डीटीपी ने की कार्रवाई:प्रॉपर्टी डीलर अवैध प्लॉट बेचकर निकल रहे जमीन मालिक फंसे, 21 पर केस दर्ज

नारायणगढ़16 दिन पहले
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पंजलासा में साढ़े ग्यारह एकड़ में बनाई जा रही काॅलोनी। - Dainik Bhaskar
पंजलासा में साढ़े ग्यारह एकड़ में बनाई जा रही काॅलोनी।
  • रामपुर वीरान और पंजलासा मौजा में काटी जा रही थी काॅलोनियां

मौजा रामपुर वीरान तथा पंजलासा में अवैध कॉलोनियां काटने के मामले में पुलिस ने डीटीपी की शिकायत पर 21 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जबकि शहर के बीचोंबीच भी 2 से 6 एकड़ में काॅलोनियां काटी जा रही हैं। इन पर कोई कार्रवाई डीटीपी ने नहीं की। मौजा रायपुर वीरान में 6 कनाल जमीन में अवैध कॉलोनी बनाई गई। बेशक कॉलोनाइजर ने इस जमीन में मकान खड़े कर दिए हैं, लेकिन जमीन मालिक धर्मपाल, श्योराम, कुलबीर कुमार व बलबीर सिंह पर केस दर्ज किया।

दूसरी एफआईआर मौजा पंजलासा में साढ़े 11 एकड़ जमीन के मालिक सुभाष चंद, सुरेंद्र सिंह, धर्मपाल, मनजीत सिंह, कश्मीरी सिंह, बलबीर कौर, निर्मल कौर, सलिंद्र कौर, सुरजीत कौर, सिमर कौर, स्वर्ण कौर, प्रकाश कौर, रामकली, मीना, कांता, शशि व अनिल कुमार पर दर्ज हुई।

यहां अभी तक सिर्फ कच्ची सड़कें ही बनी हैं। यहां भी कॉलोनाइजर पर कार्रवाई नहीं की। कुछ मामले ऐसे भी हैं जहां जमीन मालिकों को बरसों पैसे का इंतजार करना पड़ा, लेकिन कॉलोनाइजर न तो खुद जमीन खरीद सका और न प्लाट बिक सके। आखिर में जमीन मालिक को जमीन वापस लेनी पड़ी है।

एक भी कॉलोनी का लाइसेंस नहीं

वैसे तो नारायणगढ़, शहजादपुर और काला अम्ब में बहुत सी छोटी मोटी कालोनियां बन चुकी हैं या बन रही हैं, लेकिन किसी भी कॉलोनाइजर ने आज तक जमीन की सीएलयू नहीं करवाई है। दरअसल, जमीन की प्रयोग बदलवाने और लाइसेंस लेने के लिए भारी भरकम फीस जमा करानी होती है। फीस जमा न करवाकर कॉलोनाइजर सरकार को दोतरफा नुकसान पहुंचाता है। एक तो फीस की चोरी करता है दूसरा स्टांप ड्यूटी की।

दीन दयाल आवास योजना के तहत 5 एकड़ में बन सकती है कॉलोनी

वैसे तो रिहायशी कॉलोनी के लिए 10 एकड़ जमीन होनी जरूरी है। जबकि सरकार की दीन दयाल आवास योजना में 5 एकड़ जमीन में कॉलोनी बनाई जा सकती है। इसके लिए जमीन मालिक या कॉलोनाइजर को करीब 50 लाख रुपए प्रति एकड़ फीस जमा करानी होगी। इसके बावजूद किसी भी रिहायशी जमीन कालोनी को अप्रूवल नहीं है।

लालच में आकर ऐसे फंसता है जमीन मालिक
अकसर कॉलोनाइजर जमीन के महंगे दाम लगाकर या उसकी पूरी जमीन खरीदने का लालच देकर जमीन मालिक को फंसाता है। जमीन मालिक को कुल रकम का 20-25 प्रतिशत पैसा देकर रजिस्ट्री का लंबा समय लिया जाता है। फिर बयनामे पर ही प्लॉटों को बेचा जाता है। कॉलोनाइजर सिर्फ चांदी कूटता है। जबकि मुकदमा जमीन मालिक को भुगतना पड़ता है। कॉलोनाइजर का नाम इसलिए भी नहीं आता कि उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं होते और जमीन मालिक चाह कर भी कॉलोनाइजर का नाम नहीं ले सकता।

  • अवैध कॉलोनी शहर के नजदीक हो या दूर, सभी पर कार्रवाई की जाती है। इससे पहले भी कई अवैध कॉलोनियों को तोड़ा गया और केस भी दर्ज करवाया गया है। शहर में जो भी कॉमर्शियल या रेजिडेंशियल अवैध काॅलोनियां बस रही हैं। सभी पर जल्द उचित कार्रवाई की जाएगी। - सविता जिंदल, जिला नगर योजनाकार, अम्बाला सिटी
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