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बढ़ा रकबा:78 हजार हेक्टेयर है इस बार खरीफ सीजन का रकबा, किसानों ने 50 हजार हेक्टेयर में तिलहन फसलें बाेईं

मंदसौर10 महीने पहले
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  • सीतामऊ ब्लॉक में किसानों का रुझान तिलहनी फसलों की ओर ज्यादा, अच्छी बारिश की उम्मीद

मुनाफे के लालच में किसानों द्वारा अनाज फसलों की बजाय व्यापारिक फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। नतीजतन इस साल सोयाबीन के अलावा तिल व मूंगफली का रकबा भी बढ़ा है। तहसील क्षेत्र में  खरीफ सीजन का कुल  रकबा जहां 78 हजार हेक्टेयर में है, वहीं तिलहन फसलें 50 हजार हेक्टेयर में बाेई गई हैं। किसानों का रुख अब व्यापारिक फसलों की ओर हो गया है। दूसरी तरफ अनाज का रकबा घटता जा रहा है। ज्वार और बाजरा बहुत ही कम रकबे में बोया गया, दलहनी फसल का रकबा भी कम हुआ है। किसी समय में क्षेत्र में कपास की खेती प्रचुर मात्रा में होती थी इसलिए सुवासरा और सीतामऊ में जिनिंग फैक्टरियां खोली गई थीं। अब इनकी मशीनें जंग खा चुकी हैं और इनको शासन द्वारा अलाॅट की गई कई जमीन एकड़ ऐसे ही बेकार पड़ी है। जब से सोयाबीन क्षेत्र में बोई जाने लगी, अनाज और दलहनी फसलें कम बोई जाने लगी हैं। इससे दालों का मूल्य भी लगातार बढ़ता जा रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि लगातार एक ही खेत में निरंतर सोयाबीन बोई जाती है तो उत्पादन क्षमता घटने के साथ ही खेत की उर्वरा शक्ति भी कम होती है। क्षेत्र में 50 हजार 759 हेक्टेयर में तिलहन फसल बोई गई, सोयाबीन 50 हजार 200 हेक्टेयर में, मूंगफली 432 हेक्टेयर, तिल 127 हेक्टेयर, अनाज कुल 15741 हेक्टेयर में बोई गई। इसी तरह मक्का 15675 हेक्टेयर में ज्वार, 21 हेक्टेयर तथा बाजरा 45 हेक्टेयर में बोया गया। खरीफ फसल में दलहनी फसल 11741 हेक्टेयर में बोई गई। उड़द 10682 हेक्टेयर, मूंग 627 हेक्टेयर तथा अरहर 432 हेक्टेयर में बोई गई। कपास सिर्फ 5 हेक्टेयर में बोई गई तथा साग सब्जी, प्याज मिर्च 480 हेक्टेयर में बोई गई।  कुल खरीफ की फसल 78 हजार 726 हेक्टेयर में है। अगर मौसम ने बराबर साथ दिया तो इस वर्ष खरीफ की फसल का उत्पादन बहुत अच्छा रहेगा। अभी फसलें पानी मांगने लगी हैं, अगर समय से पानी आ जाता है तो फसलों की वृद्धि बेहतर हो जाएगी।

गांव में अच्छी बारिश को लेकर किसानों ने उजमनी मनाई

कुचड़ौद | क्षेत्र में इस बार मानसूनी की बारिश नहीं के बराबर हुई है। पहली बार गांव एवं क्षेत्र में 15 जुलाई के बाद भी 40% किसान बोवनी से वंचित हैं। ग्रामीणों एवं किसानों ने मंगलवार को काम एवं व्यापारियों ने प्रतिष्ठान बंद रखकर खेतों में उजमनी मनाई। किसानों ने बताया कि पहली बार 15 जुलाई तक आधा सावन होने को आया है। मंगलवार को इंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए खेतों पर जाकर दाल-बाटी व चूरमा बनाकर इंद्रदेव को भोग लगाया। गांव एवं क्षेत्र में अच्छी बारिश की इंद्रदेव से प्रार्थना की। इंद्रदेव ने भी किसानों की चिंता दूर करते हुए दोपहर 2.15 बजे बाद 20 मिनट तक बारिश हुई, जिससे किसानों को थोड़ी राहत मिली।

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