पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

आत्मस्वरूप सरस्वतीजी ने कहा:आत्म दर्शन से ही परमात्मा की प्राप्ति होगी और दु:ख दूर होंगे

मंदसौर4 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
प्रवचन देते हुए संत आत्मस्वरूप सरस्वती महाराज। - Dainik Bhaskar
प्रवचन देते हुए संत आत्मस्वरूप सरस्वती महाराज।

सिर्फ तीर्थ पर जाने से ही दुःख की निवृत्ति नहीं होगी और ना परमात्मा के दर्शन होंगे बल्कि आत्म तीर्थ से ही परमात्मा की प्राप्ति और दु:ख दूर होंगे। इसी रहस्य को जानने से ही संसार चक्र से मुक्ति मिलेगी। यह बात संत आत्मस्वरूप सरस्वती महाराज ने श्री सत्संग भवन खानपुरा में चातुर्मास के दौरान कही। वे श्रीमद भागवत गीता का श्रवण करा रहे थे। संतश्री ने कहा भक्ति करके संसार को मांगते व चाहते हैं, यह व्यभिचारिणी भक्ति है। केवल भक्ति द्वारा परमात्मा को प्राप्त करना चाहे, उसे ही गीता में अव्यभिचारिणी भक्ति कहा है। ़

साधक को ऐसी ही भक्ति करना चाहिए। वर्तमान समय में व्यक्ति परमात्मा को छोड़कर माया को चाहते हैं। माया लुभावनी है, अंत में जरूर धोखा देगी लेकिन बुद्धिमान व्यक्ति ऐसा नहीं करते हैं। व्यक्ति को परमात्मा की ही चाह रखना चाहिए बाकी अन्य की अभिलाषा ना करें। साधक, साधना के लिए एकांतवास करें क्योंकि भीड़ में भजन नहीं होगा। संतश्री ने कहा कि एकांत में अन्य का चिंतन नहीं करें। अनावश्यक चीजें साधना में विचलित करती हैं। शुद्ध स्थान ग्रहण करें। सगुण परमात्मा की उपासना अपने ईष्ट भगवान श्रीराम, श्रीकृष्ण, शिव आदि में होती है। इनके साथ नाम रूप भी होगा।

निर्गुण की उपासना चेतन तत्व, ब्रह्म तत्व की होगी जो अनादि- अजन्मा काल के घेरे में नहीं आता क्योंकि उसका जन्म नहीं है। सृष्टि के पहले नाम रूप की अभिव्यक्ति नहीं थी, फिर माया के कारण नाम- रूप मिला। संस्कारित मन सत्संग एवं महापुरुषों के संग से होगा। ऐसा सूक्ष्म अंतःकरण उस परम तत्व को जान सकता है। सभा में संत देवस्वरूप महाराज रतलाम व देवानंद महाराज ने भी संबोधित किया। केशव सत्संग मण्डल न्यास अध्यक्ष जगदीश सेठिया, सचिव कारूलाल सोनी, मदनलाल गेहलोद, सत्यनारायण गर्ग, बंशीलाल टांक, ओमप्रकाश गर्ग सहित अन्य मौजूद थे।

खबरें और भी हैं...