संकट गहराया:लॉकडाउन से छोटे स्कूल संकट में, ना पेमेंट दे पा रहे हैं, ना किराया जमा करा पा रहे

रतलाम6 महीने पहले
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तितरी स्थित ज्ञान सागर स्कूल जो एक साल से बंद है। यहां काम करने वाले शिक्षक भी बेरोजगार हो गए हैं। - Dainik Bhaskar
तितरी स्थित ज्ञान सागर स्कूल जो एक साल से बंद है। यहां काम करने वाले शिक्षक भी बेरोजगार हो गए हैं।
  • 100 से ज्यादा स्कूल बंद होने की कगार पर, 600 से ज्यादा शिक्षक व कर्मचारी बेरोजगार
  • 2019-20 की आरटीई राशि भी नहीं मिली, स्थिति नहीं सुधरी तो बंद करना पड़ेंगे स्कूल

लॉकडाउन से छोटे स्कूल संकट में आ गए हैं। कोरोना संक्रमण के कारण एक साल से ज्यादा समय से बंद है। इससे 100 स्कूलों की तो यह हालत है कि ना तो वो कर्मचारियों को पेमेंट कर पा रहे हैं और ना ही भवन का किराया जमा करा पा रहे हैं। सरकार की ओर से सहायता मिलना तो दूर जो 2019-20 की जो आरटीई की राशि बनी थी वो भी अभी तक नहीं मिल पाई है।

ऐसे में इनमें काम करने वाले 600 से ज्यादा शिक्षक सहित अन्य कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं। यदि यही स्थिति रही तो ये स्कूल हमेशा के लिए बंद हो जाएंगे। जिले में 450 से ज्यादा स्कूल हैं। इसमें से 400 छोटे स्कूलों की श्रेणी में आते हैं। इसमें से 100 स्कूल तो इससे भी छोटे की कैटेगिरी में आते हैं।

नर्सरी से आठवीं तक के स्कूल हैं। ऐसे में जल्द ही कोई आर्थिक पैकेज नहीं मिला तो सभी बंद हो जाएंगे। छोटे स्कूलों के सामने तो किराया भरने की स्थिति भी नहीं बची है। उन्होंने अब सरकार से राहत पैकेज मांगा है।

निजी स्कूल संचालक बोले - अब सरकार राहत पैकेज का ऐलान करे

कोरोना ने साल-भर घर पर बैठाया और इस बार फिर पड़ी बेरोजगारी की मार

1. 13 साल से नौकरी की, एक साल से नहीं मिली दूसरी जॉब- सैनिक कॉलोनी स्थित इमराल्ड हाइट स्कूल में सीमा परमार वर्ष 2006-07 से टीचर हैं लेकिन लॉकडाउन के कारण स्कूल बंद हुआ तो फिर शुरू नहीं हुआ। इससे एक साल से शिक्षिका घर बैठी है। वहीं पहले ट्यूशन भी आती थी लेकिन वो भी बंद हो गई है। शिक्षिका ने बताया स्कूल बंद होने से रोजगार छीन गया और फिर एक साल से कोई रोजगार नहीं है।

2. 8 साल से पढ़ा रही थी, अब बेरोजगार हो गई - ज्ञानसागर पब्लिक स्कूल में ज्योति चौहान पिछले 8 साल से पढ़ा रही थीं लेकिन एक साल से स्कूल बंद है। इससे घर का खर्च चलाने में दिक्कत आ रही है। शिक्षिका ने बताया पिछले एक साल से स्कूल बंद है। इससे जो आय हो रही वो भी नहीं हो रही है। पति की भी इतनी कमाई नहीं है। प्राइवेट स्कूल के स्टाफ के लिए सरकार को कोई मदद करना चाहिए ताकि गुजर-बसर चल सके।

3. दो साल स्कूल चला और बंद हो गया - भूपेंद्रसिंह राजपूत ने ईसरथुनी में न्यू गुरुकुलुम के नाम से वर्ष 2018-19 में स्कूल स्कूल शुरू किया था। दो साल स्कूल चला और फिर कोरोना संक्रमण आ गया। इससे एक साल से स्कूल बंद है। आरटीई की राशि भी नहीं मिली। किराया जमा करने के रुपए भी नहीं हैं। भूपेंद्रसिंह ने बताया सरकार की ओर से भी कोई मदद नहीं मिल रही है।

4. संचालक ने शुरू की खेती - बड़ोदिया के आदर्श विद्या विहार स्कूल की भी यही स्थिति है। एक साल से स्कूल बंद है। इससे संचालक के पास बिल्डिंग का किराया देने के भी पैसे नहीं बचे हैं। वहीं जो शिक्षक पढ़ा रहे थे वो भी बेरोजगार हो गए हैं। आगे भी स्कूल खुलेंगे या नहीं यह अभी तक तय नहीं है। इससे स्कूल संचालक दिनेश मेहता खेती करने लगे हैं।

अभिभावकों ने फीस भी नहीं दी

मप्र प्रांतीय अशासकीय शिक्षण संस्था संघ के प्रदेश अध्यक्ष दीपेश ओझा ने बताया कि हम निम्न और मध्य वर्ग परिवार के बच्चों को शिक्षा से जोड़ते हैं लेकिन एक साल से तो छोटे स्कूलों की स्थिति खराब है। आरटीई की राशि भी नहीं मिली है और कई अभिभावकों ने स्कूलों की फीस भी जमा नहीं कराई।

इससे कई स्कूल संचालक तो भवन का किराया भी जमा नहीं करा पा रहे हैं। इससे 600 से ज्यादा लोग बेरोजगार हो गए हैं। ऊपर से आरटीई की राशि भी कई स्कूलों को नहीं मिली है। सरकार स्कूलों की मदद करना चाहिए और कुछ राहत पैकेज का ऐलान करना चाहिए।

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