डॉक्टर और समाजसेवियों की मेहनत लाई रंग:निराश्रित बुजुर्ग की आंखों का ऑपरेशन कर लौटाई रोशनी , फिल्मी सीन की तरह आंख की पट्टी खोलने पर बुजुर्ग ने खुश होकर दिया आशीर्वाद

रतलामएक महीने पहले
आंखों की रोशनी लौट आने के बाद बुजुर्ग बालू मीणा  बेहद खुश हैं - Dainik Bhaskar
आंखों की रोशनी लौट आने के बाद बुजुर्ग बालू मीणा बेहद खुश हैं

एक वाहन दुर्घटना में अपनी आंखों की रोशनी खो देने वाले एक निराश्रित बुजुर्ग की आंखों की रोशनी रतलाम के समाजसेवी और डॉक्टरों में लौटाई है। दुर्घटना से दोनों आंखों की रोशनी खो जाने के बाद घसीट कर चलने वाले वृद्ध को कुछ महीने पहले स्थानीय पुलिस वालों की मदद से जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती करवाया गया था । यहां बुजुर्ग बालू मीणा की मुलाकात समाजसेवी गोविंद काकानी से हुई । वार्ड का स्थानीय स्टाफ और गोविंद काकानी उनकी काउंसलिंग करते थे। इसी दौरान उन्हें पता चला की बुजुर्ग बालू मीणा को दुर्घटना के बाद से दिखाई देना बंद हो गया है। जिस पर गोविंद काकानी ने नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ श्याम सुंदर गुप्ता से बुजुर्ग बालू मीणा की आंखों की जांच करवाई । डॉ गुप्ता ने बुजुर्ग की आंखों का ऑपरेशन किया । जिसके बाद हिंदी फिल्मों के दृश्य की तरह की आंखों की पट्टी खोले जाने पर बुजुर्ग ने उसे फिर से दिखाई दिए जाने की बात कही । बुजुर्ग बालू मीणा ने न केवल समाजसेवी गोविंद काकानी को पहली नजर में पहचान लिया। वहीं दिन-रात सेवा करने वाले वार्ड बॉय गोलू भाई सहित वार्ड के स्टाफ को भी अपनी आंखों से देख कर पहचाना। आंखों की रोशनी वापस आ जाने के बाद बुजुर्ग ने डॉक्टरों वार्ड स्टाफ और समाजसेवी गोविंद काकानी को बहुत आशीर्वाद दिए हैं।

दरअसल रतलाम के समाजसेवी गोविंद काकानी और जिला अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड में भर्ती असहाय मरीजों की मदद करने वाले हॉस्पिटल स्टाफ कि मेहनत उस वक्त रंग लाई जब दुर्घटना में अपनी आंखों की रोशनी को चुके बुजुर्ग की आंखों का ऑपरेशन होने के बाद उन्हें दोबारा दिखाई देने लगा। पिछले वर्ष अक्टूबर महीने में बुजुर्ग बालू मीणा को गंभीर हालत में आइसोलेशन वार्ड में भर्ती करवाया गया था। धीरे धीरे आइसोलेशन वार्ड में भर्ती बालू मीणा की तबीयत में सुधार होने लगा और वह हॉस्पिटल स्टाफ से घुलने मिलने लगे। इस दौरान बुजुर्ग ने अपना परिचय बालू पिता जीवाजी मीणा ग्राम नगरी, छत्तीसगढ़ का रहना बताया। लेकिन बुजुर्ग ने आंखों से दिखाई नहीं देने की परेशानी जब समाजसेवी गोविंद काकानी को बताई तो गोविंद काकानी ने डॉ श्याम सुंदर गुप्ता से बुजुर्ग व्यक्ति का उपचार करने का निवेदन किया। जिस पर डॉक्टर गुप्ता ने बुजुर्ग की आंखों की जांच के बाद उनकी आंखों का ऑपरेशन किया। इसके बाद बुजुर्ग व्यक्ति की आंखों की पट्टी खोली गई तो उन्हें दिखाई देने लगा। वृद्ध बालू मीणा ने आवाज से ही उनकी मदद करने वालों को पहचान लिया और कहने लगे कि यह गोलू भाई और यह तो मेरे गोविंद सेठ है।

बुजुर्ग बालू मीणा की आंखों की रोशनी लौट आने के बाद वह बेहद खुश हैं और उपचार करने वाले डॉक्टर समाजसेवी गोविंद काकानी वार्ड बॉय गोलू भाई और नर्सिंग स्टाफ को खुश होकर बहुत आशीर्वाद दे रहे हैं।