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बचपन में ही सांसारिक सुख का त्याग:रतलाम में 14 साल की जुड़वा बहनों ने अपनाया संयम पथ, 9 साल का मासूम बना बाल मुनि

दिव्यराज सिंह। रतलाम4 महीने पहले

रतलाम में 14 साल की पलक, उनकी जुड़वा बहन तनिष्का और 9 साल के ईशान कोठारी सांसारिक जीवन छोड़कर संयम पथ अपना लिया हैं। इन्होंने रतलाम में दीक्षा महा उत्सव में दीक्षा ली। इस दौरान अपने बच्चों को सांसारिक जीवन से विदा करते समय माता-पिता और परिजन भावुक हो उठे। लेकिन संयम के मार्ग पर चलने का निश्चय ऐसा कि 14 साल की पलक और 9 साल 6 महीने का ईशान अपने चेहरे पर ओजस्वी मुस्कान लेकर दीक्षा ग्रहण करने गुरुदेव के पास पहुंचे। गुरुदेव मुनि श्री बंधु बेड़ली म.सा. ने जैसे ही दोनों दीक्षार्थीयों को दीक्षा दी। दोनों नूतन बाल मुनि जैन भजनों पर झूमने लगे और संयम अपनाकर वैराग्य धारण कर लिया। गुरुवार को दीक्षा समारोह में मुमुक्षु पलक और ईशान कोठारी ने दीक्षा ग्रहण कर ली है। वहीं मुमुक्षु तनिष्का की दीक्षा स्वास्थ्य कारणों से धार्मिक नियमानुसार कुछ दिन बाद की जाएगी। रतलाम के जेएमडी पैलेस में आयोजित दीक्षा समारोह में दोनों मुमुक्षु ने संयम पथ अपना लिया। दीक्षा ग्रहण करने के पश्चात मुनि श्री बंधु बेड़ली म.सा. ने दोनों दीक्षार्थी को नए नाम दिए हैं। पलक चाणोदिया अब साध्वीचर्या पंक्तिवर्षा श्रीजी और ईशान कोठारी बाल मुनि आदित्यचंद्र सागर जी के नाम से जाने जाएंगे। दीक्षा ग्रहण करने के बाद दोनों बाल मुनि अब गुरुदेव के साथ ही रतलाम से विहार कर संयम पथ पर चलने की शुरुआत करेंगे।

सबके अपने-अपने शौक, मैंने संयम मार्ग चुना: ईशान कोठारी
दीक्षा से पहले इन बच्चों से दैनिक भास्कर ने बात की। दीक्षा लेने वाले ईशान कोठारी की बातें किसी निर्मोही संत की तरह लगती हैं। इतनी कम उम्र में वैराग्य धारण करने के सवाल पर ईशान का जवाब है- सब बच्चों के अपने-अपने शौक होते हैं। मैंने संयम मार्ग को अपने शौक के तौर पर चुना है। मनुष्य जीवन में किसी भी अच्छे कार्य की शुरुआत बचपन से की जाती है, तो संयम के मार्ग को चुनने के लिए भी बचपन से ही शुरुआत होनी चाहिए। तनिष्का और पलक टाटा नगर निवासी चाणोदिया परिवार की बेटियां हैं। दोनों ने 9th तक पढ़ाई की है। वहीं, दूसरी तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद ईशान हेमचंद्राचार्य गुरुकुल में शिक्षा प्राप्त करने चले गए। इसके बाद ईशान ने दीक्षा लेने का निर्णय ले लिया।

पलक और तनिष्का ने 9th तक पढ़ाई की है।
पलक और तनिष्का ने 9th तक पढ़ाई की है।

वैराग्य धारण करने के पहले लुटाई सांसारिक वस्तुएं
रतलाम में जैन समाज के तीन बाल दीक्षार्थियों ने वैराग्य धारण करने के पहले भव्य चल समारोह में सांसारिक वस्तुओं का त्याग किया। 14 साल की जुड़वा बहनें तनिष्का और पलक के साथ 9 साल के ईशान कोठारी धन, दौलत और कीमती वस्तुओं को लुटा कर संयम पथ पर अग्रसर हो गए।

ईशान 2nd क्लास तक पढ़े हैं।
ईशान 2nd क्लास तक पढ़े हैं।

माता-पिता हुए भावुक, बार-बार करते रहे दुलार
रतलाम के तीन बाल मुमुक्षु द्वारा दीक्षा लिए जाने का निर्णय लेने पर उनके माता-पिता भी बेहद उत्साहित हैं। बच्चों के परिजन अपने आप को सौभाग्यशाली मानते हैं कि उनके यहां ऐसे दीक्षार्थी का जन्म हुआ है। दीक्षा लेने के पूर्व दीक्षार्थी के परिवार के लोग विभिन्न प्रकार के समारोह का आयोजन करते हैं। इसके बाद सांसारिक जीवन का त्याग करने के पहले वे अपने बच्चों को घर से विदा करते हैं। दीक्षा के इस महा उत्सव में जैन समाज के लोग ही नहीं, बल्कि अन्य समाज के लोग भी इस महोत्सव में शामिल होकर दीक्षार्थीयों के दर्शन करते हैं। दीक्षा ग्रहण कर वैराग्य धारण करने वाले दोनों नूतन जैन मुनियों ने माता-पिता, भाई और अन्य रिश्तेदारों के साथ खुशनुमा समय बिता कर पलक ने अपना अंतिम सांसारिक दिन बिताया। इस दौरान माता-पिता उन्हें बार-बार दुलार करते रहे। वहीं, दीक्षार्थी ईशान कोठारी ने कभी माता-पिता की गोद में बैठ कर तो कभी अपनी छोटी बहन के साथ खेलकर अपना दिन गुजारा। इस दौरान इशांत की माता बार-बार भावुक होकर कभी उसे गले लगाते तो कभी उसे दुलारते दिखे।