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संकट में निजी स्कूल:कोरोना का असर : कई स्कूल बंद होने की कगार पर, किस्त नहीं चुका पा रहे

रतलाम4 दिन पहले
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करमदी का महावीर इंटरनेशनल अकेडमी स्कूल इस शैक्षणिक सत्र से शुरू होना था लेकिन लॉकडाउन के चलते आज भी चालू नहीं हो पाया।
  • शहर एवं आसपास 250 प्राइवेट स्कूल, इसमें 200 स्कूल छोटे, इन्हीं पर खतरा

कोरोना संक्रमण का सबसे ज्यादा असर छोटे स्कूलों पर हुआ है। पिछले 6 महीने से सभी स्कूल बंद है। नतीजतन स्कूल संचालक ना तो लोन पर ले रखी बसों की किस्त चुका पा रहे हैं और ना ही स्कूल भवन का किराया। इससे कई स्कूलों की स्थिति यह हो गई कि वे बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। शहर एवं आसपास 250 प्राइवेट स्कूल हैं। इसमें से 200 स्कूल छोटे हैं। 1 अप्रैल से नया शैक्षणिक सत्र शुरू होता है लेकिन कोरोना के चलते इस बार शैक्षणिक सत्र शुरू नहीं हो पाया है। वहीं अधिकतर पालक रिजल्ट के दौरान फीस जमा करते हैं लेकिन लॉकडाउन के चलते स्कूलों को पिछले शैक्षणिक सत्र की पूरी फीस भी नहीं मिल पाई है। इसका असर स्कूलों पर हो रहा है।

1. नए शैक्षणिक सत्र से शुरू होना था स्कूल, अब किराया जमा कराने के रुपए नहीं

करमदी में महावीर इंटरनेशनल अकेडमी के नाम से इस शैक्षणिक सत्र से स्कूल शुरू होना था। स्कूल संचालक ने फरवरी में सारी तैयारियां पूरी कर ली। फर्नीचर, ब्लैक बोर्ड, क्लास रूम बच्चों के लिए तैयार कर लिए लेकिन लॉकडाउन लग गया। इससे अब तक स्कूल चालू नहीं हो पाया है। इससे किराया चुकाना भी मुश्किल हो रहा है। स्कूल संचालक आयुष तरवेचा ने बताया कि बिल्डिंग किराया 15 हजार रुपए महीना किराए लग रहा है। स्कूल शुरू नहीं होने से किराए चुकाने की भी पैसे नहीं है। 3 महीने से ज्यादा का किराया बकाया हो गया है। सरकार को छोटे स्कूलों के लिए कोई राहत की घोषणा करना चाहिए।

2. पिछले साल शुरू हुआ था स्कूल, पिछले साल की फीस पूरी जमा नहीं हुई

बड़ोदिया में आदर्श विद्या विहार स्कूल पिछले शैक्षणिक सत्र से ही शुरू हुआ लेकिन कोरोना वायरस के चलते यह स्कूल भी बंद होने की कगार पर पहुंच गया है। संचालक राकेश चौधरी बताते हैं कि पिछले साल 15 जून 2019 को स्कूल शुरू किया था।लेकिन मार्च में लॉकडाउन लग गया। इससे कई बच्चों की पिछले सत्र की फीस भी बकाया है। वहीं इस साल तो स्कूल ही शुरू नहीं हो पाए। इससे किराया भरने और शिक्षकों को वेतन बांटने में दिक्कत आ रही है। यदि यही स्थिति स्थिति रही तो स्कूल बंद करना पड़ेगा।

3. अनलॉक में यह आशंका, बैंक वाले कहीं बसें ना जब्त कर लें

मंगलदीप काॅन्वेंट स्कूल के संचालक स्वतंत्र पाल सिंह देवड़ा बताते हैं कि कोरोना से सबसे ज्यादा मुसीबत में स्कूल वाले हैं। स्थिति यह है कि ना तो हम किराया जमा करा पा रहे हैं और ना ही बस के लोन की किस्तें जमा करा पा रहे हैं। मैंने बस लोन पर ली है। 14,800 रुपए मासिक किस्त आ रही है लेकिन स्थिति यह है कि किस्त भी नहीं चुका पा रहा हूं। सरकार की ओर से हमें किसी प्रकार की सहायता नहीं मिल पा रही है। इससे डर लग रहा है कि कहीं बैंक वाले आकर बस जब्त ना कर ले।

सरकार स्कूलों के लिए राहत पैकेज का ऐलान करें
मप्र प्रांतीय अशासकीय शिक्षण संस्था संघ के प्रांतीय सचिव दीपेश ओझा ने बताया कि कोरोना से सबसे ज्यादा मुसीबत में स्कूल वाले हैं। ना तो पुरानी फीस मिल पाई है और नया शैक्षणिक सत्र शुरू नहीं होने से ना तो बच्चों का दाखिला हो पाया है और ना ही इस साल की फीस मिल पाई है। सरकार का ध्यान भी स्कूलों की तरफ बिलकुल नहीं है। सरकार को स्कूलों को भी स्कूलों के लिए भी राहत पैकेज का ऐलान करना चाहिए। स्कूलों को कमर्शियल बिजली का बिल चुकाना पड़ रहा है। वहीं बसों की किस्तें और किराया चुकाना पड़ रहा है। सरकार को राहत पैकेज का ऐलान करना चाहिए।

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