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गीता का ज्ञान:भगवान तो प्रकृति के कण-कण में हैं - पं. दुर्गाशंकर

रतलाम8 महीने पहले
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कितना भी जतन कर लो, एक दिन यह शरीर छोड़कर जाना ही है। भगवान प्रकृति के कण-कण में विद्यमान है। मनुष्य को अपने कर्म के अनुसार फल भोगना पड़ता है। यह भगवान कृष्ण के गीता का ज्ञान है। यह बात राधाकृष्ण मंदिर में पंडित दुर्गा शंकर ने श्रीमद् भागवत कथा के दौरान कही। कथा के समापन पर भक्तों ने भागवतजी की आरती पूजन किया। प्रसादी वितरण हुआ।

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