भास्कर एनालिसिस:6 महीने में 23% अपराध महिलाओं से जुड़े पर जांच के लिए महिला एसआई सिर्फ 12

रतलामएक वर्ष पहले
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  • 30 जून तक 2814 अपराधों में से 650 महिलाओं के खिलाफ, जांच के लिए महिला सब इंस्पेक्टर 12 यानी एक के जिम्मे हैं 54 मामले

इस साल जून तक जिले में कुल अपराधों में 23% मामले महिला के साथ हुए अपराध के हैं। इनमें से आधे मामले ऐसे हैं जो पाक्सो, ज्यादती, दहेज हत्या और प्रताड़ना तथा एट्रोसिटी की धाराओं में दर्ज हैं। इनकी जांच महिला अधिकारी द्वारा होना जरूरी है परंतु महिला पुलिस बल कम है। डीएसपी (महिला अपराध) का पद खाली है। जिले के 24 थानों में से 11 थानों में 12 महिला सब इंस्पेक्टर पदस्थ हैं। महिलाओं की समस्या महिला पुलिस अधिकारी सुने इसके लिए 6 थानों में ऊर्जा डेस्क परर महिला सब इंस्पेक्टर को प्रभारी बनाया गया है। शेष 6 सब इंस्पेक्टर थानों पर तैनात हैं।  इस साल जून तक 24 थानों में कुल 2814 अपराध दर्ज हुए जिनमें से महिलाओं के प्रति अपराध 650 (23%) हैं। 2019 में जून तक 2853 प्रकरण दर्ज हुए थे जिनमें से 711 (25%) तथा 2018 में दर्ज 2620 अपराधों में से 617 (23.55%) महिला अपराधों के थे। जिनकी जांच महिला सब इंस्पेक्टर व डीएसपी स्तर तक के अधिकारियों को करना है। जिले में महिला डीएसपी का पद एक साल से खाली है। तीन महिला इंस्पेक्टर, 12 एसआई, 9 हेडकांस्टेबल और 98 महिला आरक्षक हैं। इनमें से 2 महिला इंस्पेक्टर लाइन में हैं व 6 सब इंस्पेक्टर को ऊर्जा डेस्क प्रभारी बनाया है। बची 6 सब इंस्पेक्टर व 9 हेडकांस्टेबल को एफआईआर दर्ज करने से लेकर आरोपी की गिरफ्तारी और न्यायालय में चालान पेश करने तक की कार्यवाही करना है।   एक के जिम्मे तीन-तीन थाने : एक थाने पर कम से कम दो महिला सब इंस्पेक्टर की आवश्यकता है परंतु जिले के 24 थानों के लिए मात्र 12 सब इंस्पेक्टर ही उपलब्ध हैं। इनमें से 6 ऊर्जा डेस्क पर नियुक्त हैं।  एक महिला सब इंस्पेक्टर तीन थानों का काम संभाल रही हैं। वहीं एक सब इंस्पेक्टर के जिम्मे महिला अपराध के 54 मामले हैं।

देरी तो विभागीय कार्यवाही का प्रावधान
महिलाओं के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों के प्रकरणों में विवेचना का समय दो महीने और अन्य गंभीर अपराधों में अधिकतम तीन महीने निर्धारित है। आईजी, डीआईजी से लेकर थाना प्रभारी तक की जिम्मेदारी तय है। समय सीमा में विवेचना पूरी न होने पर संबंधित अधिकारी की जवाबदेही निर्धारित कर विभागीय कार्यवाही का प्रावधान है।

स्टाफ कम, निर्धारित समय में चालान लगा रहे हैं
33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया है परंतु शारीरिक दक्षता परीक्षा पास नहीं कर पाने से महिला पुलिसकर्मियों और अधिकारियों की संख्या नहीं बढ़ पाई है।सब डिवीजन में महिला अपराधों की संख्या के अनुपात में सब इंस्पेक्टरों की नियुक्ति की है। संख्या कम है फिर भी तत्परता से काम कर रहे हैं। निर्धारित समयावधि में चालान पेश करवाए हैं।
गौरव तिवारी, एसपी-रतलाम

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