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झूले का महीना:सावन में झूलेंगी तिथियां भी, सप्तमी तिथि दो बार मनेगी

मंदसौर3 दिन पहले
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  • चंद्रमा का कोणीय चलन तय करता है तिथियों का नामकरण, इससे हाेती है घट-बढ़

सावन में सप्तमी तिथि के अगले दिन फिर सप्तमी तिथि आ जाएगी। एक ही तिथि दो बार आने पर भी सावन 29 दिन का ही होगा। ऐसा इसलिए होगा कि इस माह में कृष्ण पक्ष की एकम के बाद द्वितीया एवं शुक्ल पक्ष की अष्टमी के बाद नवमी आएगी ही नहीं।

अमावस्या के दिन सूर्य और चंद्रमा के बीच अंतर जीरो डिग्री होता है। अगले लगभग 24 घंटे में चंद्रमा आगे बढ़ जाता है और यह अंतर 12 डिग्री हो जाता है। 12 डिग्री होने के लिए जो अवधि लगती है उसे तिथि कहते हैं। 15 दिनों में यह अंतर 15 गुना 12 अर्थात 180 डिग्री हो जाता है। इसमें चंद्रमा और सूर्य आमने-सामने हो जाते हैं। इस स्थिति को पूर्णिमा कहते हैं।

चंद्रमा, पृथ्वी की परिक्रमा अंडाकार पथ में करता है। इस कारण हमेशा समान दूरी पर नहीं रहता। 12 डिग्री का कोण बनाने के लिए चंद्रमा को कभी ज्यादा तो कभी कम चलना पड़ता है। इसलिए तिथि की अवधि कभी 24 घंटे से अधिक होती है, कभी कम। सूर्याेदय के समय जो तिथि होती है वही पूरे दिन मानी जाती है, भले ही सूर्याेदय के कुछ मिनट बाद अगली तिथि आ रही हो।

तिथि वृद्धि और क्षय का गणित

तिथि वृद्धि : अगर किसी तिथि की अवधि 24 घंटे से अधिक है और वह सूर्याेदय से कुछ देर पहले ही आरंभ हुई हो तो वह अगले सूर्याेदय के बाद भी जारी रहेगी, इससे अगले दिन भी वही तिथि मानी जाएगी। जैसा इस सावन में कृष्ण पक्ष की सप्तमी दो दिन रहेगी। इसे तिथि वृद्धि कहते हैं।

तिथि क्षय : अगर किसी तिथि की अवधि 24 घंटे से कम है और वह सूर्याेदय के बाद आरंभ हुई और अगले सूर्याेदय के पहले ही समाप्त हो गई तो यह तिथि क्षय कहलाती है। जैसा कि इस सावन में कृष्ण पक्ष की द्वितीया एवं शुक्ल पक्ष की नवमी का क्षय है।

ऐसा हो सकता था असर : कल्पना कीजिए हिंदी माह से वेतन भुगतान होता तो सावन समाप्ति के रक्षाबंधन पर 29 दिन में पूरे माह की सेलरी मिलती। ये बात अलग है कि सप्तमी तिथि की अटेंडेंस के लिए 48 घंटे कार्यदिवस की सेवाएं देनी पड़ती।

ये हैं खास बातें सावन की
तिथि वृद्धि- सावन में 30 जुलाई को सप्तमी तिथि के अगले दिन 31 जुलाई को फिर सप्तमी तिथि आएगी।
तिथि क्षय- 25 जुलाई को एकम के बाद
26 जुलाई को द्वितीया आएगी ही नहीं सीधे तृतीया आ जाएगी।
16 अगस्त को अष्टमी के बाद 17 अगस्त को नवमी आएगी ही नहीं सीधे दसवीं तिथि आ जाएगी। इस तरह नवमी का क्षय हो जाएगा।
सावन - 25 जुलाई से आरंभ होकर 22 अगस्त तक चलेगा, इसमें 29 दिन होंगे।

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