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पर्व त्योहार:शनि जयंती, वट सावित्री व गंगा दशहरा पर आराधना से मिलेगी सुख-समृद्धि

नीमच25 दिन पहले
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  • ज्येष्ठ माह में आने वाली अपरा एकादशी के दिन तुलसी, चंदन, कपूर, गंगाजल से की जाती है भगवान विष्णु की पूजा

ज्येष्ठ मास में कई प्रमुख पर्व व त्योहार है। इस दौरान वट सावित्री व्रत, शनि जयंती, निर्जला एकादशी और 10 दिवसीय गंगा दशहरा उत्सव जैसे त्योहार रहेंगे। ज्योतिषाचार्य पं. गोविंद उपाध्याय ने बताया कि ज्येष्ठ माह 24 जून तक रहेगा, इन दिनों में गर्मी चरम पर रहती है। इस माह में पढ़ने वाले पर्व-त्योहार पर भगवान की आराधना व पूजन करने से सुख, समृद्धि और आरोग्यता मिलती है। भवन-भूमि, सोना-चांदी खरीदना फलदायी होगा। 10 व 24 जून को वट सावित्री व्रत : पं. उपाध्याय ने बताया कि स्कंद पुराण तथा भविष्योत्तर पुराण के अनुसार ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को वट सावित्री वृत करने का विधान बताया गया है।

अत: ज्येष्ठ माह की अमावस्या एवं पूर्णिमा में तीन दिन पहले त्रयोदशी से यह व्रत प्रारंभ करके पूर्ण किया जाता है। अमावस्या एवं पूर्णिमा दोनों में ही यह व्रत करने का विधान है। पं. उपाध्याय ने बताया कि 10 जून काे वट सावित्री अमावस्या है। इसके लिए व्रत 8 जून से प्रारंभ हो जाएगा। 10 जून को अमावस्या के दिन माताएं-बहने वट वृक्ष (बरगद के पेड़) की पूजन कर परिक्रमा करती है और सौभाग्य की कामना करती है। इसी प्रकार 24 जून काे पूर्णिमा हें, इसे वट सावित्री पूर्णिमा के रूप में मनाया जाएगा। इसके लिए 22 जून से व्रत प्रारंभ होगा। इस दिन भी अमावस्या की तरह माता-बहने वट वृक्ष का पूजन करती है।

ज्येष्ठ माह के वृत-त्योहार

6 जून अपरा एकादशी: ज्येष्ठ महीने के कृष्णपक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी या अचला एकादशी भी कहा जाता है। ये व्रत 6 जून को किया जाएगा। अपरा एकादशी के दिन तुलसी, चंदन, कपूर, गंगाजल सहित भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इस ककड़ी का भगवान को अर्पित कर स्वयं को भी ककड़ी का सेवन करना चाहिए। 10 जून शनि जयंती: ज्येष्ठ महीने की अमावस्या तिथि को शनि जयंती के रूप में मनाया जाता है। ये पर्व 10 जून को है। ग्रंथों के अनुसार इस दिन शनि देव का जन्म हुआ था। व्रत और शनि पूजा करने से कुंडली में शनि दोष खत्म हो जाते हैं। हर तरह की परेशानियां इस व्रत से दूर होती हैं। 13 जून रम्भा तृतीया: ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की तृतीया पर रम्भा तृतीया व्रत किया जाता है। इस दिन देवी पार्वती की पूजा की जाती है। ये व्रत एक साल तक किया जा सकता है। रम्भा तृतीया व्रत खासतौर से महिलाओं के लिए ही होता है। इस व्रत को करने से सौभाग्य प्राप्त होता है। रम्भा ने इसे सौभाग्य प्राप्ति के लिए ही किया था। ये व्रत 13 जून को किया जाएगा। इस दिन रवि पुष्य मुहूर्त है। 16 जून को अरण्य षष्ठी: ज्येष्ठ शुल्क पक्ष की षष्ठी को अरण्य षष्ठी कहा जाता है, यह 16 दिन जून को है। इस दिन मां विंध्यवासिनी का पूजन किया जाता है। यह पूजन सुख-समृद्धि और आरोग्यता की कामना के लिए किया जाता है। 20 जून गंगा दशहरा: ज्येष्ठ महीने के शुक्लपक्ष की दशमी को ये व्रत किया जाता है। गंगा दशहरा पर्व 10 दिन तक मनाया जाता है, यह 11 जून से प्रारंभ होकर 20 जून का दशमी तक मनाया जाता है। इन 10 दिनों तक गंगा माता का पूजन किया जाता है और तीर्थ स्थलों पर उत्सव मनाया जाता है। गंगा दशमी के दिन गंगा स्नान और विशेष पूजा की जाती है। इसके साथ ही इस दिन दान का भी महत्व है। इसी दिन श्री बटुक भैरव जयंती होने से भैरव पूजन किया जाता है। 21 जून निर्जला एकादशी: ज्येष्ठ महीने के शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि यानि 21 जून को निर्जला एकादशी का व्रत किया जाता है। इस व्रत में पानी पीए बिना रहा जाता है अर्थात निर्जल रहकर उपवास रखने का विधान है। इस दिन भगवान को आम का फल चढ़ाकर उसे ग्रहण किया जा सकता है।

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