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रतलाम में चंबल और शिप्रा नदी को कर रहे खोखला:सरकार ने 14 खदानें नीलाम कीं, खनन अधिकार सिर्फ 3 का, इधर अफसरों ने नदियां ही खोखली करने की दे रखी है छूट

आलोट/जावरा9 महीने पहलेलेखक: कन्हैयालाल सोनावा
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चंबल नदी (ताल) में खनन। - Dainik Bhaskar
चंबल नदी (ताल) में खनन।
  • एनजीटी और अन्य क्लीयरेंस नहीं होने से जिले की 14 में से 11 खदानों का अनुबंध नहीं हुआ
  • 1.10 करोड़ में डीएस एंड कंपनी भोपाल को हुआ 14 खदानों का ठेका

स्टेट माइनिंग कॉर्पोरेशन व खनिज विभाग ने डीएस एंड कंपनी भोपाल को जिले की 14 खदानों का ठेका 1.10 करोड़ में दिया। पर्यावरण, नेशनल ग्रीन ट्रीब्यूनल, जल एवं वायु समेत अन्य एनओसी नहीं मिलने से 11 खदानों का अनुबंध नहीं हुआ। अफसरों ने 3 खदानों के अनुबंध पर जिले के सभी नदी-नाले खननकर्ता को सौंप दिए हैं। वे इन्हें खोखला कर रहे हैं। अधिकारी अनजान बने हुए हैं।

शासन को करोड़ों रुपए की रॉयल्टी की हानि के साथ ही नदियां खोदने से उनकी भौगोलिक संरचना और पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। किनारे कटने से बारिश में बाढ़ का खतरा बढ़ेगा। कई जगह पुलियाओं के आसपास खनन हो रहा है जबकि 200 मीटर के दायरे में खनन पर रोक है। पढ़िए... जावरा, ताल व आलोट क्षेत्र से गुजर रही चंबल व शिप्रा नदी में खनन की तस्वीर बताती भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट

शिप्रा; उन्हेल रोड पर सबसे बड़ा ब्रिज खतरे में डाला
आलोट-उन्हेल रोड पर 3 साल पहले 17 करोड़ से 492 मी. लंबा ब्रिज बना। पिलर व पिचिंग वॉल के समीप खनन कर दिया। सेतु निगम एसडीओ आरपी गुप्ता बोले- खनिज अधिकारी अौर एसडीएम से कार्रवाई के लिए बात की है। गड्‌ढे हो गए तो प्रशासन से भरवाएंगे।

मॉनिटरिंग नहीं: फील्ड में जाना छोड़ा अधिकारियों ने
चौकियों पर वैध-अवैध पैसे ले रहे हैं। कितने ट्रैक्टर जा रहे है मॉनिटरिंग नहीं हो रही। अफसरों ने फिल्ड छोड़ दी है।

संदेह: इनके पास पूरा सिस्टम, फिर क्यों चुप
प्रशासन के पास कोटवार, पटवारी, पुलिस, खनिज अमला, तहसीलदार, एसडीएम आदि है और सारे के सारे चुप हैं।

रेत कहीं की भी हो रॉयल्टी के नाम पर हो रही वसूली
कलेक्टर कार्यालय खनिज शाखा से जारी पत्र क्रमांक 461/2020-21 के तहत रावटी में रतलाम-आलीराजपुर रोड पर रानीसिंह में, करवाखेड़ी मुख्य मार्ग पर, आलोट ब्लॉक में विक्रमगढ़ तिराहे के पास, आलोट-जावरा रोड पर बरखेड़ा मुख्य मार्ग, बायपास पर लक्ष्मीपुरा में, जोगणिया मातामंदिर के पास चौपाल पर तथा जावरा में ग्राम आक्या फंटा, ग्राम बानीखेड़ी फंटा, ग्राम बामनखेड़ी फंटा, रोला व कलालिया फंटा में कांट्रेक्टर कंपनी को अस्थायी रेत जांच चौकी लगाने की अनुमति दी। रेत अनुबंधित खदान से आए तब ठीक, अवैध परिवहन हो तो भी यहां राॅयल्टी के नाम पर तय राशि देना है।
जिम्मेदारों का तर्क; तीन का ही अनुबंध, जिला प्रशासन करे कार्रवाई
^कॉर्पोरेशन का काम टेंडर का है। अनुबंध तीन खदानों का हुआ। बाकी जगह खनन हो रहा तो वह अवैध है। कार्रवाई के अधिकार जिला प्रशासन को हैं।
रमेश भूमरकर, डीजीएम, स्टेट माइनिंग काॅर्पोरेशन उज्जैन
^14 खदानें लीं, उन्हीं से खनन कर रहे। जांच चौकी अनुमति से लगाई है। अनुबंध समेत ज्यादा जानकारी फोन पर नहीं दे सकते। वसूली के आरोप गलत हैं।
खूबसिंह, प्रतिनिधि डीएस

एंड कंपनी भोपाल
^टीम फील्ड में जाकर टीम कार्रवाई कर रही है। चौकियों पर बिना रसीद के वसूली हो रही तो कार्रवाई करेंगे।
आकांक्षा पटेल, जिला खनिज अधिकारी रतलाम

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