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आह्वान:गुरुपूर्णिमा पर एक दीपक राष्ट्र के नाम प्रज्ज्वलित कर राष्ट्र को ही अपना गुरु मानें : संत मधुसूदनानंदजी

मंदसौरएक महीने पहले
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  • महामंडलेश्वर ने एक समारोह में गोमाता की पूजा के श्रद्धालुओं को दी सीख, उन्होंने राष्ट्र का महत्व भी बताया
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 मंदसौर गुरुपूर्णिमा महोत्सव 5 जुलाई को सभी देशवासी अपने-अपने घरों और संस्थानों पर एक दीपक राष्ट्र के नाम प्रज्ज्वलित कर भारत मां को ही गुरुस्वरूप मान कर उनकी पूजा करें। राष्ट्र आराधना ही ईश्वर आराधना है। गुरुपूर्णिमा पर राष्ट्र को गुरु रूप में पूजित कर शिष्य रूप में राष्ट्र के प्रति सेवा का संकल्प लें। भारत अनेक वर्षों से विश्व का गुरु रहा है और विश्व को ज्ञान और विश्व का नेतृत्व दिया है। ऐसे विश्व गुरु को महागुरु मानकर ऐसे विश्व गुरु को स्वयं ईश्वर स्वरूप मानकर गुरुपूर्णिमा के पावन अवसर पर हम सब मिलकर राष्ट्र पूजा करें, राष्ट्र को गुरु बनाकर राष्ट्र के शिष्य बनकर राष्ट्र के उत्थान व कल्याण का संकल्प लें।  यह अाह्वान 1008 महामंडलेश्वर पूज्य संत मधुसूदनानंद महाराज ने एक समारोह में गोमाता की पूजा कर अपने विचार व्यक्त कर किया। संत ने कहा कि गुरुपूर्णिमा के पावन अवसर पर प्रत्येक राष्ट्रवासी क्षेत्रवासी अपने घर में राष्ट्र के नाम का एक दीपक जलाकर मां भारती के चित्र की पूजा कर संकल्प लें। राष्ट्र से बड़ा कोई गुरु नहीं होता है, राष्ट्र हमें सब कुछ प्रदान करता है। हमारे जीवन की दिशा तय करने में वह जीवन जीने में उचित मार्गदर्शन हमेशा राष्ट्र ही प्रदान करता है। गुरु का अर्थ होता है अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाना, ठीक उसी प्रकार से भारत भी एक ऐसा विश्व गुरु है, जो अंधकार रूपी अज्ञान से ज्ञानरूपी अध्यात्म के प्रकाश की ओर हमें ले जाता है। जीवन जीने की कला व जीवन की प्रेरणा प्रदान करता है। विश्व को संपूर्ण ज्ञान भारत ने दिया है इसलिए हमारा भारत विश्व गुरु है और इस विश्व गुरु को विश्व गुरु के रूप में पूजित कर गुरुपूर्णिमा के पावन अवसर पर विश्व गुरु का दर्जा देते हुए पूरे भारतवासी राष्ट्र को अपना गुरु मान गुरुपूर्णिमा का पावन त्याेहार मनाए, राष्ट्रवादी यही संकल्प लें।

65 साल में पहली बार रामद्वारा में नहीं होगा श्रद्धालुओं द्वारा गुरुपूजन
मंदसौर | रविवार को गुरुपूर्णिमा महोत्सव है, प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में तेलिया तालाब के पास स्थानीय निर्भय भवन रामद्वारा राम टेकरी बड़ी संख्या में गुरु पूजन के लिए श्रद्धालु एकत्र होते हैं। जहां रामस्नेही संप्रदाय के स्वामी रामनिवास महाराज के मुखारविंद से आशीर्वचन ग्रहण करते हुए आशीर्वाद प्राप्त करते है। लेकिन कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण 65 साल में पहली बार यह परंपरा टूटेगी और इस वर्ष रामद्वारा पर श्रद्धालुओं द्वारा सामूहिक गुरु पूजन नहीं किया जा सकेगा।
रामद्वारा निर्भय भवन के अधिष्ठाता अंतरराष्ट्रीय संत स्वामी रामनिवास महाराज ने बताया कि रामस्नेही परंपरा के अंतर्गत पिछले 65 वर्षों से मंदसौर में निरंतर रामद्वारा पर गुरु पूजन का भव्य आयोजन किया जाता है। इस वर्ष कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण रामद्वारा पर इस परंपरा का पालन नहीं होगा। आम श्रद्धालुओं के लिए वर्तमान में रामद्वारा पूरी तरह से बंद है, इसलिए सभी श्रद्धालु अपने घर पर ही ध्यान के माध्यम से अपने गुरु का पूजन करें। पूजा-पाठ गुरुवाणी का पाठ करें। परिस्थिति अनुकूल होने के बाद ही परंपरा अनुसार रामद्वारा में भक्ति भाव के आयोजन हो सकेंगे।

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