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स्वघोषित सरपंच द्वारा मनमानी:तालाब में ही काट दिए पट्टे, फिर उसे भी बिकवा दिया, खरीदाराें ने ताेड़ दी पाल

मंदसौर6 दिन पहले
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सरपंच द्वारा पट्टे जारी होने के बाद तालाब की जमीन पर शुरू किया अतिक्रमण। - Dainik Bhaskar
सरपंच द्वारा पट्टे जारी होने के बाद तालाब की जमीन पर शुरू किया अतिक्रमण।
  • जनपद सीईओ के नोटिस का भी असर नहीं, फरियादी को जान से मारने की दे रहे धमकी

ग्राम पंचायत बसई में पूर्व सरपंच व स्वघोषित सरपंच द्वारा मनमानी कर तालाब में पट्टे देने का मामला सामने आया है। नोटिस जारी होने के बाद भी संबंधितों को असर नहीं हुआ। वे फरियादी को जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। इधर तालाब में मत्स्य पालन करने वाले महिलाओं के स्व-सहायता समूह सदस्यों ने कलेक्टर व एसपी को भी इसकी शिकायत की है। मामले में स्वघोषित सरपंच जमीन को आबादी में होने का दावा कर रहे हैं तो पूर्व सरपंच पूरी बसई पट्टे में बसी होने का दावा कर रहे हैं।

जय अंबे तालाब मत्सय पालन महिला समिति 2013 से बसई स्थित तालाब में मत्स्य पालन कर रही है। मत्स्य विभाग ने 10 साल के लिए समिति को स्वीकृति दी है। 2015 में पूर्व सरपंच ने इसी तालाब पर पट्टे जारी कर दिए। खुलासा हाल ही मंें पूर्व सरपंच तखतपुरा निवासी अर्जुनसिंह व स्वघोषित सरपंच नारायणसिंह द्वारा उन्हीं पट्टों एक बार फिर बिकवाने के बाद हुआ। जब खरीदारों ने तालाब की पाल फोड़कर यहां निर्माण शुरू किया। इसके बाद महिला समिति सदस्यों ने जनपद सीईओ गोवर्धन मालवीय से शिकायत की। 15 जुलाई को जनपद सीईओ ने तत्काल प्रभाव से निर्माण रोकने के निर्देश दिए लेकिन कार्य नहीं रोका गया। जब समिति सदस्यों ने सूचना अधिकारियों को दी तो निर्माणकर्ता ने शिकायतकर्ताओं को जान से मारने की धमकी तक दे डाली। तालाब का गहरीकरण मनरेगा के अंतर्गत किया गया था। इस तालाब में शासन ने एक लाख रुपए की राशि भी स्वीकृत की थी।

आरक्षित वर्ग की महिला सरपंच
गांव में 2014 से आरक्षित वर्ग की सरपंच धूलीबाई हैं लेकिन यहां सारा काम स्वघोषित सरपंच नारायणसिंह देवड़ा कर रहे हैं। इसका लाभ लेकर उन्होंने तालाब में पट्टे जारी कर दिए। इतना ही नहीं गांव में सड़क किनारे भी शासकीय जमीन पर पट्टे जारी किए हैं। उनके अनुसार जहां पट्टे जारी हुए हैं उन सर्वे नंबर पर कभी भी तालाब नहीं था।

2015 में जारी हुए थे पट्टे
निर्माण कर रहे बाबूलाल महाजन ने बताया कि गांव के ही गंगाराम से साढ़े तीन लाख में पट्टा खरीदा है। यह हमें पूर्व सरपंच अर्जुनसिंह ने खरीदवाया है। उन्हीं ने 2015 में गंगाराम को पट्टा जारी किया था। पूर्व सरपंच अर्जुनसिंह का कहना है कि पूरा गांव ही पट्टे की जमीन में बसा हुआ है। कागज देखकर ही बता पाऊंगा।

2014 से पदस्थ सचिव को भी कभी नहीं दिखा तालाब
मामले में अब सचिव महेश द्विवेदी खुद को मामले से अलग बता रहे हैं। वे गांव में वर्ष 2014 से पदस्थ हैं लेकिन वे यह तक नहीं बता पा रहे हैं की जिस जमीन पर पट्टे जारी हुए हैं वहां कोई तालाब था भी या नहीं या फिर शासन ने इसमें गहरीकरण करवाया या नहीं। जबकि जनपद सीईओ ने उन्हें ही निर्माण कार्य रुकवाने के निर्देश जारी किए हैं।

निर्माण नहीं राेका ताे कार्रवाई की जाएगी

  • ^तालाब की जमीन पर सरपंच ने पट्टे जारी किए हैं। शिकायत मिलने पर सचिव को निर्माण कार्य रोकने के निर्देश दिए हैं। यदि ऐसा नहीं हुआ है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मैंने तो फरियादी को भी मंत्री हरदीपसिंह डंग से शिकायत करने की सलाह दी थी। लेकिन उन्होंने अब तक नहींं की। - गोवर्धन मालवीय, सीईओ जनपद पंचायत, सीतामऊ
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