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श्मशान में ही भूल आए 'अपनों की अस्थियां':सीहोर में कोरोना में जान गंवाने वाले लोगों के अस्थि कलश मुक्तिधामों में पेड़ों पर टंगे हैं, मंदसौर में नीचे ही रख आए कलश

मंदसौर/सीहोर2 महीने पहले
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मंदसौर में मुक्तिधाम में कलश में रखा अस्थि कलश। - Dainik Bhaskar
मंदसौर में मुक्तिधाम में कलश में रखा अस्थि कलश।

मंदसौर। जिले में कोरोना काल में हुईं मौत के बाद मुक्तिधाम में आज भी अस्थियां अपनों का इंतजार कर रही हैं। ऐसा ही मामला मंदसौर और सीहोर का है। जहां अपनों की मौत के बाद भी परिजन मुक्तिधाम से उनकी अस्थियां लेने तक नहीं गए।

मंदसौर के मुक्तिधाम पर ऐसे 130 अस्थि कलश रखे हैं जिन्हें अपनों का इंतजार है। श्राद्ध पक्ष में तर्पण का महत्व है। हर कोई अपने पूर्वजों का तर्पण कर मोक्ष की कामना करता है, लेकिन कोविड के दौर दिवंगत होने के बाद अस्थियों से भी अपनों ने मुंह मोड़ लिया। ऐसे में मृत्यु के बाद यहां अब तक करीब 130 लोगों के अस्थि कलश अपने तर्पण के साथ मोक्ष का इंतजार कर रहे हैं। कई महीने बीत जाने के बाद भी दिवंगतों की यह अस्थियां अपनों की राह तक रही है। अब श्राद्ध पक्ष के दौर में सामाजिक कार्यकर्ता सुनील बंसल हरिद्वार जाकर इन को तर्पन जार गंगा में प्रवाहित करेंगे। दो-चार इनमें से निराश्रितों की भी अस्थियां हैं, जिनका अंतिम संस्कार सामाजिक कार्यकर्ताओं ने किया था।

वहीं समाजिक कार्यकर्ता सुनील बंसल ने बताया कि मुक्तिधाम पर रखे अस्थी कलश में कई परिवार ऐसे भी हैं जो यहां की समिति के सीधे संपर्क में हैं, लेकिन अस्थी कलश यहां से नहीं ले जा रहे हैं। जबकि एक दर्जन परिवार ऐसे हैं जो नौकरी और काम के सिलसिले में बाहर हैं। उनसे जब फोन कर सम्पर्क किया तो जवाब मिला, समिति ही तर्पण और गंगा विसर्जन कर दे। इसमें होने वाला खर्च वे चुका देंगे, लेकिन अपनी व्यस्तता के चलते अस्थी कलश नहीं ले जा रहे हैं। वहीं उन्होंने बताया कि वह पिछले 28 सालों से निराश्रितों का अंतिम संस्कार और अस्थियों को हरिद्वार में गंगा में विसर्जित करने का काम कर रहे हैं, लेकिन पहली बार ऐसा मौका आया जब 130 अस्थी कलश उनके पास एकत्रित हुए हैं। अब वह 26 सितंबर को हरिद्वार के लिए निकलेंगे और इन अस्थियों को गंगा में प्रभावित कर इन मृतकों का तर्पण करेंगे।

सीहोर के मुक्तिधाम रखीं अस्थियां।
सीहोर के मुक्तिधाम रखीं अस्थियां।

सीहोर के मुक्तिधाम में आज भी विसर्जन का इंतजार कर रहीं अस्थियां

सीहोर जिले में कोविड के चलते अपनी जान से हाथ गवाने वाले ऐसे 350 अस्थियां नगर के मुक्तिधाम में बिखरी पड़ी हैं। कुछ लोगों ने अपने परिजनों की अस्थियों का संचय तो किया पर उसके बाद उन अस्थियों को मुक्तिधाम के लॉकर या यहां मौजूद पेड़ पर लटकाकर चले गए। 2 साल में कोरोना के कहर से जान गंवाने वाले की अस्थियों को मुक्तिधाम के कर्मी घनश्याम चौहान ने एक जगह इकट्ठा कर दिया है। मुक्ति धाम में 350 से अधिक लोगों की अस्थियां ढेर के रूप में लावारिस हालात में बिखरी पड़ी हैं।

कोरोना के भय से या अन्य किसी कारण से भले ही इन मृत लोगो की अस्थियों का विसर्जन मान्यताओं के अनुसार नहीं हुआ है पर ऐसे में अब सवाल ये है कि हिंदू मान्यताओं के अनुसार इन मृत लोगों को मोक्ष की प्रप्ति कैसे होगी? मुक्ति कैसे मिलेगी।कोरोना की बिमारी से भारत सहित अन्य देश बुरी तरह प्रभावित हुआ। इस बीमारी के चलते लाखों लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।

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