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आयोजन:महामंडलेश्वर की टीम आज शिवना तट पर 11 हजार दीप प्रज्वलित करेगी

नीमच2 महीने पहले
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  • राममंदिर जन्म भूमि के पूजन की खुशी मंदसौर शहर में भी मनाई जाएगी, इस आयोजन में कोई भीड़ एकत्र नहीं की जाएगी

5 अगस्त को अयोध्या में रामजन्म भूमि पर भव्य राममंदिर का भूमिपूजन का उत्सव देशभर में मनाया जाएगा। इसी क्रम में मंदसौर में भी महामंडलेश्वर मधुसूदानंद महाराज की टीम द्वारा पशुपतिनाथ मंदिर घाट पर 11 हजार दीप प्रज्वलित किए जाएंगे। वहीं अंचल में भी आयोजन होंगे। सालों के संघर्ष के बाद कोर्ट के आदेश पर अयोध्या में राममंदिर निर्माण होने जा रहा है। 5 अगस्त को मंदिर का भूमिपूजन होगा। इसका जश्न देशभर में लोग अपने-अपने हिसाब से मना रहे हैं। कई शहरों से आयोजन के लिए लोग अपनी तरफ से सामग्री व मिठाइयां पहुंचा रहे हैं। महामंडलेश्वर मधुसूदानंद महाराज ने बताया कि 5 अगस्त के ऐतिहासिक दिन जब अयोध्या में रामलला के मंदिर का शिलान्यास होगा और पूरे देश में दीपावली मनाई जाएगी। इसी दिन भगवान पशुपतिनाथ के चरणों में बहने वाली शिवना के तट पर शाम 6 बजे 11 हजार दीप प्रज्वलित किए जाएंगे। इस आयोजन में कोई भीड़ एकत्र नहीं की जाएगी। आठ से दस लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए दीप प्रज्वलित करेंगे। इस दौरान भगवान के कोरोना महामारी से मुक्ति, अच्छी बारिश की कामना भी की जाएगी। महामंडलेश्वर ने कोरोना संक्रमण के चलते लोगों से अपने घरों पर दीप प्रज्वलित करने की बात कही।

राम मंदिर आंदोलन के कारसेवक पंडित जोशी 90 और 92 में रहे सहभागी
भास्कर संवाददाता | पिपलियामंडी
समीपस्थ ग्राम जेतपुरा के संगीत कथावाचक पंडित ओंकारलाल जोशी जो कि बाबरी मसजिद विध्वंस में शामिल रहे हैं। इन्होंने ढांचा गिराते वक्त अपने सिर पर चोट खाई और 17 टांके आए। आज जब रामजी को 28 सालों बाद अपना घर फिर मिलने जा रहा है तो पंडित जोशी ने बताया कि उनके बरसों का इंतजार खत्म होने जा रहा है। 6 दिसंबर 1992 से लेकर आजतक मन में बस यही आस थी कि राम जन्मभूमि पर जल्द से जल्द भव्य मंदिर का निर्माण हो और आज सालों इंतजार के बाद सपना पूरा होने जा रहा है। जब राम शिला देश में घूमी उसमें भी जोशी सहभागी रहे। उनका गाया भजन जहां रामजी ने लिया है जन्म अयोध्या को कैसे भुलाएंगे हम भी बहुत फेमस हुआ है। जोशी 90 और 92 में हुई कारसेवा में सहभागी रहे, 90 में जहां उन्हें चित्रकूट में ही रोक लिया गया था जबकि 92 में वह ढांचे पर सबसे पहले चढ़े 60 कारसेवकों में शामिल रहे। उन्होंने साध्वी ऋतुंभराजी के भाषण से प्रेरित होकर ढांचे पर चढ़ाई कर दी और पहला गुंबद गिराने के बाद बड़े गुंबद पर चढ़ाई करने के लिए जगह बना रहे थे तब ऊपर से भारी ईट गिर गई और वे घायल हो गए, उस समय मुरलीमनोहर जोशी का भाषण चल रहा था, जोशी मुरली मनोहर जोशी को खून का तिलक करने मंच की तरफ दौड़े, उन्हें फैजाबाद अस्पताल ले जाया गया, जहां उनके सिर पर 17 टांके आए। जब वो सभी के साथ घर नहीं पहुंचे तो लोगों में संदेह पैदा की, कहीं कुछ अनहोनी तो नहीं हो गई पर रामजी की कृपा से सभी कुशल हुआ और 10 दिनों बाद उनकी अस्पताल से छुट्टी हुई। पूरे देश में कर्फ्यू का माहौल था, वो रात्रि में घर पहुंचे थे।

शहर के रवींद्र पांडे ने दिया था 1990 आंदोलन में योगदान
बोले : रास्तों पर लोग मदद के लिए तैयार खड़े रहे

भास्कर संवाददाता | मंदसौर
राम मंदिर निर्माण के लिए 1990 के आंदोलन में मंदसौर व नीमच संयुक्त जिले से भी करीब 350 से अधिक लोगों का जत्था रवाना हुआ था। आंदोलन में शामिल होने पर केंद्रीय कारागार फतेहगढ़ में बंद रहे रवींद्र पांडे ने भास्कर के साथ अपने यादें साझा कीं। उन्हाेंने बताया कि उस समय यूपी की सीमाएं सील थीं। टुकड़ों-टुकड़ों में लोग यूपी पहुंच रहे थे। मंदसौर से 350 लोगों का दल करीब 16 अक्टूबर को अवध एक्सप्रेस से रवाना हुए थे। राजस्थान में उतरकर रात को राजस्थान यूपी की बाॅर्डर पर आखिरी गांव में रात को ठहरे थे। वहां गरीब से गरीब लोग भी आंदोलन में शामिल होने वाले लोगों को अपने घर ठहरा रहा था। हमने रात को वहां भोजन किया व सुबह का भोजन पैक कर निकल गए। बाॅर्डर सील होने पर रेलवे पटरी पर चलते हुए यूपी जा रहे थे तभी एक मालगाड़ी के चालक ने हमारी मदद की व खाली बोगी में 45 लोगों को बैठाकर फतेहपुर सिकरी से पहले उतार दिया। यहां से आगरा होते हुए कानपुर पहुंचे। यहां मैंने अयोध्या के लिए 45 टिकट एक साथ लिए। इस वजह से सीआईडी ने ट्रेन में मुझे 25 अक्टूबर 1990 को पकड़ लिया। उन्होंने 26 अक्टूबर को केंद्रीय कारागार फतेहगढ़ में बंद कर दिया। 3 नवंबर को छोड़ा। उसके बाद अयोध्या गए। रास्तेभर लोग एक-दूसरे की मदद करने को तैयार खड़े थे। गांव-गांव में गरीबों ने भी लोगों को भोजन कराया।

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