लंपी वायरस से प्रभावित सेमलिया से ग्राउंड रिपोर्ट:रतलाम के सेमलिया और बरबोदना में 50 से अधिक गायें बीमार, सभी के सैंपल भोपाल भेजे गए

रतलाम4 महीने पहले

सुबह के 10 बजे हैं और दैनिक भास्कर की टीम रतलाम के सेमलिया गांव के एक चौक पर खड़ी हैं। यहां चुनाव को लेकर चर्चा कम और गांव की लगभग 50 बीमार पड़ी गायों की चिंता ज्यादा हो रही है। गांव के लोगों का कहना है कि यहां लगातार इस बीमारी से ग्रसित गायों की संख्या बढ़ती जा रही है। यहां कई ऐसे पशुपालक हैं जिनकी गायों के शरीर पर छोटी-छोटी गिठानें पड़ गई हैं। पशुपालकों का कहना है कि पिछले 15 से 20 दिनों के अंदर गांव की गायों में ये बीमारी नजर आ रही है, जिसके कारण न वे कुछ खा पा रही हैं और न ही ठीक से बैठ पा रही हैं। गांव में ही सड़क किनारे अपनी गायों के साथ खड़े धन्ना लाल ने बताया कि गाय के पूरे शरीर पर गांठे उभर आई हैं। कुछ खाती-पीती नहीं हैं और न ही दूध देती हैं। शरीर भी गर्म ही रहता है। धन्ना लाल के पास कुल 6 गाय हैं जिनमें से 4 बीमारी की चपेट में आ चुकी हैं और गांव में भी कई गायों की यहीं स्थिति है।

इसके बावजूद प्रशासन ने बीमारी की पड़ताल अभी परसों शाम से ही शुरू की है। पशुओं के सैंपल लिए गए हैं। लेकिन रतलाम में पशु चिकित्सा की कोई लैब न होने के कारण सभी सैंपलों को भोपाल भेजा गया है। मतलब अभी तक किसी भी पशु की लंपी वायरस की पॉजिटिव रिपोर्ट नहीं आई है। इसके बाद लक्षणों के आधार पर पशुओं का इलाज शुरू किया जा चुका है।

बीमार गायों का इलाज करते पशु चिकित्सक।
बीमार गायों का इलाज करते पशु चिकित्सक।

गैरतलब है कि ऐसा माना जा रहा है कि मध्य प्रदेश में ये वायरस रतलाम जिले से ही दाखिल हुआ है क्योंकि ये जिला गुजरात और राजस्थान से सटा हुआ है। इन्हीं राज्यों में अधिक पशु लंपी वायरस से प्रभावित होते हैं।

‘गाय के शरीर पर पड़ गए हैं दाफड़’

गांव के एक पशुपालक मुकेश मालवीय अपनी गायों को चराने लेकर जा रहे थे। इनकी भी कई गाय बीमारी की चपेट में है। मुकेश ने बताया कि उनकी गायों के शरीर पर दाफड़ से पड़ गए हैं और गाय ठीक से न खा पा रहीं हैं और न ही चल पा रही हैं।ग्रामीण विजय सोलंकी ने कहा कि गायों की हालत बहुत खराब है। स्थानीय डॉक्टरों से इलाज कराया जा रहा है, इंजेक्शन और दवाई भी कराई गई है मगर कोई आराम नहीं हुआ है। कई गायों की हालत बहुत खराब है। कुछ गायों के मुंह से झाग आने की समस्या भी सामने आ रही है। गांव में कम से कम 40 लोगों की गाय इस बीमारी से जूझ रही हैं।

क्या है लंपी वायरस?

प्रभावित गांव में पहुंचे पशु चिकित्सा विभाग के वेटेनरी सर्जन डॉक्टर नवीन शुक्ला ने भास्कर से खास बातचीत में बताया कि लंपी वायरस पशुओं में होने वाली एक वायरल बीमारी है। जिसका वायरस खून चूसने वाले कीड़ों की मदद से एक पशु से दूसरे पशु तक पहुंचता है। इस बीमारी के लक्षण में पशु के शरीर पर छोटी-छोटी गिठाने बन जाती हैं। जो छोटे-छोटे घावों में बदल जाती है और पशु के शरीर पर जख्म नजर आने लगते हैं। पशु खाना कम कर देता है। उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता घटने लगती है। इसमें मृत्यु दर कम होती है मगर इसके फैलने की रफ्तार बहुत तेज है। जिससे पशुओं का दुग्ध उत्पादन प्रभावित हो रहा है। डॉक्टरों के अनुसार इस बीमारी का पशुओं से मनुष्यों में ट्रांसफर होने की संभावना नहीं के बराबर है। अब तक इस तरह का कोई मामला सामने नहीं आया है।

राजस्थान और गुजरात से पशुओं को लाने और ले जाने पर लगाई जा सकती है रोक

लंपी वायरस से प्रभावित राजस्थान और गुजरात के क्षेत्रों से पशुओं को लाने और ले जाने पर रोक लगाने के लिए पशु चिकित्सा विभाग ने रतलाम कलेक्टर से मांग की है। वही रतलाम में भी पशु चिकित्सा विभाग ने सभी संस्थाओं को अलर्ट पर रखा है। जिले मे लगने वाले पशु हाट पर भी विभाग की नजर रहेगी। वायरस के लक्षण नजर आने पर पशु को आइसोलेट करने और उपचार करवाने की सलाह दी है। सेमलिया गांव के स्थानीय पशु पालकों के अनुसार गांव में 1 दर्जन से अधिक गायों में इस वायरस के लक्षण नजर आए हैं।

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