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मेडिकल कॉलेज में फिर लापरवाही:मौत के 16 घंटे तक परिजन को खबर नहीं की, दुखद-10 शव देखे तब हुई पहचान

रतलामएक महीने पहले
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मेडिकल कॉलेज में फिर लापरवाही - Dainik Bhaskar
मेडिकल कॉलेज में फिर लापरवाही
  • परिजन बोले-महिला के लकवाग्रस्त होने से हम लगातार बेचैन थेपरिवार वाले
  • बोले-हमारे साथ जो हुआ, वह किसी के साथ नहीं होना चाहिए

हमारे मेडिकल कॉलेज में मरीज बढ़ने के साथ ही लापरवाही के मामले भी सामने आ रहे हैं। गुरुवार को भी ऐसे दो मामले सामने आए हैं जिनमें एक में महिला की मौत के बाद परिजन को सूचना तक नहीं दी, तो वहीं, दूसरे मामले में अस्पताल के गेट पर ही मरीज ने दम तोड़ दिया। महिला की मौत रात 11 बजे होना बताया जा रहा है, वहीं परिजन को अगले दिन दोपहर 3 बजे तक सूचना नहीं दी गई। परिजन ने शव गृह में 10 से ज्यादा शव देखे तब महिला की पहचान हो सकी। गुरुवार शाम महिला का अंतिम संस्कार हो सका है।

पहली घटना खाचरौद के पास गांव गुणावन में रहने वाले वारवानिया परिवार के साथ हुई है। सुनील वारवानिया ने बताया उनकी काकी शांतिबाई पति निर्भयराम (55) को मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया था। वे दूसरी मंजिल पर 51 नं. बेड पर भर्ती थी। फल लेकर मैं उनसे मिलने गया, तो बेड पर कोई भी नहीं था। हम चिंतित हुए... क्योंकि, उन्हें लकवा भी था। वहां मौजूद स्टाफ ने बताया कि उनकी मौत रात 11 बजे हो गई है।

शवगृह में गए तो... वहां 10 से ज्यादा शव रखे हुए थे। डॉक्टर को इस घटना की शिकायत की तो उन्होंने एक्शन लेने की बात कही। हमने विरोध किया तो पुलिस आ गई। गुरुवार शाम भक्तन की बावड़ी मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार हुआ। बस यही विनती है कि... हमारे साथ जो हुआ... वह दूसरों के साथ न हो।

तस्वीर धुंधली लेकिन लापरवाही की हकीकत बयां करती है

दूसरी घटना मेडिकल कॉलेज के बाहर की है। मेडिकल कॉलेज में बेड खाली नहीं होने से मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। गुरुवार को एक वीडियो सामने आया, जिसमें कॉलेज के गेट नं. 2 के बाहर ही एक युवक बेसुध अवस्था में दिख रहा है। बताया जा रहा है कि युवक की गेट के बाहर ही मौत हो गई। परिजन आलोट से युवक को गंभीर अवस्था में कॉलेज में लेकर आए थे, कुछ नर्सों ने गेट पर आकर मरीज की जांच भी की। ये घटना एक दिन पहले की है। हालांकि, युवक कहां का रहने वाला है, इसकी अभी पुष्टि नहीं हो सकी है।

दो दिन पहले बेड नहीं मिलने से बाइक पर वकील ने दम तोड़ा था

दो दिन पहले टाटा नगर निवासी एडवोकेट सुरेश डागर ने बाइक पर दम तोड़ा था। वे मेडिकल कॉलेज के बाहर 2.30 घंटे तक रहे थे। इस दौरान उन्हें इलाज नहीं मिल सका था। उनका ऑक्सीजन लेवल 86 प्रतिशत तक आ गया था। परिजन मरीज को आयुष ग्राम ले गए, वहां से बाइक पर ही काटजू नगर ले जा रहे थे, इसी दौरान राम मंदिर पर मरीज ने दम तोड़ दिया था।

सीधी बात

डॉ. जितेंद्र गुप्ता, डीन, मेडिकल कॉलेज

भास्कर- क्या यह मामला आपकी जानकारी में आया है। डीन - व्यस्तता के कारण अभी जानकारी नहीं ले सका हूं। भास्कर - परिजन को मौत की सूचना क्यों नहीं दी गई। डीन - ऐसा नहीं होता है, परिजन को मौत की सूचना दी जाती है। भास्कर - परिजन का आरोप है, उन्हें फोन नहीं आया। डीन - मरीज जब सीरियस होता है, तब से ही परिजन को फोन लगाने लग जाते हैं ताकि, समय रहते परिजन आ जाएं। फोन बंद आते हैं या नॉट रिचेबल बताता है। ऐसे में देर हो जाती है। इस मामले में क्या हुआ है... जानकारी लेंगे। भास्कर - मेडिकल कॉलेज के बाहर मौत के मामले सामने आ रहे हैं। डीन - एक भी ऑक्सीजन बेड खाली नहीं है। क्षमता से ज्यादा मरीजों का इलाज किया जा रहा है। मरीज बहुत गंभीर स्थिति में आ रहे हैं। कोशिश रहती है, ज्यादा से ज्यादा मरीज को भर्ती किया जाए। स्टाफ सभी प्रयास करता है। गंभीर मरीज को भर्ती कर रहे हैं, इसके बाद जगह हाेने पर वार्ड में भेजते हैं।

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