तैयारी शुरू:रतलाम-चित्तौड़गढ़ सेक्शन में गणतंत्र दिवस बाद बिजली इंजन से दौड़ेंगी ट्रेनें

मंदसौरएक वर्ष पहले
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  • सीआरएस द्वारा निकाली गई 11 खामियों को रेलवे ने किया दूर, रफ्तार बढ़ने से यात्रा का समय भी होगा कम, नई ट्रेनें चलाने में आसानी होगी

गणतंत्र दिवस यानी 26 जनवरी बाद क्यू ट्रैक से होकर रतलाम-चित्तौड़गढ़ सेक्शन में ट्रेन बिजली के इंजन से दौड़ने लगेगी। कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (सीआरएस) के निरीक्षण में मिली 11 खामियों को ठीक करने के बाद रेलवे ने तैयारी पूरी कर ली है।

यात्रियों की सुरक्षा के लिए पहले कुछ दिन गुड्स ट्रेन चलाने के बाद रेलवे यात्री ट्रेन चलाएगा। रफ्तार बढ़ने के साथ सफर का समय घटेगा। रेलवे रतलाम-कोटा हल्दीघाटी पैसेंजर सहित डेमू ट्रेन शुरू करने में आसानी होगी। अभी इस सेक्शन में डीजल इंजन से पांच जोड़ी नियमित और साप्ताहिक गाड़ियां चल रही हैं। धौंसवास से चित्तौड़गढ़ तक की सिंगल लाइन को सीआरएस की मंजूरी पहले ही मिल गई थी, क्यू ट्रैक और निंबाहेड़ा-शंभुपुरा की दूसरी लाइन के इलेक्ट्रिफिकेशन अधूरा होने से ट्रेन बिजली इंजन से नहीं चल पा रही थी।

रेल विद्युतीकरण (आरई) डिपोर्टमेंट द्वारा दोनों काम पूरा करने के बाद 28 दिसंबर को सीआरएस आरके शर्मा ने निरीक्षण करके ऑब्जर्वेशन रिपोर्ट में 11 कमियां बताई थीं। इन्हें ठीक करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया था। एक पखवाड़े तक लगातार काम करके आरई और रेलवे ने ट्रैक के इलेक्ट्रिफिकेशन को ओके कर लिया है। इससे अब जल्द यात्रियों को भी राहत मिलेगी।

इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेन चलने के फायदे

  • पांच नई यात्री ट्रेनें चलेंगी - यात्रियों के सर्वाधिक दबाव वाली रतलाम-कोटा हल्दीघाटी पैसेंजर और चार डेमू ट्रेनें जल्द ही चलने लगेंगी। अभी डीजल इंजिन से उदयपुर-बांद्रा टर्मिनस, अजमेर-बांद्रा टर्मिनस, उदयपुर-इंदौर, जोधपुर-इंदौर, जयपुर-यशवंतपुर ट्रेन चल रही है।
  • 30 से 35 मिनट बचेंगे - रतलाम-चित्तौड़गढ़ सेक्शन में अभी ट्रेन औसत 80 से 90 किमी प्रति घंटे की गति से चल रही है। सफर में 3.35 से 3.55 घंटे लग रहे हैं। इलेक्ट्रिक इंजिन से चलने पर रेलवे को रफ्तार 100-110 किमी करने में मदद मिलेगी। इसके बाद ट्रेन 3.05 से 3.15 घंटे में सफर पूरा कर लेगी।
  • प्रदूषण कम होगा - डीजल इंजन से निकलने वाले धुएं से वायु प्रदूषण तो होता ही है, आसपास खेतों की फसलों को भी नुकसान पहुंचता है। बिजली के इंजन से ट्रेन चलने पर यह समस्या नहीं रहेगी।
  • आर्थिक बचत - रतलाम-चित्तौड़गढ़ तक ट्रेन चलाने में अभी औसत 3.50 से 4 लाख रुपए खर्च आता है। बिजली इंजन चलने से यह खर्च घटकर 2.5 लाख रुपए तक रह जाएगा।

छह बार में फाइनल हुआ निरीक्षण
रतलाम से चित्तौड़गढ़ तक की सिंगल लाइन इलेक्ट्रिफिकेशन को मंजूरी देने के लिए सीआरएस को पांच बार निरीक्षण करना पड़ा है। पहली बार 2018-19 में धौंसवास-जावरा, दूसरी बार जावरा-मंदसौर, तीसरी बार नीमच -निंबाहेड़ा और चौथी बार निंबाहेड़ा-शंभुपुरा और पांचवी बार में शंभुपुरा-चित्तौड़गढ़ तक को सीआरएस ने हरी झंड़ी दी थी। दिसंबर अंत में छठी बार सीआरएस ने क्यू ट्रैक और निंबाहेड़ा-शंभुपुरा दूसरी लाइन के इलेक्ट्रिफिकेशन का निरीक्षण किया था।

इलेक्ट्रिफिकेशन में तकनीकी सुधार किया
रतलाम-चित्तौड़गढ़ के बीच अगले सप्ताह से पहले गुड्स फिर कुछ दिन बाद पैसेंजर ट्रेन चलाना शुरू कर देंगे। हमारी तैयारी पूरी है। सीआरएस की ऑब्जर्वेशन रिपोर्ट के अनुसार इलेक्ट्रिफिकेशन में तकनीकी सुधार कर लिया गया है। इससे रेलवे के साथ यात्रियों को भी सुविधा मिलेगी।-विनीत गुप्ता, डीआरएम

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