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शिकायत:रतलाम डीईओ पर बहन और भानजी ने फर्जी वसीयत से मंदसाैर में कराेड़ाें की संपत्ति हड़पने का लगाया अाराेप

रतलाम2 महीने पहले
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  • नामांतरण कराने व बैंक अकाउंट, लाॅकर बंद कराने के लिए प्रस्तुत की एक ही संपत्ति की दाे अलग-अलग वसीयत

रतलाम जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा फर्जी वसीयत के बल पर बहनों की करोड़ों की मंदसाैर स्थित संपत्ति हड़पने का मामला सामने आया है। खुलासा खुद जिला शिक्षा अधिकारी की बहन व भांजी ने की। दोनों ने सिटी कोतवाली पहुंचकर आवेदन दिया। रतलाम जिला शिक्षाधिकारी इसे पारिवारिक विवाद बताते हुए वसीयतों को साबित करने का प्रयास कर रहे हैं। सिटी कोतवाली पुलिस मामले की जांच कर रही है। इंदौर निवासी रुक्मिणी पुरोहित व उनकी बेटी रुचि कर्णिक ने सिटी कोतवाली में आवेदन दिया। इसमें बताया कि उनके भाई के.सी. शर्मा जो रतलाम में जिला शिक्षा अधिकारी डीईओ हैं, उन्हाेंने फर्जी वसीयत के आधार पर मंदसौर स्थित उनके रामटेकरी व डागिया गली स्थित पैतृक मकान को हड़प लिया है। इसमें भाई ओ.पी. शर्मा (सेवानिवृत्त फाैजी निवासी दिल्ली) शामिल हैं। दोनों ने मिलकर फर्जी वसीयतें तैयार कराईं व मकानों का बंटवारा कर लिया। वहीं बैंक अकाउंट में रखे रुपए, लॉकर व शेयर भी हड़प लिए। मामले की जानकारी हुई तो सूचना के अाधार पर दस्तावेज मांगे गए, इसके बाद पूरा खुलासा हुआ। डीईओ शर्मा की भानजी रुचि ने बताया 2013 में नाना जयनारायण शर्मा (सेंट्रल एक्साइज विभाग में क्लर्क) का दिल्ली में निधन हुआ। इसके बाद दाेनाें मामा (डीईओ शर्मा व उनके भाई) ने फर्जी वसीयत के अाधार पर मंदसौर में रामटेकरी व डागिया गली स्थित मकान (करीब डेढ़ कराेड़ रुपए कीमत के) अपने-अपने नाम कर लिया। 2017 में नगरपालिका से नामांतरण कराया। इसके बाद डागिया गली वाला एक मकान बेच भी दिया व दूसरा अब भी उन्हीं के कब्जे में है। बैंक खातों में रखे रुपए, लाॅकर में रखे जेवरात निकालकर दोनों बंद करा दिए। रिश्तेदारों से जानकारी मिलने पर 2019-20 में सूचना के आधार पर जानकारी मांगी तो फर्जी वसीयत सामने आई। कानूनी जानकारों को वसीयत दिखाई तो खुलासा हुआ कि दोनों ही वसीयतें रजिस्टर्ड नहीं हैं।

कर्णिका ने बताया मामा ने अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग वसीयतों का प्रयोग किया है। नगरपालिका में उन्होंने दिल्ली में बनवाई गई वसीयत लगाई। जब हमने थाने पर शिकायत की तो उन्होंने इंदौर में बनवाई वसीयत प्रस्तुत की। मामा ने बिजली मीटर में नाम परिवर्तन के लिए बहनों से नो आॅब्जेक्शन सर्टिफिकेट लिया जिसका उपयोग नपा में नामांतरण में किया। उन्होंने कूटरचित दस्तावेज से संपत्ति हड़प की है। इसकी जांच हो। वसीयतों में ये कमियां हैं : कानूनी जानकारों के अनुसार दोनों वसीयतों में कई कमियां हैं जो संदेह को जन्म देती हैं। इसमें 2000 में कराई वसीयत में गवाहों के साइन नहीं हैं और ना ही वसीयतकर्ता के अंगूठे के निशान हैं। यह वसीयत नोटरी भी नहीं की गई है। 2003 में बनी वसीयत नोटरी है, इसमें साइन भी हैं।

यह पारिवारिक मामला है। सभी ने नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट पर साइन भी किए हैं। मैं कोर्ट में इस बात को सिद्ध कर दूंगा।
केसी शर्मा, जिला शिक्षाधिकारी, रतलाम

वैसे यह सिविल मामला है लेकिन दस्तावेज से छेड़छाड़ की बात सामने आई है अत: जांच कर रहे हैं
शिवकुमार यादव, टीआई सिटी कोतवाली, मंदसौर

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