3 साल बाद फिर होगी वन्यप्राणियों की गणना:मंदसौर के गांधीसागर अभ्यारण में तेंदूए से लेकर लोमड़ी, भालू, भेड़िए के साथ अन्य दुर्लभ वन्यप्राणी भी हैं

मंदसौर13 दिन पहले
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गांधीसागर अभ्यारण में घूमते हिरण। - Dainik Bhaskar
गांधीसागर अभ्यारण में घूमते हिरण।

मंदसौर के गांधीसागर अभ्यारण में पल रहे वन्यप्राणियों के लिए वातावरण अनुकूल होता जा रहा है। धीरे-धीरे यहां वन्यप्राणियों का कुनबा बढ़ता जा रहा है। साल 2018 में हुई वन्यजीव की गणना के बाद इसी साल के अंत तक एक बार फिर वन्यप्राणियों की गणना होना है।

इस गणना में राष्ट्रीय बाघ की गणना के साथ वन्यजीवों की गणना भी होगी। जो इस साल के अंत में होगी। इसकी तैयारियों पूरी की जा चुकी हैं।जिले में गांधीसागर अभ्यारण है। यहां बाघ तो नहीं हैं, लेकिन वन्यजीवों की गणना यहां भी होगी। वन्यजीवों के संरक्षण के लिए गांधीसागर में पिछले 3 साल में बेहतर काम और अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है। पिछले साल से यहां वन्यजीवों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। विभाग दावा कर रहा है कि इस बार की गणना में वन्यजीवों में खासा इजाफा सामने आएगा।

पिछली गणना में मिले थे कई जीव, इस बार उनमें भी इजाफे की संभावना

इसके 2018 में हुई गणना में अभ्यारण में 1135 वन्यप्राणी थे। इसमें गांधीसागर सहित मंदसौर वनक्षेत्र में सबसे कम वन्यजीवों में 5 भालू और 2 भेड़िया थे। इसके अलावा सियार, लोमड़ी, लकड़बघ्घा, नीलगाय, लंगूर, चिंकारा, सोनकुत्ता, जंगली सुअर, तेंदूआ, खरहा और जंगली सुअर की संख्या अधिक है। वहीं 3 साल के इस दौर में गांधीसागर में वन्यजीवों के संरक्षण के लिए किए गए कामों को देखते हुए इस बार की गणना में इनकी संख्या में विभाग इजाफा होने का दावा कर रहा है।

चंबल क्षेत्र में सबसे ज्यादा मगमच्छ

चंबल नदी क्षेत्र में सबसे ज्यादा मगरमच्छ की संख्या है। क्षेत्र में कई बार मगरमच्छ गांवों और खेतों तक पहुंच जाते हैं। हालांकि कभी इन मगमच्छ की गणना नहीं हो पाई, लेकिन विभाग यहां 500 से अधिक मगरमच्छ होने का दावा कर रहा है। हालांकि इनकी संख्या और भी अधिक है।

वनक्षेत्र में लाए जा रहे नए जीव

हाल ही में गांधीसागर अभ्यारण क्षेत्र में 196 चीतल भी छोड़े गए हैं। अब यहां प्रदेश और अन्य राज्यों के अभ्यारण से वन्य जीवों को लाया जा रहा है। विभाग का कहना है कि जल्द ही गांधीसागर वन अभ्यारण में कई अन्य जीव नजर आएंगे।

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