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जन संकल्प से हारेगा कोरोना:सैनिटाइजेशन के साथ मरीजों को दवा बांटते हुए कोरोना ने घेरा, फेफड़ों में 60% संक्रमण

रतलामएक महीने पहले
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अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान वेंटिलेटर पर रहते भी अनिल ने हिम्मत नहीं हारी। - Dainik Bhaskar
अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान वेंटिलेटर पर रहते भी अनिल ने हिम्मत नहीं हारी।
  • दोनों डोज लगी थी इसलिए वेंटिलेटर पर रहने के बाद भी सात दिन में ठीक होकर घर लौटे
  • गंभीर कोरोना संक्रमण होने के बावजूद अपनी इच्छाशक्ति से कोरोना को हराने वाले जांबाज की कहानी हौसला- कोरोना की दूसरी लहर में वह रोज आसपास भर्ती लोगों को मरते देखते थे फिर भी नहीं हारी हिम्मत

अक्टूबर 2020 में ही नगर निगम रतलाम में पदस्थ हुआ था। मार्च में दूसरी लहर में कोरोना तेजी से फैला तो मुझे नोडल अधिकारी बनाकर सैनिटाइजेशन की जिम्मेदारी दी गई। शहर में लगातार सैनिटाइजेशन कर रहे थे इसी बीच होम आइसोलेशन में रहकर इलाज करवा रहे मरीजों को मेडिसिन किट बांटने का काम सौंप दिया गया। हर दिन सुबह से रात तक ये ही काम कर रहे थे कि 22 अप्रैल को अचानक तेज बुखार आया।

दवाई ली लेकिन तबीयत में सुधार नहीं हुआ। उत्तमपुरा (मुरैना) में रहने वाले परिवारजनों को बताया तो बोले तुरंत घर चले आओ। परिवारवालों को काफी समझाया कि वैक्सीन की दोनों डोज लग गई है, इसलिए चिंता की बात नहीं। बावजूद वे नहीं मान तो 23 अप्रैल को ग्वालियर आ गया। 26 अप्रैल को सैंपल दिया। जांच रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई। उसी दिन सांस लेने में परेशानी होने लगी, तो परिवार वालों ने रात 3 बजे सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती करा दिया।

सिटी स्कैन की जांच में फेफड़ों में 60% इंफेक्शन निकला। डॉक्टरों ने तुरंत मुझे बाई-मेप मशीन सपोर्ट पर कर दिया। शुरुआत के तीन दिन कष्टदायी रहे। चौथे दिन से हालत सुधरना शुरू हुई। संक्रमण से बहुत कमजोरी आ गई थी। उस पर आसपास भर्ती मरीजों की मौत के बाद किट में पैक करके ले जाता देखता तो डर जाता था।

पहली वैक्सीन, दूसरी डॉक्टरों की देखभाल। डॉक्टर जब भी मिलने आते कहते वैक्सीन की दोनों डोज लग गई है इसलिए चिंता करने की जरूरत नहीं है। हम आपको बिलकुल ठीक करके घर भेजेंगे। डॉक्टर रात में भी देखने आते रहे। सातवें दिन (4 मई) जब मेरी हालत स्थिर हुई तो डिस्चार्ज कर दिया। अनिल पारा | कोरोना वॉरियर

कमिश्नर ने भी बढ़ाया हौसला

अस्पताल में रहते हुए भी कमिश्नर सोमनाथ झारिया रोजाना बात कर हालचाल पूछते और हौसला बढ़ाते। सरकार से एक ही अनुरोध है कि कोरोना नियंत्रण में लगे हजारों कर्मचारी साथी जो रोज ड्यूटी के दौरान संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं और कोरोना से लड़कर ठीक भी हो रहे हैं, उन्हें कोरोना योद्धा की राशि प्रदान की जाए। यह राशि उनके जीवन काल में काम आएगी। मौत के बाद इस राशि का कोई मतलब नहीं है।

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