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स्वच्छता सर्वे 2021:नालों में गंदगी, कचरा अलग नहीं हो रहा, वहीं पॉलिथिन भी बिक रही, कैसे मिलेगी अच्छी रैंक

मंदसौर7 दिन पहले
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मुख्य मार्ग पर नाहटा चौराहा स्थित नाले की सफाई नहीं होने व आगे निर्माण नहीं होने से नाला चोक हो गया है।
  • नपा की मौजूदा सफाई व्यवस्था और संसाधनों का उपयोग नहीं होने से पिछड़ने की आशंका

शहरों को साफ-सुथरा बनाने के लिए स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 की शुरुआत हो गई है। हालांकि मौजूदा व्यवस्था से नपा की सफाई का पेपर इस बार कठिन रहने वाला है। नपा जिन बिंदुओं काे लेकर लोगों को जागरूक कर रही है, अधिकतर में वह खुद ही फेल है। स्वच्छ भारत मिशन 2021 की नई गाइड लाइन काे पूरी तरह पब्लिक फीडबैक से जोड़ दिया है। यानी सर्वे के लिए आने वाली टीमें आम लोगों से चर्चा करके उनके फीडबैक के आधार पर रैंकिंग तैयारी करेंगी। इसमें शहर धूल मुक्त, कचरा मुक्त और डस्टबीन मुक्त है या नहीं। शहर में 100 प्रतिशत डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन और सोर्स पर सेग्रीगेशन होता है या नहीं, यह देखा जाएगा। इन सब खामियों के अलावा मुख्य मार्ग पर नाले से बदबू आती है। नपा करोड़ों की लागत से खरीदे अपने संसाधनों का उपयोग भी नहीं कर ही है। इससे नपा के पिछड़ने के आसार हैं।

मंदसौर में हर साल 2 करोड़ रुपए सफाई संसाधन पर खर्च किए जा रहे हैं। इसके बाद भी विशेष उपलब्धि प्राप्त नहीं कर पा रही है। केंद्र ने देश को साफ बनाने के लिए 4 साल पहले शहरों के बीच स्वच्छता सर्वेक्षण की शुरुआत कर सफाई व्यवस्था के लिए प्रतिस्पर्धा शुरू की। इससे लोगों में जागरुकता आई लेकिन सरकारी तंत्र में सुधार नहीं दिख रहा। नपा में 40 वार्डों के लिए करीब 700 सफाई कर्मचारी हैं। एक वार्ड के लिए नपा के पास करीब 18 सफाई कर्मचारी हैं। आज भी शहर में कई जगह गंदगी का ढेर, नालियां जाम की स्थिति आम बात है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2020 में नपा ने 3844 अंकों के साथ देश में 50वां स्थान प्राप्त किया था।

नपा हर साल 2 करोड़ रुपए सफाई संसाधन पर खर्च करती है लेकिन नतीजा कुछ नहीं

सिटीजन वॉइस के 1800 अंक मिलेंगे

पिछले सर्वे में 1500 अंक डायरेक्ट ऑब्जर्वेशन के थे और इतने ही पब्लिक फीडबैक के यानी कि कुल 6000 अंकों के सर्वे में 50 फीसदी अंक इन दोनों कैटेगिरी के थे लेकिन इसमें कई जगह डुप्लीकेसी थी। इस बार इन दोनों को जोड़कर एक कैटेगिरी बनाई गई है। इस कैटेगिरी का नाम है सिटीजन वॉइस। 6000 अंकों के सर्वे में इसके लिए इस बार 1800 अंक तय किए गए हैं।

शहर की सफाई व्यवस्था में यहां हैं कमियां

  • शहर में पर्याप्त सफाई कर्मचारी लेकिन सफाई नहीं करते।
  • नपा के पास सफाई व्यवस्था के लिए कई संसाधन जिनका उपयोग नहीं हो रहा।
  • 25 लाख में कचरा उठाने के लिए काॅम्पेक्टर खरीदा जिसका डंपर की तरह उपयोग हाे रहा।
  • ट्रेंचिंग ग्राउंड पर करीब 20 लाख की कचरा सेग्रीगेशन मशीन का उपयोग नहीं हो रहा।
  • 18 लाख की फटका मशीन से कचरा पैक करने का काम भी नहीं हो रहा।
  • कचरा तुलवाई के लिए तौल{कांटा लगवाया लेकिन तौल का कार्य भी सही से नहीं हो रहा।
  • नपा की करीब 34 कचरा गाड़ियां चल रहीं लेकिन गीला व सूखा कचरा अलग एकत्र नहीं किया जाता।

300 अंक सिटीजन अनुभव के हैं, ऑब्जर्वेशन चर्चा के आधार पर किया जाएगा

  • 100 अंक स्वच्छता में इनोवेशन के हैं।
  • 350 अंक स्वच्छता एप के हैं। इसके जरिए आने वाली शिकायतों के निराकरण पर भी अंक तय किए जाएंगे।
  • 300 अंक सिटीजन अनुभव के हैं। ऑब्जर्वेशन चर्चा के आधार पर किया जाएगा।
  • 450 अंक सिटीजन वॉइस के हैं। सफाई में लोगों के जुड़ाव के आधार पर तय किए जाएंगे।
  • 600 अंक सिटीजन फीडबैक के हैं। इसमें लोगों से सवाल पूछे जाएंगे और उसके बाद में उनके जवाबाें के आधार पर इन अंकों का निर्धारण किया जाएगा।

व्यवस्थाओं में सुधार कर रहे हैं

स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर नपा कर्मचारियों की बैठक ली गई है। नपा के पास उपलब्ध संसाधनों का अवलोकन किया गया है। व्यवस्थाओं में सुधार के साथ सभी संसाधन दुरुस्त होंगे। मंदसौर स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर स्थिति में होगा।
- प्रेमकुमार सुमन, सीएमओ, नपा

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