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कोरोना काल में सेवा:5 हजार कोरोना मरीजों काे स्वस्थ व कई का अंतिम संस्कार में भी करा चुके हैं डॉ. अभिषेक कुमार सिन्हा

नयागांव6 दिन पहले
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अभिषेक कुमार - Dainik Bhaskar
अभिषेक कुमार
  • संक्रमित होने के बाद भी किया मरीजों की मदद, जान जोखिम में डाल कर रहे मरीजों की सेवा

कोरोना संक्रमण ने एक तरफ दिल को तोड़ देने वाली कई कहानियां सामने आई है इसी क्रम में सोनपुर अनुमंडलीय चिकित्सालय के एक डॉक्टर ने अपने सेवा के बदौलत संक्रमित मरीज व परिजन के अलावे सोनपुर तथा आसपास के लोगों के दिल में अपनी जगह बना लिया।

ऐसे शख्सियत का नाम है डॉ अभिषेक कुमार सिन्हा। संक्रमित मरीजों के बीच इनके निर्भिक सेवा की चर्चा लोगों के बीच खूब हो रही है। डॉ. अभिषेक कुमार सिन्हा बताते हैं वे एमबीबीएस एमडी के अलावे आई आई एम बैंगलोर से किए हुए हैं। इसके अलावा उन्हें जनरल मैनेजमेंट इन हेल्थ केयर का अनुभव भी है। पटना कदमकुआं के रहने वाले डॉ. सिन्हा के पिता एक निजी विद्यालय के सेक्रेटरी है। डॉक्टर सिन्हा ने बताया कि मई 2019 में वे सोनपुर ज्वाइन किए थे। जनवरी 2020 से यहां कोरोना संक्रमित मरीज मिलने शुरू हो गए थे। वे अब तक लगभग कोरोना संक्रमण के अलावा पांच हजार से ऊपर मरीज को अपने उपचार से स्वस्थ कर दिए हैं।

कोरोना संक्रमित मरीज का अंतिम संस्कार भी किया

कोरौना के पहली लहर में नया गांव हसनपुर के एक व्यक्ति की मौत संक्रमण से हो गई थी। कोरोना के प्रोटोकॉल के तहत परिजन को शव का अंतिम संस्कार कराना था। इसे लेकर डॉक्टर सिन्हा स्वयं मृतक के घर शव लेकर पहुंचे। वहां पहुंचने के उपरांत उन्होंने पाया कि मृतक की पत्नी के अलावे के दो छोटे-छोटे बच्चे ही हैं।

जान जोखिम में डाल कर रहे मरीजों की सेवा

कोरोना महामारी के बीच डॉ अभिषेक कुमार सिन्हा पिछले डेढ़ साल से लगातार मरीजों की उपचार कर रहे हैं। कोरोना संक्रमितों के बीच रहने के कारण उन्होंने अपने परिजनों से भी दूरियां बना ली हैं। सुबह से लेकर शाम तक मरीजों की इलाज करते हैं। रात में घर पहुंचने पर एक कमरे में बंद हो जाते हैं। उनका कहना है कि मरीजों की सेवा करने के लिए जान जोखिम में डालना मेरा कर्तव्य है।

संक्रमित होने के बाद भी किया मरीजों की मदद

कोविड केयर सेंटर पर ड्यूटी के दौरान डॉ. सिन्हा खुद भी कोरोना संक्रमित हो गए थे, लेकिन इसके बाद भी ठीक होने पर वह पुन: ड्यूटी पर आ गए हैं। उनका कहना है कि मरीजों की जान बचाने के लिए वह हर संभव प्रयास करेंगे। महामारी के बीच अपनों से दूरियां बनाकर मरीजों की सेवा करना ही मेरा धर्म और कर्तव्य दोनों हैं।

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