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कल महा शरद पूर्णिमा:अधिक मास के चलते कल चांद होगा सामान्य से बड़ा

नीमचएक महीने पहले
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  • उत्सव 30 को, व्रत 31 को रहेगा, जगह-जगह होगा खीर का वितरण, खरीदारी के भी योग

शरद पूर्णिमा की तिथि पर चांद अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होगा। इस बार शरद पूर्णिमा यानी आश्विन पूर्णिमा तिथि 30 अक्टूबर को शाम 5.26 बजे शुरू होगी जो 31 अक्टूबर को रात 8.19 बजे तक रहेगी। ऐसे में शरद पूर्णिमा का महोत्सव 30 को और व्रत 31 को रहेगा। अधिकमास होने से पूर्णिमा का चांद सामान्य से ज्यादा बढ़ा होगा। इसे महापूर्णिमा भी कहा जाएगा। इस दिन खीर का प्रसाद ग्रहण करने से मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। शुक्रवार को शरद पूर्णिमा पर अमृत व सर्वार्थ सिद्धि रवि योग का संयोग रहेगा। ज्योतिषाचार्य पं. गोविंद उपाध्याय ने बताया कि इस दिन भगवान चंद्रदेव की पूजा की जाती है। शरद पूर्णिमा को चंद्रमा के अर्घ्य देकर और पूजा करने के बाद चंद्रमा को खीर का भोग लगाना चाहिए। रात 10 से 12 बजे तक चंद्रमा की किरणों का तेज अधिक रहता है। इस बीच खीर के बर्तन को खुले आसमान में रखना फलदायी होता है। उसमें औषधीय गुण आ जाते हैं और वह मन, मस्तिष्क व शरीर के लिए अत्यंत उपयोगी मानी जाती है। इस खीर को अगले दिन ग्रहण करने से घर में सुख-शांति रहती है। बीमारियों से छुटकारा मिलता है। शरद पूर्णिमा की रात में चांदनी में रखी खीर ग्रहण करने का विधान है।

शास्त्रों के अनुसार यह होती हैं चंद्रमा की 16 कलाएं

अमृत, मनदा (विचार), पुष्प (सौंदर्य), पुष्टि (स्वस्थता), तुष्टि (इच्छापूर्ति), ध्रुति (विद्या), शाशनी (तेज), चंद्रिका (शांति), कांति (कीर्ति), ज्योतसना (प्रकाश), श्री (धन), प्रीति (प्रेम), अंगदा (स्वायित्व), पूर्ण (पूर्णता अर्थात कर्मशीलता) और पूर्णामृत (सुख)। चंद्रमा के प्रकाश की 16 अवस्थाएं हैं। मनुष्य के मन में भी एक प्रकाश है। मन ही चंद्रमा है। चंद्रमा जैसे घटता-बढ़ता रहता है। मन की स्थिति भी यहीं होती है।

नवग्रहों में प्रत्यक्ष देवता है चंद्रमा- पं. उपाध्याय ने बताया कि नवग्रहों में हम सूर्य और चांद को ही देख सकते हैं। चंद्रमा को प्रत्यक्ष देव माना है। समुद्र मंथन से निकले 14 रत्नों में से एक चंद्रमा को मानते हैं। इस दिन लोग रात्रि में खीर बनाकर भगवान विष्णु को भोग लगाते हैं। खीर को खुली चांदनी में रखा जाता है। इसमें औषधि गुण वाली चंद्रमा की किरणें मिलती है। इन किरणों से अमृत बरसता है। इस दिन मंदिरों में पूजा-पाठ, हवन, भजन संध्या, लक्ष्मी पाठ, कीर्तन, जागरण होते हैं।

राशि अनुसार यह करें

मेष: चावल को दूध में धोकर बहते हुए पानी में बहाएं। वृष: दही और गाय का भी मंदिर में दान करें। मिथुन: दूध और चावल का दान करें तो उत्तम रहेगा। कर्क: मिश्री मिला हुआ दूध दान करना पुण्यफलदायी। सिंह: मंदिर में गुड़ तांबा दान करें। कन्या: कन्याओं को फल बांटे। तुला: दूध, चावल व शुद्ध घी का दान करने से घर में आती है समृद्धि। वृश्चिक: कन्याओं को दूध व चांदी का दान दें। धनु: चना दाल मंदिर में दान दें। मकर: बहते पानी में चावल डालें। कुंभ: दृष्टिहीनों को भोजन कराएं। मीन: ब्राह्मणों को भोजन करवाएं।

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