बर्तन खाली रह जाते हैं। नपा सीएमओ पी.के. सुमन ने बताया कि चंबल के पानी को अभी एक पंप से सप्लाई किया जा रहा है। 2 दिन पानी काे एकत्र कर शहर में प्रदाय कर रहे हैं। चंबल से पानी सप्लाई में अन्य दो पंपों की टेस्टिंग हाेने के बाद ही उपयोग किया जाएगा। पानी होने की स्थिति में टेस्टिंग की जाएगी ताकि कोई समस्या ना हो।

जल्द ही पानी नहीं गिरा ताे आधी रह जाएगी सोयाबीन फसल की उत्पादन क्षमता
बारिश की खेंच के चलते फसलों की भी स्थिति खराब है। गुराड़िया देदा निवासी ओमप्रकाश शर्मा ने बताया कि 15 दिन पहले अच्छा पानी गिरा था लेकिन इसके बाद से हल्की बारिश हुई। पर्याप्त वर्षा नहीं होने से फसलें मुरझाने लगी हैं। महंगे दामों के सोयाबीन बीज खरीदकर बोवनी की लेकिन काेई खास लाभ नहीं दिख रहा है। कुओं का जलस्तर भी नहीं बढ़ा है। इस कारण रबी की फसल के भी प्रभावित होने की आशंका है। कृषि वैज्ञानिक डाॅ. जी.एस. चुंडावत ने बताया कि पथरीली व पतली जमीन पर फसलों को पानी की अधिक जरूरत है।

बारिश नहीं होने से जमीन के पोषक तत्व पौधों तक नहीं पहुंच रहे हैं। गर्मी के कारण पौधों में वायरस अधिक तेजी से बढ़ रहा है। सूखे की स्थिति में मोजक वायरस का वाहक सफेद मक्खी साेयाबीन को ज्यादा प्रभावित करेगा। अंचल क्षेत्रों के कुछ स्थानों पर 9560 किस्म की सोयाबीन फसल के फूल आ गए हैं। समय पर बारिश नहीं होने पर सोयाबीन की उत्पादन क्षमता आधी ही रह जाएगी। जिले में कुछ स्थानों पर दाेबारा बोवनी की सूचना मिली है लेेकिन सोयाबीन की बोवनी का समय निकल चुका है। किसान तुलसी, अजवाइन या मूंग की बुवाई कर सकते हैं। बारिश होने पर बीज के माध्यम से प्याज की खेती भी कर सकते हैं।

जिले की औसत बारिश 33 इंच में 26.6 इंच की जरूरत
बारिश का एक माह बीतने के बाद भी जिले में 7 इंच बारिश नहीं हुई है। औसत बारिश 33 इंच है। 2017- 18 में 28.11 इंच व 2020- 21 में 23.87 इंच बारिश हुई थी। यह सामान्य औसत से भी कम हुई थी। जबकि 2019 में 85.14 इंच बारिश हुई। यह 21 सालाें में सबसे अधिक थी। सबसे कम 2001 में 19.15 इंच हुई थी। जिले में अब तक 6.4 इंच बारिश हुई है। इधर बुधवार को दिनभर बादल छाए रहे। दिन में गर्मी के कारण लाेग परेशान होते दिखे। शाम के समय में हवा चलने से लोगों को राहत मिली। पिछले दिनों से मौसम में लगातार गिरावट देखी जा रही है। 17 जुलाई काे अधिकतम तापमान 37 डिग्री दर्ज किया गया। जबकि 18 व 19 जुलाई को 34 डिग्री रहा। 20 व 21 को अधिकतम तापामन 31 डिग्री दर्ज हुआ।

खरपतवारनाशक या दवाई का छिड़काव अभी ना करें
डॉ. चुंडावत ने बताया कि किसान अभी खरपतवार नाशक या किसी भी दवाई का छिड़काव ना करें। दवाई का छिड़काव करने पर गर्मी बढ़ जाती है, इससे पौधों को पानी की अधिक जरूरत होती है। अभी पानी ही फसलों की समस्याओं का समाधान है। किसान भ्रमित होकर दवाइयों का उपयोग ना करें क्योंकि इससे आर्थिक बोझ बढ़ेगा और फसलों के नुकसान की भी आशंका है।

आगामी दो दिन है बारिश की संभावना
मौसम वैज्ञानिक वेदप्रकाश मिश्रा का कहना है कि बंगाल की खाड़ी के उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में सिस्टम तैयार होने से आगामी दो दिनों में बारिश की संभावना है। चक्रवात का घेरा तैयार हो रहा है। इससे मंदसौर व नीमच में बारिश हो सकती है।

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