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ज्ञापन:50 साल पहले गांधी सागर के लिए जमीन छोड़ी, अब वन विभाग को देने काे प्रशासन फिर छीन रहा जमीन

नीमच10 महीने पहले
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  • कलेक्टर के नाम दिए ज्ञापन में चैनपुरिया ब्लॉक व रावलीकुड़ी के किसानों ने कहा आखिर कब तक परेशान करेंगे

50 साल पहले गांधी सागर बांध निर्माण के लिए बरामा की पुश्तैनी जमीन छोड़ी थी। शासन-प्रशासन ने रामपुरा क्षेत्र के ग्राम चैनपुरिया ब्लॉक व रावलीकुड़ी में जमीन देकर बसाया था। अब कुकड़ेश्वर क्षेत्र में बनने वाले बांध के कारण हमारी जमीन वन विभाग को देने के लिए छिनी जा रही है। जहां हम 50 सालों से खेती-मजदूरी कर अपना घर-परिवार चला रहे हैं। यह बात ग्राम चेनपुरिया ब्लॉक व रावलीकुड़ी (चारण बस्ती) के किसानों ने कलेक्टर के नाम सौंपे ज्ञापन में कही। मंगलवार को रामपुरा क्षेत्र के चैनपुरिया ब्लॉक व रावलीकुड़ी (चारण बस्ती) के किसान दोपहर में कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। जहां अपनी मांगों को लेकर कलेक्टर के नाम नायब तहसीलदार प्रशस्तिसिंह को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन का वाचन करते हुए चारण गड़वी समाज के राष्ट्रीय मंत्री सीताराम चारण ने बताया कि हम किसानों की जमीनें बर्रामा तहसील गरोठ में थी। 1959 में गांधीसागर बांध का निर्माण हुआ। तब हमारी अचल सम्पत्ति डूब में आ गई। सरकार ने हमें नीमच जिला के चैनपुरिया ब्लॉक एवं रावलीकुड़ी में स्थापित किया था। जहां हम परिवार सहित 1959 से निवास कर अपना व परिजन का गुजर बसर कर रहे हैं। हमारे पास वर्तमान में चैनपुरिया एवं रावलीकुडी की जमीन के अतिरिक्त आय का एवं जीवन यापन का साधन नहीं हैं। प्रशासन द्वारा कुकड़ेश्वर क्षेत्र में कालिया खो जलाशय का निर्माण किया जा रहा है। इसमें वन क्षेत्र की जमीन आ रही है। पिछले दिनों रामपुरा के तहसीलदार, गिरदावर व मौजा पटवारी हमारे गांव आए और बोले जमीनें तुम्हें छोड़ना पड़ेंगी। क्योंकि कालिया खो जलाशय का निर्माण किया जा रहा है। जिस भूमि के बदले राजस्व विभाग 27 हेक्टेयर भूमि वनविभाग को देगा। राजस्व विभाग के पास चैनपुरिया ब्लॉक एवं रावलीकुड़ी के तुम लोगों के कब्जे आधिपत्य की भूमि के अतिरिक्त अन्य कोई भूमि वनविभाग को देने के लिए नहीं है।

150 से ज्यादा परिवार कहां जाएंगे 
ग्रामीणों ने कहा कि प्रशासन 50 साल बाद हमसे यह जमीन छीनेगा तो यहां रहने वाले 150 से ज्यादा परिवार कहा जाएंगे और कैसे अपना जीवन बसर करेंगे। जबकि कई कृषकों के पास बाकायदा भूमि को लेकर पट्टे भी है तो अधिकांश अज्ञानता के कारण पट्टा नहीं करवा पाए थे। वे शासन को नियमित दंड इत्यादि जमा करा रहे हैं। प्रशासन के पास वन विभाग को देने के लिए काफी जगह है। हम किसानों को उक्त जमीन से नहीं हटाया जाए। ज्ञापन देते समय ग्राम चारण गड़की समाज के राष्ट्रीय मंत्री भूपेंद्रसिंह भीमावत, ग्राम पंचायत चेनपुरिया ब्लॉक के सरपंच गोविंद चारण, ग्राम पंचायत खिमला ब्लॉक के सरपंच मथुरालाल चारण, रामलाल चारण, नारूलाल चारण, मांगीलाल चारण, शंकरलाल चारण, लाला चारण, नाथू चारण, नारू-देवाजी चारण सहित दोनों गांवों के किसान मौजूद थे।

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