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  • Money Was Taken From The Farmers Through Brokers, In Return, The Concentration Of Opium Morphine Was To Be Told More And 10 12 Saw Leases Were To Be Given.

घूसखोर आईआरएस शंशाक के खिलाफ 1012 पन्नों का चालान पेश:दलालों के जरिए किसानों से लिए थे रुपए, इसके एवज में अफीम मार्फिन की गाढ़ता ज्यादा बताने और 10/12 आरी के पट्टे दिलाना थे

नीमच/कोटा12 दिन पहले
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शशांक यादव। - Dainik Bhaskar
शशांक यादव।
  • सुनवाई आज

अल्कोलाइड फैक्टरी के प्रभारी महाप्रबंधक आईआरएस शशांक यादव के खिलाफ दो महीने की जांच व पूछताछ के बाद एसीबी कोटा स्पेशल यूनिट ने कोर्ट में 1012 पेज का चालान पेश कर दिया है। एसीबी ने चालान में लिखा “पकड़े जाने पर आईआरएस बोला- किसानों से वसूली है रकम, ले देकर मामला निपटा लो, ये उसके भ्रष्टाचार का सबूत है’। जीएम यादव को 17 जुलाई को एसीबी कोटा ने हैंगिंग ब्रिज के यहां पकड़ा था। इसकी कार से 16 लाख 32 हजार 410 रुपए बरामद हुए थे।

इनमें 47 हजार रुपए सरकारी खर्च के बताए गए जो जांच में सही निकले। बाकी 15 लाख 85 हजार 410 रुपए अवैध थे जो किसानों से वसूले गए थे। हालांकि अभी तक ये खुलासा नहीं हुआ है कि ये रकम किन किसानों से वसूली गई। एसीबी के डीएसपी धर्मवीर सिंह ने बताया कि मामले में सुनवाई 15 सितंबर को होगी।

जीएम यादव दो माह में यह जवाब नहीं दे सका कि जब्त हुई रकम कहां से लाए? उसने एसीबी जांच को प्रभावित करने के लिए अफसरों से इतने दिनों में तीन बार झूठ बोला, लेकिन वो हर बार पकड़ा गया। गिरफ्तारी के बाद उसने पूछताछ में जो बताया उसकी सच्चाई के लिए एसीबी टीम नीमच फैक्टरी में भी जांच करने आई थी। किसानों से बयान भी लिए थे। यूपी में उसके गांव तक पहुंची थी। उसके द्वारा जो बात कही वह झूठ निकली।

एसीबी जांच को प्रभावित करने के लिए शशांक ने तीन बार झूठ बोला, लेकिन अधिकारियों ने उसे हर बार पकड़ लिया

1. कर्मचारी दीपक से उधार लेकर आया- जांच के दौरान यादव ने बताया कि ये रुपए उसने नीमच ऑफिस में क्लास डी अधिकारी दीपक से उधार लिए हैं। एसीबी ने दीपक से पूछताछ की तो उसने इससे इनकार कर दिया। इससे यादव का झूठ पकड़ा गया।

2. जमीन के लिए उधार लिए हैं- एसीबी के अनुसार यादव ने दोबारा बताया कि उसके पिता रिटायर्ड आईएएस महावीर यादव ने 6 माह पहले 15 लाख रुपए जमीन खरीदने के लिए यूपी निवासी राघवेंद्र उर्फ टीटू से उधार लिए थे। पिता ने ये रकम वापस लौटाने के लिए मुझे दी थी। राघवेंद्र नहीं मिला तो मैं रकम अपने साथ नीमच ले गया। नीमच से गाजीपुर जा रहा था, जहां उसे यह रकम वापस दे देता। कई बार फोन करने और पत्र भेजने के बाद भी टीटू ने जवाब नहीं दिया तो एसीबी ने उसके गांव जाकर पूछताछ की। लेकिन वो यह जानकारी उपलब्ध करवा पाया कि 15 लाख रुपए उसने दिए थे। ऐसे में यह भी तथ्य झूठ साबित हो गया।

3. फिर बोला- पिता ने उधर लौटाने के लिए दिए थे- यादव ने एसीबी से कहा था कि रकम पिता ने उसे उधारी की लौटाने की दी है। इस बात की तस्दीक के लिए एसीबी ने उसके पिता यादव को बुलाया, लेकिन वे नहीं आए। फोन, ई-मेल, पत्राचार और घर के बाहर तामील चस्पा करने के बावजूद उनका कोई जवाब नहीं आया। वो यह साबित नहीं कर पाए कि 15 लाख रुपए उन्होंने बेटे शशांक को दिए थे। ऐसे में यह भी झूठ निकला।

चालान की कॉपी में ये लिखा- एसीबी ने 17 जुलाई 2021 को यादव को पकड़ा तो उसने एसीबी अधिकारियों को ही घूस का ऑफर दे दिया था। उसने कहा कि ये पैसे मैंने दलालों के जरिए किसानों से वसूले हैं। ये रकम अफीम में मार्फिन की गाढ़ता ज्यादा बताने और 10/12 आरी के पट्‌टे देने की एवज में लिए हैं। यही उसके खिलाफ सबसे बड़ा सबूत बना। एसीबी ने अपने चालान में यादव को घूस लेने का दोषी सिद्ध करने के लिए सबसे पहले इसी बात का उल्लेख करते हुए लिखा है कि इससे डॉ. शशांक यादव की आपराधिक मानसिकता व किसानों से वसूली का पता चलता है।

मिठाई के डिब्बे ने उगला सच- अधिकारी धर्मवीर सिंह ने चालान में कहा कि जांच में साफ हो गया कि 15 लाख 85 हजार 400 रुपए की रकम यादव को उसके पिता ने नहीं दी थी। क्योंकि चेकिंग के समय रकम नीमच की मिठाई की दुकान के डिब्बे में मिली है। ऐसे में अगर रकम इलाहाबाद से आते वक्त ही यादव के पास होती तो इस डिब्बे में नहीं मिलती। इससे साफ है कि यादव ने उक्त रकम किसानों से अफीम पट्‌टे जारी करने के एवज में वसूल करके कमाई है।

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