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जनप्रतिनिधियों की लापरवाही से:शिवना में जलकुंभी का अंबार हाे रही है दूषित

मंदसौरएक महीने पहले
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शिवना शुद्धिकरण को लेकर शहर की जनता व निर्मल शिवना अभियान के सदस्य लगातार आंदोलन कर रहे हैं। जनप्रतिनिधियों ने अब तक कोई पहल नहीं की। उनकी लापरवाही की वजह से ही आज शिवना में जलकुंभी का अंबार है। कालाभाटा बांध व रामघाट बेबसी पर आंसू बहा रहे हैं। अभियान सदस्यों व शहरवासियों की नाराजगी यह है कि शिवना को लेकर किए सारे वादे खोखले साबित हो रहे हैं।

अभियान के सदस्य हरिशंकर शर्मा ने बताया कि शहर की जनता मांग कर रही है कि शिवना नदी में गंदे नालों को मिलाने से रोका जाए। दूषित पानी का दंश झेल रहे शहर के प्रमुख जलस्रोतों की आेर ध्यान दिया जाए। जनप्रतिनिधियों का इस ओर कोई ध्यान नही है।

शिवना नदी गंदगी से दूषित हाे गई है। नदी के शुद्धिकरण के लिए शहर की जनता द्वारा जल सत्यागृह तक किया गया लेकिन कोई असर नहीं हुआ। वर्तमान में भी निरंतर आंदोलन किया जा रहा है लेकिन इसकी सूचना जवाबदारों तक नही पहुंची है। यदि सूचना पहुंचती तो इसके निराकरण के कार्य शुरू हो जाते।

जल संवर्धन को लेकर किए गए दावे खोखले साबित हाे रहे हैं। शिवना नदी की ओर जनप्रतिनिधियों का ध्यान ही नहीं है। निर्मल शिवना के सभी कार्यकर्ता शीघ्र ही अभियान के माध्यम से मंत्री हरदीप सिंह डंग को अवगत कराएंगे। अधिकारियों व जनप्रतिनिधियाें काे स्थिति से अवगत कराना आवश्यक है।

‘जनता लगातार मांग कर रही लेकिन जनप्रतिनिधि कोई सुध नहीं ले रहे’
प्रज्ञा पोरवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को समस्याओं के बारे में जानकारी लिखकर भेजी है। वर्तमान स्थिति से अवगत कराया है। देश में आजादी के बाद पहली बार एेसी हठधर्मिता का उदाहरण देखने को मिला। जनता लगातार मांग कर रही है लेकिन पद के अहंकार में लीन नेता कोई सुध नहीं ले रहे हैं। जल सत्यागृह व पोस्ट कार्डों पर भी ध्यान नहीं दिया गया।

जनप्रतिनिधियाें व अधिकारियों को बैठकों से समय नहीं मिल पा रहा है। सब मौन हैं, जवाबदारों की चुप्पी जिम्मेदारियाें पर प्रश्न चिह्न खड़ा कर रही है। पशुपतिनाथ महादेव व शिवना नदी से लोगों की अास्थाएं जुड़ी हुई हैं। जनता बार-बार मांग कर रही है लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।

अब ऐसा लगता है कि भगवान खुद आएंगे तभी इस परेशानी काे सुना जाएगा। निर्मल शिवना जन अभियान के सुनील बंसल, धनराज धनगर, सपाक्स पार्टी के जिलाध्यक्ष राहुल गांधी, राहुल मोटवानी, कमलेश सोनी, तरुण सहित कार्यकर्ताओं द्वारा निरंतर अभियान चलाया जा रहा है।

अपनी बेबसी पर आंसू बहा रहे हैं जलस्त्रोत’
नगर के जलस्त्रोंत अपनी बेबसी पर आंसू बहा रहे हैं। कालाभाटा बांध और रामघाट की हालत बेहद खराब है। नेमीचंद्र कोठारी ने बताया कि काफी जद्दोजहद के बाद चंबल से पानी लाने की एक योजना बनी लेकिन वह भी फेल हो गई।

योजना से एक आशा बंधी थी कि अब मंदसौर में पेयजल का संकट नहीं रहेगा। लेकिन करोड़ों रुपए खर्च कर भी जहां से चले थे वही खड़े हैं। जगह-जगह पाइप लीकेज मिले। नगर को पेयजल से वंचित किया जा रहा है। योजना को लेकर एक बार फिर युद्ध स्तर पर काम होना चाहिए।

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