ये अनदेखी पड़ेगी भारी:एनजीटी के आदेश पर सालभर पहले दिखावे के लिए राेके थे नाले, ये फिर तेलिया तालाब काे कर रहे दूषित

मंदसौर2 महीने पहले
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कॉलोनियों का गंदा पानी इस तरह तालाब में मिल रहा। - Dainik Bhaskar
कॉलोनियों का गंदा पानी इस तरह तालाब में मिल रहा।

तेलिया तालाब संरक्षण को लेकर एक साल पहले एनजीटी ने आदेश जारी कर प्रशासन को एक माह में सुधार कर रिपोर्ट देने काे कहा था। इस पर जिला प्रशासन ने तालाब में मिल रहे नालों को रोकने के लिए अस्थायी प्रयास कर रिपोर्ट प्रस्तुत की। वर्तमान में अस्थायी प्रयास भी बंद कर दिए। नतीजा यशनगर, मेघदूतनगर के सारे गंदे नाले तेलिया तालाब में पहुंच रहे हैं। इससे जल्द ही तालाब का पानी प्रदूषित हो जाएगा। वर्तमान में पानी में हरापन आने लगा है। अधिकारी जल्द सुधार की बात कह रहे हैं।

पर्यावरण व जल प्रदूषण रोकने के लिए जिम्मेदार कितने गंभीर हैं, इसका अंदाजा तेलिया तालाब की स्थिति देखकर लगाया जा सकता है। एक साल पहले एनजीटी ने सुनवाई पर मप्र प्रमुख सचिव से लेकर नपा सीएमओ तक को नोटिस जारी करते हुए तालाब संरक्षण के साथ प्रदूषण रोकथाम प्रयास के निर्देश दिए थे।

ये प्रयास स्थायी समाधान तक जारी रखे जाने थे। पूर्व कलेक्टर मनोज पुष्प ने नपा को मामले में निर्देश भी दिए थे लेकिन एनजीटी को रिपोर्ट भेजने के बाद 3 से 4 माह में सारे प्रयास बंद कर दिए। वर्तमान में यशनगर पुलिया के पास विधायक निवास के यहां बुगलिया नाले में गंदा नाला मिल रहा है जो आगे तालाब में मिल रहा है। गर्ल्स कॉलेज के पीछे ऑडिटोरियम के पास नाले के मुहाने पर लगी विद्युत मोटर भी हटा ली गई है।

कुओं का पानी भी नहीं रहता उपयोग के लायक

तालाब का पानी प्रदूषित होने पर यह आसपास के कुओं में भी पहुंचता है। इससे यशनगर, गंाधीनगर, मेघदूतनगर, रेवास-देवड़ा रोड सहित आसपास के क्षेत्र के हजारों कुओं का पानी भी प्रदूषित हो जाता है। यही कारण है कि इन क्षेत्र के लोग गर्मी में कुओं की जगह टैंकर पर निर्भर रहते हैं। रेवास- देवड़ा रोड पर रहने वाले गजेंद्र ग्वाला ने व अन्य रहवासियों के अनुसार जनवरी व फरवरी के बाद हर साल कुओं का पानी भी उपयोग लायक नहीं रहता है। प्रदूषण के चलते कुओं के पानी का रंग व टेस्ट भी खराब हो जाता है। इससे करीब छह से सात माह कुएं के पानी का उपयोग नहीं कर पाते।

कार्रवाई से बचने के लिए इस तरह पूरी की औपचारिकता

  • नालों को चिह्नित कर तालाब के मुहाने पर बड़े-बड़े गड्‌ढे खोदकर उसमें गंदा पानी जमा किया।
  • इन गड्‌ढों में बिजली मोटरें लगाकर नपा ने सारे गंदे पानी को हाईवे किनारे बने नाले में छोड़ा।
  • तेलिया तालाब के आसपास क्षेत्र में प्रदूषण नहीं करने व प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई के बोर्ड लगाए।
  • जिला प्रशासन ने इस तरह अस्थायी प्रयास करते हुए सीवरेज प्रोजेक्ट की बात कही व एनजीटी को रोकथाम करने की रिपोर्ट प्रस्तुत कर इतिश्री कर ली।

6 से अधिक नाले मिल रहे, खराब हो रहा पानी

वर्तमान में यशनगर, मेघदूतनगर व आसपास के कॉलोनियों के 6 से अधिक नालों का सारा गंदा पानी तेलिया तालाब में मिल रहा है। इसका परिणाम दो से तीन माह में दिखने भी लगेगा। प्रशासन ने अभी प्रयास नहीं किए तो तालाब का पानी किसी उपयोग का नहीं रहेगा।

जरूरी सुधार के लिए निर्देशित करेंगे
मुझे जानकारी नहीं है, तालाब की फाइल मेरे पास आई जरूर है लेकिन अभी उसे देख नहीं पाया हूं। फाइल देखकर जो भी सुधार जरूरी है उसके लिए निर्देशित करेंगे। नपा अधिकारियों को निर्देश जारी किए जाएंगे। - गौतम सिंह, कलेक्टर, मंदसौर

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