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श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी:मां महिषासुरमर्दिनी देवी मंदिर में कोविड-19 के चलते प्रसादी वितरण नहीं, डिस्टेंस से हो रहे दर्शन

मंदसौर5 दिन पहले
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  • महाराज यशवंतराव होलकर के समय का मंदिर, इस बार चुनरी व कलश यात्रा भी निरस्त की गई

नवरात्रि शुरू होते ही माता मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी है। यही स्थिति क्षेत्र के मां महिषासुर मर्दिनी देवी मंदिर की है। कोविड के चलते सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए गर्भगृह के बाहर से ही लोगों को दर्शन कराया जा रहा है। इस बार चुनरी एवं कलश यात्रा भी निरस्त की गई है। मान्यता के अनुसार वर्षों पूर्व जब महाराज यशवंत राव होलकर गंभीर बीमारी से ग्रस्त हुए। तब प्रजा ने राजा के स्वास्थ्य लाभ की कामना मां से करते हुए मंदिर का जीर्णोद्धार कराने की मन्नत मांगी। बाद में 6 फरवरी 1946 बसंत पंचमी के दिन मंदिर का जीर्णोद्धार राजा के सान्निध्य में हुआ। तब से आज तक मां महिषासुर मर्दिनी देवी के चमत्कारों से यह मंदिर दूरदराज तक प्रसिद्ध है। जूनी शामगढ़ की पहाड़ियों पर यह कब स्थापित हुआ, इसकी पुष्टि नहीं हो पाई। बताया जाता है कि 400 से अधिक वर्ष पूर्व विक्रम संवत 1623 में रामपुरा से राजपूत सरदार श्यामसिंह अपने परिवार के साथ यहां बसे। उन्हीं ने इस स्थान पर गढ़ बनाकर अपने नाम के अनुसार इस स्थान का नाम श्यामगढ़ रखा। जो आज शामगढ़ के नाम से जाना जाता है। वर्ष 1946 के बाद स्व. वैद्य बालाराम चौहान ने मंदिर का समुचित विकास करवाया। पूरे मंदिर में कांच जड़वाए। यह कांच के मंदिर के नाम से भी प्रसिद्ध है। नगर परिषद प्रतिवर्ष अक्षय तृतीया से मां के नाम से पशु मेला आयोजित करती है। वर्तमान में प्रशासन के हाथों में इसकी देखरेख है। मंदिर की प्रसिद्धि के चलते यहां विकास की बहुत संभावनाएं हैं।

पहले दिन 5 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किए दूधाखेड़ी माता के दर्शन

गरोठ | नवरात्रि प्रारंभ होते ही घर-घर देवी की स्थापना की गई। इसी तरह दूधाखेड़ी माताजी मंदिर में भी साज-सज्जा व विशेष शृंगार किया। हालांकि कोरोना के चलते इस वर्ष क्षेत्र के प्रसिद्ध दूधाखेड़ी माताजी मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में कमी होने की संभावना थी। मंदिर प्रबंधन समिति का दावा है कि घटस्थापना के पहले दिन ही 5 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने माताजी के दर्शन किए। कोरोना काल के चलते मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का रुकने पर प्रतिबंध होने के कारण श्रद्धालु निजी वाहन से दर्शन करने पहुंचे। इधर, मंदिर प्रबंधन द्वारा पेयजल की व्यवस्था में कमी देखी गई। पेयजल के लिए श्रद्धालु आसपास की दुकानों में भटकते रहे। हालांकि भानपुरा तहसीलदार राकेश यादव ने व्यवस्था में सुधार लाने की बात कही।

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