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उम्मीदें:तेलिया तालाब को प्रदूषण मुक्त करने नालों का पानी गड्ढे में एकत्र कर अन्य नालों में पहुंचा रहे

मंदसौर2 महीने पहले
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  • एनजीटी के आदेश पर अस्थायी उपाय : 8 नालों को किया चिह्नित, दो साल में तालाब हो जाएगा गंदगी मुक्त

एनजीटी के आदेश के बाद तेलिया तालाब के शुद्ध होने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। करीब 8 नाले इसमें मिल रहे हैं। नपा ने अभी अस्थायी रूप से गंदे नालों के पानी को तालाब में मिलने से रोक दिया है, हालांकि बारिश में इसका कोई लाभ नहीं मिलेगा। नपा स्थायी समाधान के लिए 3.50 करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार कर रही है। डेढ़ से दो साल में जिम्मेदार तालाब में मिल रहे गंदे नालों को रोकने का दावा कर रहे है। इससे तालाब का पानी गर्मी तक भी दूषित नहीं होगा। एनटीजी ने तालाब को प्रदूषित होने से रोकने के लिए कलेक्टर, मप्र प्रमुख सचिव व नपा को मार्च 2021 तक का समय दिया। वर्तमान में यशनगर, मेघदूतनगर, गांधीनगर सहित आसपास की कॉलोनियों से 8 नालों का गंदा पानी तेलिया तालाब में मिल रहा है। इन्हें एनजीटी के आदेश के बाद नपा ने ही चिह्नित किया। अब नपा ने इन्हें तालाब में मिलने से रोकने का काम शुरू कर दिया है। नपा ने अभी डाइट परिसर के पीछे अधूरे ऑडिटोरियम के पास तालाब में मिल रहे नाले के मुहाने पर बड़ा गड्‌ढा खोदकर तालाब की तरफ मिट्‌टी की पाल बना दी। इससे सारा गंदा पानी गड्‌ढे में एकत्र हो रहा है। यहां से नपा विद्युत मोटर के माध्यम से गंदे पानी को डाइट के पीछे से निकल रहे नाले में छोड़ा जा रहा है। यह पानी जिला पंचायत के सामने से होते हुए शहर के नालों में पहुंच रहा है। इसी तरह नपा ने यशनगर की पुलिया के यहां मिल रहे मेघदूतनगर के नाले के पानी को रोककर विद्युत मोटर से महू-नीमच राजमार्ग के किनारे से निकल रहे नाले में छोड़ा जा रहा है।

परिषद की मंजूरी भी प्राप्त कर ली
नपा ने स्थायी समाधान के लिए 3.50 करोड़ के प्रोजेक्ट के लिए परिषद की मंजूरी भी प्राप्त कर ली। नपा द्वारा तालाब के किनारे नाला निर्माण किया जाएगा जिसमें सभी नालों को मिलाया जाएगा। यह नाला डाइट परिसर के पीछे से होते हुए जिला पंचायत के पीछे तक जाएगा। यहां से इसे जिला पंचायत के सामने श्रीकोल्ड के नाले में मिलाया जाएगा।

गंदे पानी को शहर के पानी
के साथ बाहर निकालेंगे

नपा कार्यपालन यंत्री अरविंद गंगराड़े ने बताया कि तालाब में मिल रहे नालों को रोकने के लिए प्राेजेक्ट बनाया जा रहा है। नाला निर्माण कर गंदे पानी को शहर में जाया जाएगा। शहर के पानी के साथ यह बाहर निकल जाएगा। इस प्राेजेक्ट को पूरा करने में डेढ़ से दो साल का समय लगेगा। इसके बाद तालाब में गंदा पानी नहीं मिलेगा।
सीवरेज प्रोजेक्ट में समय लगेगा
^सीवरेज प्रोजेक्ट में समय लगेगा इसलिए नपा ने अपने स्तर पर तालाब संरक्षण के लिए तीन करोड़ से अधिक की मंजूरी ली है। भविष्य में सीवरेज प्रोजेक्ट आने पर यहां वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनेगा तो गंदा पानी को यहीं साफ कर तालाब में छोड़ा जा सकेगा।
पीके सुमन, सीएमओ, नपा

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