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नई व्यवस्था:एप से सत्यापन के बाद ही समर्थन मूल्य पर बेच सकेंगे उपज

मंदसौर3 महीने पहले
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  • जितनी फसल बोई उतनी ही समर्थन पर बिकेगी, पंजीयन के बाद गिरदावरी एप से होगा सत्यापन

गेहूं के समर्थन मूल्य का फायदा वास्तविक किसानों को ही मिल सके, इसके लिए इस बार सिकमीदार और वनाधिकारी पट्टाधारी केवल सहकारी समितियों के केंद्र पर ही पंजीयन करा सकेंगे। इसके बाद सत्यापन गिरदावरी एप से होगा। इसमें जितने रकबे में गेहूं बोना दर्शाया होगा, उतने की ही उपज वे समर्थन मूल्य पर बेच सकेंगे। इससे किसी भी तरह गलत जानकारी देकर समर्थन का लाभ कोई नहीं उठा सकेगा। जिले में 25 जनवरी से 70 केंद्रों पर पंजीयन शुरू हुए हैं, अब तक करीब 600
किसान पंजीयन करा चुके हैं। पिछले साल पूरे जिले से करीब 70 हजार किसानों ने पंजीयन कराया था।
किसान प्राथमिक साख सहकारी समितियों के निर्धारित पंजीयन केंद्रों के अतिरिक्त, गिरदावरी एवं कियोस्क (कॉमन सर्विस सेंटर) एवं लोक सेवा केंद्र पर भी पंजीयन करा सकेंगे लेकिन सिकमीदार एवं वनाधिकार पट्टाधारी का पंजीयन अब सहकारी समिति के पंजीयन केंद्र पर ही कराया जा सकेगा। इसके लिए वन पट्टा एवं सिकमी अनुबंध की प्रति उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। पंजीयन के बाद इसका गिरदावरी एप से सत्यापन कराया जाएगा। एप में मौजूद जानकारी के अनुसार ही सिकमीदार (बंटाईदार) एवं वनाधिकार पट्टाधारी अपनी उपज बेच सकेंगे।
पंजीयन के लिए ये रहेगा जरूरी
पंजीयन के लिए दो विकल्प रहेंगे। यदि किसान पिछले साल पंजीकृत रहा है तो उसकी समग्र आईडी, मोबाइल नंबर दर्ज कर पुराने पंजीयन में संशोधन कराया जा सकेगा। नए किसान पंजीयन के लिए किसान का नाम, बैंक खाता, आईएफएससी शाखा, मोबाइल नंबर, आधार नंबर, फसल विक्रय के लिए अनुमानित तीन तिथियां, विक्रय की जाने वाली फसल के भंडारण स्थल की जानकारी पंजीयन केंद्र पर उपरोक्त दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतिलिपि जमा कराना होगी। किसान की भूमि का रकबा, फसल की जानकारी गिरदावरी एप के आधार पर किसान सहमत होने पर पंजीयन किया जा सकेगा।
पहले इस तरह की थी व्यवस्था
पहले सिकमीदार और वनाधिकारी पट्टाधारी किसान एप, कियोस्क कामन सेंटर, लोक सेवा केंद्र पर पंजीयन करा लेते थे। इसमें वह जितना रकबा दर्शाते थे उतने के गेहूं को समर्थन मूल्य पर खरीद लिया जाता था। इसमें होता यह था कि एक एकड़ रकबे में किसान गेहूं बोते थे और बाकी रकबे में अन्य फसल लेते थे। जब पंजीयन कराते थे तो पूरा रकबे में गेहूं बोना दर्शाते थे। इस तरह वे पूरे रकबे के हिसाब से गेहूं को बेचकर समर्थन मूल्य का फायदा उठाते थे। अब सत्यापन होने से इस पर रोक लग जाएगी।

1975 रुपए है समर्थन मूल्य : इस संबंध में सहायक आपूर्ति अधिकारी श्यामलाल गोयल ने बताया शासन के आदेशानुसार रबी विपणन वर्ष 2021-22 में गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1975 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इस साल किसानों से गेहूं के उपार्जन के लिए पिछले साल की तरह इस बार भी किसान पंजीयन 25 जनवरी से 20 फरवरी तक किया जाएगा। यह पंजीयन सेवा सहकारी समितियों के निर्धारित पंजीयन केंद्रों पर किए जाएंगे।

खाते में होगा भुगतान
पंजीयन ओटीपी आधारित व्यवस्था से होगा। इसकी सूचना किसान को एसएमएस एवं उपार्जन पोर्टल से पंजीयन का प्रिंटआउट निकालकर दी जा सकेगी। उपार्जित फसल का भुगतान जेआईटी से किसान के बैंक खाते में किया जाएगा।
ये बैंक खाते नहीं होंगे मान्य : उपज के विक्रय करने के बाद किसान को यह बताना होगा कि इसका भुगतान उसके किस बैंक खाते में किया जाए। इसके लिए यह जरूरी है कि जनधन, ऋण नाबालिग बंद एवं अस्थायी रूप से खोले गए खाते पंजीयन में मान्य नहीं होंगे।

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