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  • To Deal With The Third Wave, 300 Beds With All Facilities Are Being Prepared For Children In Ratlam District, 30 Bed Ward Prepared With The Help Of Social Organization In Medical College

तीसरी लहर से निपटने की तैयारी:तीसरी लहर से निपटने के लिए रतलाम जिले में बच्चों के लिए तैयार हो रहे सर्व सुविधा युक्त 300 बेड, मेडिकल कॉलेज में सामाजिक संस्था की मदद से तैयार हुआ 30 बेड का वार्ड

रतलामएक महीने पहले
मेडिकल कॉलेज में तैयार बच्चो का वार्ड

कोरोना की संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए रतलाम जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग तैयारियों में जुटा हुआ है। तीसरी लहर में बच्चों के संक्रमित होने के खतरे को देखते हुए रतलाम जिले में बच्चों के लिए 300 बेड तैयार किए जा रहे हैं । इसमें रतलाम के बाल चिकित्सालय में 75 , मेडिकल कॉलेज में 75 और जिले के अन्य शासकीय अस्पतालों में 150 सर्व सुविधायुक्त बैड तैयार किए जाएंगे। रतलाम मेडिकल कॉलेज में साईं सेवा समिति की मदद से 30 बेड का बच्चों का वार्ड बनकर तैयार भी हो चुका है। जिसे बच्चों की सुविधा के अनुसार किसी प्ले स्कूल की तर्ज पर तैयार किया गया है।

दरअसल कोरोना की दूसरी लहर के असर से सबक लेते हुए संभावित तीसरी लहर के लिए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अभी से तैयारियों में जुटा हुआ है। रतलाम कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम ने बताया कि रतलाम के बाल चिकित्सालय में 75 बेड का वार्ड बनाने के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है।जिले में बाल चिकित्सालय ,मेडिकल कॉलेज के अलावा जिले के अन्य अस्पतालों में कुल 300 बेड बच्चो के लिए तैयार किये जाएंगे ।

रतलाम मेडिकल कॉलेज में सामाजिक संस्था की मदत से बच्चो के लिए 30 बेड का वार्ड तैयार हो चुका है। जहां बच्चो के उपचार के आधुनिक उपकरण के साथ सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए वार्ड की दीवारों पर सुन्दर साज सज्जा की गई है । बच्चो के मनोरंजन के लिए खिलोनो की व्यवस्था भी इन वार्डो में की जायेगी । मेडिकल कॉलेज में बनाये गए 30 बेड के वार्ड की तर्ज पर ही जिले में अब 300 बेड तैयार किये जाएंगे ।

बहरहाल रतलाम जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग तीसरी लहर की तैयारी में जुटा हुआ है जहां बच्चो के लिए 300 बेड के आधुनिक वार्ड तैयार करने के अलावा मेडिकल कॉलेज में सिटी स्केन मशीन और एमआरआई मशीन भी जल्द ही उपलब्ध कराई जाएँगी। वही रतलाम जिले के मेडिकल कॉलेज ,रेलवे अस्पताल और जावरा शासकीय अस्पताल अब ऑक्सीजन के मामले में आत्मनिर्भर भी बन चुके है।