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अनंत यात्रा से अनंत पीड़ा:जिस अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए थे, नहीं पता था दुनिया से विदा भी एक साथ होंगे

रतलाम14 दिन पहले
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एक ही चिता पर हुआ अंतिम संस्कार। इनसेट-राजकुमार-प्रकाश दीक्षित। - Dainik Bhaskar
एक ही चिता पर हुआ अंतिम संस्कार। इनसेट-राजकुमार-प्रकाश दीक्षित।
  • आज खबर में ऐसे परिवारों का दुख जिनके लिए अपनों की मौत का पहाड़ टूटा

ॐ शांति... शांति... शांति... अंतिम यात्रा पर जाते समय यह शब्द सुनाई देता है। इन दिनों मुक्तिधाम और सोशल मीडिया के ग्रुप में यह शब्द और ध्वनि दारुण बन चुके हैं। कोरोना ने अब परिवार को तोड़ना शुरू कर दिया है। शहर में कई ऐसे परिवार हैं, जहां कोरोना एक से ज्यादा सदस्यों के प्राण लील चुका है। कोरोना का कहर एक परिवार पर तो ऐसा टूटा कि जिस अग्नि को साक्षी मानकर दंपती ने सात फेरे लिए थे, विदा भी एक अग्नि में ही हुए। पढ़ें.... कोरोना ने किस तरह परिवार को तोड़ा

1. पति की मौत के कुछ देर बाद ही पत्नी ने दम तोड़ा, बेटी ने दी मुखाग्नि, 14 दिन बाद बेटे को बताया - माता-पिता नहीं रहे

पीएंडटी कॉलोनी के एक परिवार पर कोरोना कहर बनकर टूटा है। 12 अप्रैल को राजकुमार दीक्षित (74) और प्रकाश दीक्षित (70) को मेडिकल काॅलेज में भर्ती किया गया था। उनके दामाद हिमांशु जोशी ने बताया 16 अप्रैल को कॉलेज की अव्यवस्था के कारण ससुर राजकुमार दीक्षित ने दम तोड़ दिया।

सासु मां प्रकाश दीक्षित इस दर्द को सहन नहीं कर सकी, कुछ देर में उन्होंने भी दम तोड़ दिया। उनका बेटा दिनेश दीक्षित (39) भी उस दौरान आईसीयू में भर्ती था। ऐसे में उन्हें मौत की सूचना नहीं दी, बेटी अर्चना जोशी ने ही मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार किया। पति और पत्नी के शव को एक ही चिता पर रखा गया था। 14 दिन बाद 30 अप्रैल को बेटा दिनेश दीक्षित अस्पताल से घर लौटा... तब उन्हें बताया कि मां-पिता नहीं रहे।

2. 13 दिन में टूट गया परिवार... मां और पिता की मौत, आईसीयू में बेटा

पावर हाउस रोड पर रिलायंस पेट्रोल पंप... शायद ही किसी से अनजाना है। इस पंप के मालिक वाधवा परिवार पर कोरोना कहर बनकर टूटा। खुशहाल परिवार सिर्फ 13 दिन में ही टूट गया। तबीयत खराब होने पर सतबीर सिंह वाधवा और परमजीत कौर वाधवा को मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया। बेटे सरबजीतसिंह वाधवा ने बताया 26 मार्च को संशय होने पर कोरेाना की जांच करवाई थी, 28 मार्च को रिपोर्ट आई थी, जिसमें परिवार के तीन लोग मां, पिता और मैं पॉजिटिव थे।

परिवार में 6 लोग हैं बाकी सभी स्वस्थ थे। पिता का ऑक्सीजन लेवल कम हो रहा था, मेडिकल कॉलेज के आईसीयू से उन्हें इंदौर के अस्पताल में शिफ्ट किया। लेकिन 6 अप्रैल को उनकी मौत हो गई। मां की हालत लगातार सीरियस बनी हुई थी, 19 अप्रैल को मां ने भी साथ छोड़ दिया। उस दौरान मैं आईसीयू में ही था, अब परिवार स्वस्थ है... लेकिन, टूट चुका है।

3. पहले पत्नी, फिर 24 घंटे बाद पति ने तोड़ा दम, अब घर में कोई नहीं

मुखर्जी नगर का एक परिवार कोरोना का ऐसा शिकार हुआ कि सिर्फ 24 घंटे में ही पति और पत्नी की मौत हो गई। हां, जिसने भी सुना, वह स्तब्ध रह गया। शक्तिनगर में लोकेंद्रसिंह राठौर और मधुबाला राठौर रहते थे। लोकेंद्र सिंह नौकरी करते थे, वहीं मधुबाला गृहिणी थीं। इनके भतीजे शक्ति सिंह ने बताया बुआ-फूफा की दो बेटियां हैं, जिनकी रतलाम में ही शादी हुई। बेटियों की शादी होने के बाद दोनों पति-पत्नी घर में अकेले ही रहते थे।

तबीयत खराब थी, सामान्य समझकर शुरुआत में डॉक्टर को नहीं दिखाया। 22 अप्रैल की रात को दोनों की तबीयत ज्यादा बिगड़ी ऐसे में जिला अस्पताल गए। दोनों शुगर के मरीज थे, ऑक्सीजन लेवल कम हो रहा था। 24 अप्रैल को बुआ मधुबाला ने दम तोड़ दिया। फूफा को मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट किया गया लेकिन 25 अप्रैल को उन्होंने भी दम तोड़ दिया। अब घर सूना हो गया है।

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