सरकारी रवैया:सिविक सेंटर में फ्लैट लेकर उलझे तो आरडीए ने मूलभूत सुविधा के बिना प्लॉट बेचे

रतलाम8 महीने पहले
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  • विभागों की खींचतान में पांच साल से जनता हो रही परेशान, सरकारी एजेंसी पर भरोसा पड़ा भारी

विभागों में तालमेल नहीं होने से जनता से जुड़े काम पांच साल में भी पूरे नही हो पाए हैं। इन पांच साल में अफसर तो बदल गए हैं लेकिन जनता की परेशानी आज भी बरकरार है। विभाग के अफसर समस्या समझ इसे दूर करने की बजाय एक दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। विभागों की लापरवाही का खामियाजा जनता को परेशानी के रूप में रोज भुगतना पड़ रहा है। इससे पांच साल बाद भी जनता से जुड़े काम अधूरे हैं और जनता आज भी परेशान हो रही है। फिर भले ही वो सिविक सेंटर के फ्लैट के आवंटन का मामला हो या फिर रतलाम विकास प्राधिकरण की कॉलोनियों में मूलभूत सुविधा का, या रतलाम-बाजना टू लेन का मामला। पांच साल बाद भी आज तक समस्या का हल नहीं हो पाया है।

1. सिविक सेंटर : पांच साल में ना फ्लैट मिले और ना खरीदारों को वापस रुपए

5 साल पहले वर्ष 2016 में नगर निगम ने सिविक सेंटर के फ्लैट आवंटन की विज्ञप्ति जारी की थी। घर का सपना पूरा करने के लिए लोगों ने फ्लैट के लिए बुकिंग कराई और एडवांस 5 से 30 लाख रुपए की राशि जमा कराई। उस दौरान निगम ने एक महीने में आवंटन भरोसा दिया। बस इसी भरोसे में घर खरीदार फंस गए। आज ना तो फ्लैट मिल रहे हैं और ना ही रुपए। फ्लैट की रजिस्ट्री कब से निगम करेगा इसके लिए जब लोग निगम जा रहे हैं तो जवाब मिल रहा है कि जिला प्रशासन के यहां मामला अटका है और जिला प्रशासन के यहां जाते हैं तो बोलते निगम जाओ।

योजना- आवासीय योजना सिविक सेंटर
बुकिंग शुरू हुई थी- 2016 में
बुकिंग के बाद फ्लैट मिला थे- एक महीने में
अब स्थिति- नगर निगम ना तो फ्लैट दे रहा है और ना ही रुपए लौटा रहा
अफसरों का तर्क- {नगर निगम- इंजीनियर जीके जायसवाल ने बताया तीन से चार दिन पहले ही मुझे इसका प्रभार मिला है। मामला दिखवाते हैं। अधिकारियों से चर्चा की जाएगी।
जिला प्रशासन- एडीएम जमुना भिड़े ने बताया निगम पर भूभाटक की राशि बकाया है। इससे मामला अटका है। दिखवाते हैं। ​​​​​​​

2. प्लॉट : सरकारी एजेंसी पर भरोसा कर खरीदे, अब दो विभागों के बीच फंसे

आरडीए (रतलाम विकास प्राधिकरण) सरकारी एजेंसी है। इस भरोसे के चलते लोगों ने काॅमर्स कॉलेज के पास की दो कॉलोनी माही विहार और योगी विहार में प्लाॅट खरीदे और फिर मकान बनाए, लेकिन लोगों को बाद में पता चला कि हम तो आरडीए के झांसे में आ गए। क्योंकि शानदार सड़क, पानी की टंकी, संपवेल देखकर प्लाॅट खरीदा था। लेकिन यहां तो मूलभूत सुविधा के इंतजाम ही नहीं हैं। नगर निगम का कहना है कि आरडीए ने हमें कॉलोनी व्यवस्थित कर नहीं दी। पाइप लाइन व्यस्थित करा कर दे और अन्य जो कमी है वो पूरी कर दे तो हम हैंडओवर मानेंगे।
कॉलोनियों में बुकिंग हुई थी- 2011 में
कितने लोग रहते हैं- 200
हैंडओवर हुई- 2016 में
अभी स्थिति- माही विहार और योगी विहार में पानी की टंकी, संपवेल और पाइप लाइन तो है लेकिन निगम की मुख्य लाइन से नहीं जुड़ पाया है। इससे यहां के रहवासी ट्यूबवेल के भरोसे हैं। अफसरों का तर्क {नगर निगम- ईई एसपी आचार्य का कहना है कि निगम हमें कॉलोनी व्यवस्थित कर दे लेकिन पाइप लाइन फूटी है।
आरडीए- आरडीए की प्रभारी जमुना भिड़े ने बताया नगर निगम को कॉलोनी हैंडओवर हो चुकी है। हमने सभी काम पूरे किए हैं।

3. सड़क : 7 किमी का सफर पूरा करने में लग रहे 20 मिनट, 5 साल से अधूरी

​​​​​​​रतलाम- बाजना टू लेन पर राजापुरा माताजी, छावनी छोड़िया के यहां रोड पांच साल से नहीं बन पाया है। के पास वन विभाग की जमीन है। लोक निर्माण विभाग का कहना है कि जमीन देने में वन विभाग अड़ंगा लगा रहा है। वहीं वन विभाग का कहना है कि हम सशर्त अनुमति देने को तैयार है। नतीजतन अब तक रोड का काम पूरा नहीं हो पाया है। इससे गिट्‌टी और मिट्‌टी से लोग परेशान हैं और इस मार्गसे वाहन चालकों को आने जाने में दिक्कत आ रही है। दोनों विभाग के अफसर जल्द ही काम शुरू करने की बात कह रहे हैं। ​​​​​​​

निर्माण शुरू हुआ- वर्ष 2016 में
लंबाई- 56 किमी
कितना किमी का हिस्सा अधूरा- 7 किमी
लागत- 109 करोड़ रुपए
अभी यह स्थिति है- दो किमी का हिस्सा अब तक पूरा नहीं हुआ है। हादसे का डर है।
अफसरों के तर्क {लोक निर्माण विभाग- ईई दीपेश गुप्ता ने बताया निर्माण शुरू करने का प्रयास कर रहे हैं। विभाग से बातचीत चल रही है। अनुमति मिलते ही काम शुरू कर देंगे।
वन विभाग- डीएफओ डीएस डोडवे का कहना है कि हम सशर्त निर्माण की अनुमति देने को तैयार हैं। पत्र लिख रहे हैं।​​​​​​​

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