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हाईकोर्ट ने दिए आदेश:शादी समारोह के लिए एक दिन के 4 लाख तक वसूलते हैं, एक रुपए भी नहीं देते टैक्स

मंदसौर13 दिन पहले
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  • शहर में 40 से अधिक छोटे-बड़े रिसोर्ट और धर्मशालाएं
  • हर तीन माह में कराना होगा पंजीयन व वसूलेंगे शुल्क

शहर में बिना नियम 40 से अधिक रिसोर्ट व धर्मशालाएं संचालित हैं। ये शादी समारोह के लिए एक दिन के 50 हजार से चार लाख तक वसूलते हैं लेकिन नपा व प्रशासन को एक रुपया टैक्स नहीं देते। नपा ने 8 साल पहले नियमावली बनाई लेकिन यह फाइलों में ही दबी गई। यह लागू हाेती तो 8 साल में करीब डेढ़ करोड़ रुपए राजस्व मिलता। इससे दो से तीन अवैध काॅलोनियों को वैध किया जा सकता था। अब हाईकोर्ट ने नियम तय कर लागू करने के आदेश दिए लेकिन नपा राजस्व अधिकारी अभी भी नियमावली बनाने की बात कह रहे हैं। नपा को रिसोर्ट व धर्मशालाओं से पंजीयन के लिए 500 से 10 हजार तक शुल्क एवं सालाना वर्गफीट के मान से टैक्स लेना था। नपा ने विवाह स्थल पंजीयन नियम-2013 बनाए, परिषद ने स्वीकृति भी प्रदान की लेकिन इसका पालन आज तक नहीं किया गया। नियमावली फाइलों मंे ही दबी है। नियमानुसार इनका पंजीयन कर अनुमति देना व टैक्स वसूली की जाती तो शहर में 5-10 रिसोर्ट को ही अनुमति मिलती। बाकी सभी पर ताले लग जाते। यही कारण है कि वर्तमान में नपा के पास एक भी रिसोर्ट व धर्मशाला का पंजीयन नहीं है। ना ही कोई नियमों का पालन कर रहा है। नपा ने भी विवाह स्थल पंजीयन नियम-2013 लागू नहीं किए। नपा नियम को लागू करती तो इनके पंजीयन व उपभोक्ता शुल्क के नाम पर सालाना करीब 20 लाख रुपए राजस्व मिलता। ऐसे में 2013 से अब तक 8 साल में नपा को सवा से डेढ़ करोड़ का राजस्व मिलता जिससे कई विकास कार्य हो सकते थे। हालांकि अब हाईकोर्ट ने शासन को आदेश दिए हैं। मप्र शासन ने सभी नगरीय निकायों को नियमों के अनुसार इनका पंजीयन कर अनुमति देने व टैक्स वसूली के आदेश दिए है। हालांकि नपा के जिम्मेदार अभी भी इनकी उपविधि बनाने की बात कह रहे हैं।

हो सकते थे विकास कार्य
नपा 2013 में ही सख्ती कर इनका पंजीयन व शासन के नियम लागू करती तो अब तक डेढ़ करोड़ रुपए राजस्व प्राप्त मिलता। इससे मिड इंडिया अंडरब्रिज के लिए शासन के सामने हाथ नहीं फैलाने पड़ते। शहर में 4 से 5 छोटी अवैध कॉलोनियों में सड़क, नालियां व अन्य काम हो जाते।
अधिकतर गार्डन नेताओंके
नगर में 30 से अधिक मैरिज गार्डन राजनेता व उद्योगपतियों के हैं। इसके जरिए उन्हें काफी लाभ होता है परंतु ये गार्डन संचालक रसूख के चलते नगर निगम को टैक्स नहीं देते हैं। इसके चलते नगरपालिका को काफी राजस्व की हानि होती है उसको दूर करने के लिए शासन ने ये नए निर्देश जारी किए हैं।

आदेश के बाद ये जारी हुए नए नियम
{मैरिज गार्डन को हर तीन माह में रजिस्ट्रेशन कर टैक्स जमा करना होगा।
{मैरिज गार्डन के कुल एरिया का 25 फीसदी पार्किंग के लिए आरक्षित रखना होगा।
{50 लोग जहां जमा होकर आयोजन करेंगे उसे मैरिज गार्डन माना जाएगा।
{कॉलोनियों में कोई भी कार्यक्रम नहीं होगा।
{तीन माह में रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर संचालित मैरिज गार्डन को वैध माना जाएगा।
{अवैध होने पर मैरिज गार्डन को हटाने की कार्रवाई की जाएगी।
{मैरिज गार्डन में पार्किंग, सफाई, सुरक्षा, अग्निशमन यंत्र का होना है आवश्यक।
{नियमों का पालन नहीं होने पर जुर्माने लगेगा।
{रात 10 से सुबह 8 बजे तक नहीं कर सकेंगे लाउड स्पीकर का प्रयोग।
{स्कूल कॉलेज व अस्पताल के 100 मीटर से अधिक दूरी पर होना चाहिए।

नए नियम तैयार किए जा रहे हैं

^नगर में स्थित मैरिज गार्डन व धर्मशाला को लेकर अभी तक कोई नियम नहीं है। नगरी निकाय विभाग से जारी हुए आदेश के बाद अब मैरिज गार्डन को लेकर नए नियम तैयार किए जा रहे हैं। इसके टैक्स लिया जाएगा। विजय मांदलिया, राजस्व अधिकारी, नगरपालिका

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