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संक्रमण बढ़ा:सुविधा व सुरक्षा का दायरा घटा, कंटेनमेंट पर्दे की दीवार में सिमटा

नीमच3 दिन पहले
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कोरोना संक्रमण के शुरुआत में पॉजिटिव मरीज आने पर प्रशासन द्वारा जो व्यवस्था की जाती थी उसमें चार महीने में बहुत बदलाव आ गया है। शासन ने समय-समय पर कंटेनमेंट की गाइडलाइन में बदलाव किया। अब यह पाबंदी सिर्फ मरीज मिलने पर उसके घर की दहलीज तक सीमित रह गई है। निगरानी के लिए अब किसी को नहीं बैठाया जाता। मरीज तो अस्पताल में रहता लेकिन उनके परिजन आवश्यकता की सामग्री खरीदने के लिए कंटेनमेंट को तोड़कर भी बाहर निकल जाते हैं। चार महीने तक कंटेनमेंट एरिया में सख्ती दिखाई। अब संक्रमण नहीं थम रहा तो प्रशासन ने भी औपचारिकता निभाना शुरू कर दी। शहर के साथ गांवों में रोज नए मरीज सामने आ रहे हैं। शहरी क्षेत्र में नगर पालिका, स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन के अधिकारी पहुंचकर मरीज के घर को कंटेनमेंट बनाते हैं। गांवों में यह जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन, नगर परिषद या पंचायत की है। निगरानी के लिए स्टाफ भी नहीं मिल रहा है। शिक्षक व आंगनवाड़ी-आशा कार्यकर्ताओं को ड्यूटी पर लगाया जाता है। किसी परिवार को जरूरी सामग्री की आवश्यकता पड़ने पर उन्हें उपलब्ध कराने वाला भी कोई नहीं रहता। मजदूरी में परिवार के लोगों को ही कंटेनमेंट से बाहर आना पड़ता है। इससे आसपास के लोगों में भी दहशत का माहौल बनने लगा है।

सिर्फ घर के दरवाजे बंद : निगरानी के लिए अब कोई नहीं रहता तैनात

अब सुरक्षा और सावधानी आपके हाथ में- सितंबर में संक्रमण बढ़ने के साथ मरीज आ रहे हैं। प्रशासन के पास जितना स्टाफ है वह तैनात कर रखा है। जहां स्टाफ नहीं है वहां कंटेनमेंट बनाकर छोड़ देते हैं। इसलिए संक्रमण से बचने के लिए अपनी सुरक्षा स्वयं करना होगी। प्रशासन अपने स्तर पर व्यवस्था कर रहा है।

पहले ऐसे होते थे कंटेनमेंट

  • पॉजिटिव आने पर 10 से 15 घरों को कंटेनमेंट की जद में लेते थे।
  • एक कंट्रोल रूम बनाकर चार से पांच कर्मचारी तैनात करते।
  • परिवार को आवश्यक सामग्री पहुंचाने के लिए कर्मचारी मौजूद रहते।
  • 14 दिन तक परिवार का कोई भी सदस्य बाहर नहीं निकल सकता था।
  • कम्प्यूटर या लैपटॉप के साथ निगरानी दल के कर्मचारी प्रशासन को ऑनलाइन अपडेट देते थे।​​​​​​​

अब ऐसी रहती है व्यवस्था

  • पॉजिटिव मरीज के घर के दरवाजे पर ही कंटेनमेंट बना रहे।
  • कंट्रोल रूम नहीं दो कर्मचारी सुबह से शाम तक बैठे रहते हैं।
  • गांवों में परिवारों को आवश्यक सामग्री पहुंचाने के लिए भी कोई नहीं रहता।
  • कंटेनमेंट में कर्मचारी नहीं होने पर परिवार के सदस्य बाहर आ जाते हैं।
  • अब मोबाइल से ही प्रशासन को अपडेट देते हैं।​​​​​​​

गांवों में सचिव व कोटवार को दे रखी जिम्मेदारी- ^संक्रमण बढ़ने से करीब 270 कंटेनमेंट एक्टिव है। स्टाफ भी कम है। गांवों में निगरानी के लिए सचिव व कोटवार को जिम्मेदारी सौंपी है। लोगों को भी स्वयं जागरूक होने की जरूरत है। कोई पॉजिटिव है तो उसके परिजन स्वयं को होम क्वारेंटाइन करके घर में रहे। ताकि आसपास के लोगों में संक्रमण नहीं फैले।- भव्या मित्तल, कोविड प्रभारी व जिपं सीईओ, नीमच​​​​​​​

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