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धर्म:एक पत्थर भगवान बन जाता है, पर आदमी नहीं बन पाता

नीमचएक महीने पहले
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  • विकास नगर स्थित आराधना भवन में भक्तामर का भावार्थ पूर्ण करते हुए मुनिश्री संयम रत्न विजयजी ने कहा

हे जिनेन्द्र! मेरे (मानतुंगसूरि)द्वारा भक्ति पूर्वक तुम्हारे गुणों से स्तोत्र रूपी माला का गुंफन किया है, वह सुंदर वर्ण रूपी विचित्र पुष्पों वाली है। जो मनुष्य अनवरत तुम्हारी उस माला को गले में धारण करता है, वह उच्च सम्मान को प्राप्त करता है, लक्ष्मी विवश होकर स्वयं उसके पास चली आती है। यह बात भक्तामर का भावार्थ पूर्ण करते हुए मुनिश्री संयम रत्न विजयजी ने कही। विकास नगर स्थित आराधना भवन में नियमित प्रवचन के दौरान शनिवार को मुनिश्री संयम रत्न विजयजी ने भक्तामर का भावार्थ पूर्ण करते हुए कहा कि जब वीतरागता आती है तब न कोई ऊंचा रहता है और न कोई नीचा, न कोई बड़ा रहता है और न कोई छोटा। वीतराग से अधिक इस दुनिया में कोई सुखी नहीं होता। वीतराग से अधिक इस दुनिया में कोई अभय नहीं होता। वीतराग से अधिक इस दुनिया में कोई भी तनाव मुक्त नहीं होता। उसे न अनिद्रा की बीमारी सताती है और न निद्रा की बीमारी सताती है, न काल्पनिक भय सताता है और न वास्तविक भय सताता है। न भय, न शोक, न घृणा, न किसी के प्रति राग और न किसी के प्रति द्वेष, इन सब झंझटों से मुक्त होकर वह चेतना की सर्वोच्च भूमिका पर चला जाता है। विश्वास जीवन की शक्ति है। आत्म-विश्वास से बढ़कर दूसरी कोई ताकत नहीं है। हम दूसरों पर तो विश्वास कर लेते हैं, लेकिन खुद अपने पर नहीं कर पाते। एक पत्थर भगवान बन जाता है, पर आदमी नहीं बन पाता। जब कोई शिल्पी पत्थर पर कोई छैनी और हथौड़ा चलाता है, तो वह कोई प्रतिकार नहीं करता और न ही खंडित होता है। श्रद्धा समर्पण भाव से शिल्पी की हर चोट को सहता है। शिल्पी जितना काटता है, कट जाता है, जितना छीलता है छिल जाता है, जितना मिटाता है मिट जाता है। लेकिन इंसान पर यदि कोई सदगुरु जरा-सी चोट करता है, तो प्रतिकार करता है, उठ खड़ा होता है, यही वजह है कि यह इंसान भगवान नहीं बन पाता। जीवन समर्पण मांगता है। भारत की संस्कृति समर्पण की संस्कृति है, अगर हम एक बार अपने आराध्य के प्रति सर्वस्व समर्पण कर दें, तो फिर प्रभु हम पर कृपा की वर्षा कर देंगे। श्रद्धा अन्तकरण का विषय है। श्रद्धा ही मोक्षदायिनी है। प्रवचन के पश्चात भक्तों ने मुनिश्री से आशिर्वाद लिया।

मुनिश्री के सानिध्य में पौधरोपण आज- रविवार काे मुनिश्री संयम रत्न विजयजी व मुनिश्री भुवन रत्न विजयजी के सानिध्य में पौधरोपण होगा। जैन सोशल ग्रुप संस्कार द्वारा आज सुबह 8.30 बजे संजीवनी नाला किनारे पर पौधरोपण किया जाएगा।

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