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अच्छी खबर, एक भी संक्रमित नहीं:कोरोना के बीच इस साल 1422 परिवारों में गूंजी किलकारी, इनमें 736 बेटे व 669 बेटियां शामिल

नीमच8 दिन पहले
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मेटरनिटी वार्ड में नवजात। - Dainik Bhaskar
मेटरनिटी वार्ड में नवजात।
  • डिलीवरी के लिए भर्ती महिलाओं को चिंता थी कहीं संक्रमित न हो जाएं

इस साल बढ़ते कोरोना संक्रमण के मामले और उससे हा़े रही मौत के बीच जिला अस्पताल के मेटरनिटी वार्ड में किलकारियां भी गूंज रही है। पिछले 5 माह में अब तक 1422 महिलाओं का अस्पताल में प्रसव कराया गया। इसमें 736 बेटे तो 669 बेटियों ने जन्म लिया। जिले में पिछले साल 5 से शुरू हुए कोरोना संक्रमण ने अब तक 8 हजार से ज्यादा लोगों को चपेट में ले लिया है।

सबसे अच्छी बात यह रही कि संक्रमण के सबसे खतरनाक स्तर के बाद भी नवजात बच्चों में से एक भी संक्रमित नहीं हुआ। इस साल के मार्च, अप्रैल और मई माह में कोरोना ने हर ओर हड़कंप मचा दिया था। अस्पतालों में इलाज के नाम पर पुराने संसाधनों और अव्यवस्थाओं के बीच कई लोगों ने अपने जान गंवा दी।

किसी के घर में बड़ों का साया हटा तो किसी के घर में युवाओं की मौत ने पूरे परिवार को तोड़ कर रख दिया। अपनों की क्षति इन परिवारों के लिए असहनीय हो गई, लेकिन इसके उलट जिला अस्पताल में जन्में बच्चों की किलकारियों से कई परिवारों के घर आंगन में खुशियों आ गई। गत दिनों बेटे को जन्म देने वाली सुनीता शर्मा ने बताया कि संक्रमण के दौरान उन्हें यही चिंता थी कि कहीं उनका बच्चा भी संक्रमण की चपेट में न आ जाए।

एक पॉजिटिव प्रसूता के बच्चा भी निगेटिव रहा

जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डाॅ. बीएल रावत के अनुसार जहां एक ओर संक्रमितों के लिए संसाधन जुटाए जा रहे थे, वहीं दूसरी ओर प्रसव मामलों के लिए मेटरनिटी स्टाफ अलग कर रखा था। जिन्हें कोविड वार्डों से दूर किए हुए थे। हर प्रसूता का रेपिड टेस्ट किया, जिसमें 1 महिला में संक्रमण के लक्षण दिखाई दिए थे। जिसने स्वस्थ्य बच्चे को जन्म दिया। हालांकि बाद में उसका भी टेस्ट कराया लेकिन वह निगेटिव आया।

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