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देशभक्तों के गुण वाला गांव गुणावद:रतलाम के इस गांव की माटी ने 21 साल में दिए 40 से ज्यादा जवान; मिलिट्री-पैरा मिलिट्री और पुलिस फोर्स में भी

दिव्यराजसिंह/रतलामएक वर्ष पहले
गुणावद के जांबाज जवान।

सिक्किम में हादसे के दौरान शहीद हुए सेना के जवान कन्हैयालाल जाट का गांव गुणावद इन दिनों सुर्खियों में है। रतलाम जिले का गुणावद गांव कबड्डी और यहां के युवाओं के देशभक्ति के जज्बे के लिए पहचाना जाता है। यही वजह है की गुणावद गांव को खिलाड़ियों और सेना के जवानों की नर्सरी भी कहा जाता है। अपने एक वीर सपूत कन्हैया को खोने के बाद भी इस गांव की नर्सरी में भविष्य के जवानों की फसल तैयार हो रही है। गुणावद गांव से भारतीय सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ में करीब 18 जवान अपनी सेवाएं दे रहे हैं । वहीं मध्य प्रदेश पुलिस और एसएएफ में भी 12 युवा अपनी सेवाएं देश को समर्पित कर रहे हैं ।

दरअसल रतलाम जिले का गुणावद गांव कबड्डी के खेल के लिए पहचाना जाता रहा है। लेकिन पिछले दो दशकों में इस गांव से भारतीय सेना, सशस्त्र सेनाओं और पुलिस फोर्स में करीब 40 जवान चयनित होकर अपनी सेवाएं देश को दे रहे हैं। इसकी वजह से अब इस गांव की पहचान राष्ट्र सेवा करने वाले इन जवानों की वजह से भी हो रही है।

यहां से भारतीय सेना में अमृतलाल जाधव, नीलेश शर्मा, भोलाराम शर्मा ,जोरावर सिंह, विजय सिंह सुभाष, धर्मेंद्र ,बहादुर सिंह और राहुल जाट कार्यरत है । सिक्किम में शहीद हुए कन्हैया लाल जाट भी भारतीय सेना की सीएमपी यूनिट में कार्यरत थे। बीएसएफ में संजय जाट और सीआरपीएफ में गोकुल सिंह एवं पप्पू सिंह अपनी सेवाएं राष्ट्र के नाम समर्पित कर रहे हैं। एसएएफ और पुलिस फोर्स में भी गुणावद गांव के जितेंद्र गोस्वामी ,भंवर सिंह ,दिनेश जाट और जितेंद्रपाल सिंह अपनी उत्कृष्ट सेवाएं देकर गांव का नाम रोशन कर रहे हैं।

अलग-अलग फोर्स में सेवा दे रहे इन जवानों से गांव के बच्चे भी प्रेरणा लेकर देश सेवा में जाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। यहां से प्रतिवर्ष 4 से 5 युवाओं का चयन भारतीय सेना सहित अन्य सशस्त्र बलों के लिए हो रहा है।

गांव में ट्रेनिंग के दौरान युवा।
गांव में ट्रेनिंग के दौरान युवा।

शहीद कन्हैया के गांव गुणावद पहुंची दैनिक भास्कर की टीम ने इस बारे में गांव के ही बीएसएफ में सेवा दे रहे संजय जाट से चर्चा की तो संजय भास्कर की टीम को गांव के बाहर बने शासकीय स्कूल के मैदान में लेकर गए। जहां खेल और सशस्त्र सेना के जवानों की नर्सरी तैयार हो रही थी। लॉकडाउन की वजह से यहां सीमित संख्या में कुछ युवा दिखाई दिए। जो खेल और राष्ट्र सेवा में कैरियर बनाने के लिए अपना पसीना बहा रहे थे । खासबात यह भी की यहां के केवल बेटे ही नहीं बल्कि बेटियां भी भारतीय सेना और अन्य सशस्त्र बलों में जाने की तैयारी कर रही है।

भास्कर की टीम से चर्चा में इन बच्चों ने बताया कि इन्हें सेना और अन्य फोर्स में सेवा दे रहे गांव के जवानों से खेलो और राष्ट्र सेवा के लिए आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। सिक्किम में हादसे में शहीद हुए कन्हैया लाल जाट के निधन से इन युवाओं का मन दुखी जरूर है लेकिन कन्हैया के राष्ट्रप्रेम के जज्बे से प्रेरणा लेकर यह युवा देशसेवा के लिए आगे जाना चाहते हैं।

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