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इनसे सीखें कोरोना को हराना:बच्चों ने खेल-खेल में जीती कोरोना से जंग, कब ठीक हो गए, पता ही नहीं चला

नीमच6 दिन पहले
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जिले में कोरोना संक्रमण की शुरूआत से लेकर अब तक 6 माह से लेकर 15 साल तक के 550 बच्चे कोरोना पॉजिटिव निकले है। लेकिन सभी बच्चे खेल-खेल में कोरोना से जंग जीत गए। उन्हें पता ही नहीं चला कि वे कब ठीक हो गए। बच्चों ने एक साफ संदेश दिया कि आप खुद पर ध्यान दो और भूल जाओ कोरोना क्या है? तनाव से दूरी और पॉजिटिव सोच से ही इस बीमारी को हरा सकते हैं।
मोबाइल में गेम खेलकर निकाला समय
7 साल की अलफिया की रिपोर्ट पॉजीटिव आई थी तब वह तीन दिन अस्पताल और 7 दिन कोविड सेंटर में रही। वह दिनभर अपने पास मोबाइल रखती और उसमें कभी गेम खेलती तो कभी रिश्तेदारों से बात करके अपना मन बहलाती।

घर से अलग रहने पर हमेशा माता-पिता से सवाल करती तो वह उसे कोरोना बीमारी के बारे में बताकर गाइडलाइन समझाते थे। जिसका पालन उसकी आदत में आ गया। वह हमेशा पड़ोसी दोस्तों को याद करती थी लेकिन नहीं मिलने पर उदास होकर रूठ जाती फिर उसे मनाना पड़ता था। माता-पिता की समझाइश से उसने काेराेना से जंग जीत ली।
स्टाफ ने चॉकलेट देकर खुश किया

4 साल की आयशा की रिपोर्ट पॉजीटिव आने पर उसे 10 दिन कोविड सेंटर में रहना पड़ा। घरवाले भी साथ होने से उसे अकेलापन नहीं लगा लेकिन खिलौने नहीं मिलने से वह कई बार नाराज हुई। जिससे अस्पताल स्टाफ ने चॉकलेट देकर खुश किया।

वह दिनभर हॉस्पिटल को घर ही समझकर खेलती-कूदती रही। उन्हें इतना ही याद हैं कि हमें रोज गरम पानी पीने को दिया जाता। कई बार दवाई लेने में आनाकानी की जिसे मोबाइल गेम खाेलकर देते तो कभी बातों में बहलाकर दवाई देते थे।

हॉस्पिटल में मचाते रहते थे धमाचौकड़ी
5 साल के रजिक जब पॉजिटिव आया तो उसे भी कोविड सेंटर भी रहना पड़ा। माता-पिता ने अस्पताल में उसे रोज धर्म आराधना पढ़ाई। वह हॉस्पिटल में भी ऐसा रहा, मानों घर पर रह रहे हों। दूसरे बच्चों के साथ मस्ती के साथ धमाचौकड़ी मचाई। मोबाइल में यू ट्यूब पर वीडियो देखकर वह काफी खुश हो जाता था। उन्हें किसी प्रकार की दवाएं भी नहीं दी गई। इसके बाद स्वस्थ होकर घर चले गए।

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