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जागरूकता:ग्लोबल वार्मिंग से बर्फ पिघलेगी, समुद्री जल स्तर बढ़ने से खतरा

मंदसौर2 महीने पहले
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  • सोलर मैन ऑफ इंडिया डॉ. चेतनसिंह सोलंकी ने कहा- एसी और रेफ्रिजरेटर के उपयोग से तेजी से बढ़ रहा है तापमान

सोलर मैन ऑफ इंडिया के नाम से प्रसिद्ध डॉ. चेतनसिंह सोलंकी गुरुवार को मंदसौर आए। उन्होंने कहा कि देशवासियों की सौर ऊर्जा के प्रति गलत फहमियां दूर करना होंगी। ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरूक करना होगा। बिजली उत्पादन इकाइयों से निकलने वाली कार्बन डाई ऑक्साइड से वातावरण का तापमान ग्रीन हाउस प्रभाव के कारण लगातार बढ़ रहा है। यदि इसी गति से तापमान बढ़ता रहा और ग्लोबल वार्मिंग की यह प्रक्रिया चलती रही तो आने वाले समय में ध्रुवों की बर्फ पिघलेगी और समुद्र तथा नदियों का जल स्तर बढ़ेगा। इससे मानव सभ्यता खतरे में पड़ जाएगी। इसलिए आज आवश्यकता है कि हम सौर ऊर्जा को अपनाएं और आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य को बचाएं। डॉ. सोलंकी जिला पंचायत में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दे रहे थे। स्वराज यात्रा पर निकले डॉ. सोलंकी अब तक करीब 10 करोड़ से ज्यादा लोगों को सौर ऊर्जा का प्रशिक्षण दे चुके हैं। डॉ. सोलंकी को प्रदेश सरकार ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में ब्रांड एम्बेसेडर बनाया है। डॉ. सोलंकी 2030 तक सोलर वैन से देश व प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर लोगों वे अपनी यात्रा के दौरान सौर ऊर्जा के उपयोग के प्रति प्रेरित करेंगे।

ये है ऊर्जा स्वराज का मकसद : हर गांव में सोलर बिजली उत्पादन इकाइयां बने

खरगोन जिले की भीकनगांव तहसील के छोटे से गांव नेमित के रहने वाले किसान परिवार के डॉ. सोलंकी ने बताया कि वे लोगों को ऊर्जा स्वराज के प्रति प्रेरित कर रहे हैं। अभियान तभी सफल माना जाएगा जब हर गांव, हर शहर में सोलर बिजली उत्पादन की अलग-अलग इकाइयां स्थापित हो। उन्होंने कहा वर्तमान में एसी और रेफ्रिजरेटर आदि के उपयोग से वातावरण का तापमान बढ़ रहा है। डॉ. सोलंकी ने बताया वे आईआईटी मुंबई में प्रोफेसर हैं। सोलर एनर्जी विषय में पीएचडी की है। इस विषय पर अनेक पुस्तकें लिखी हैं। वे अगले 11 वर्षों तक ऊर्जा स्वराज यात्रा के तहत सोलर एनर्जी वैन में लगातार यात्रा कर नागरिकों को कार्बन उत्सर्जन कम से कम करने तथा सौर ऊर्जा के उपयोग के लिए प्रेरित करेंगे। उन्होंने बताया कि खरगोन, खंडवा, हरदा, जबलपुर, भोपाल, विदिशा, इंदौर व खरगोन सहित 13 जिलों से होते हुए मंदसौर आए हैं।

8 से 10 साल में कार्बन भंडारण क्षमता खत्म होगी

डॉ. साेलंकी ने बताया कि पर्यावरण वैज्ञानिकों के शोध से यह स्पष्ट हुआ कि पृथ्वी पर 500 मिलियन कार्बन ग्रहण करने की क्षमता है। सिर्फ 2019 में ही मात्र 1 वर्ष में 52 मिलियन कार्बन उत्सर्जन हुआ। आने वाले लगभग 8 से 10 वर्षों में पृथ्वी का कार्बन भंडारण क्षमता खत्म हो जाएगी। समय रहते इस पर हर एक व्यक्ति को ध्यान देना होगा। वरना डायनासोर की तरह इंसानों की प्रजाति समाप्त हो जाएगी। आज से हजारों साल बाद जब नई प्रजाति जन्म लेगी तो वह कहेगी कि हजारों वर्ष पहले पृथ्वी पर इंसान नाम की कोई प्रजाति थी।

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