अनदेखी:हमारे स्‍टेशन से 2 साल पहले चलती थी 12 जोड़ी ट्रेनें, अब रह गईं सिर्फ 4

सुवासराएक महीने पहले
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नगर के रेलवे स्टेशन पर 2 साल पहले 12 जोड़ी ट्रेनें रुकती थीं। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उदासीनता के कारण अब यह संख्या केवल 4 रह गई है। इस कारण लोगों को आवागमन में दिक्कत होने के साथ ही समय और धन की भी बर्बादी हो रही है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियाें काे रेलवे और उनके गृहनगर में आमजन को हो रही परेशानी से कोई सरोकार ही नहीं है। वहीं राजनीतिक पार्टियां भी स्वार्थ सिद्ध कर रही हैं।

रेल सुविधाओं के मामले में संपूर्ण कोटा मंडल में सबसे अधिक उपेक्षा सुवासरा की हुई है। यहां ना तो पूर्व के ठहराव यथावत हो पा रहे हैं ना ही सुवासरा- मंदसौर रेल लाइन को अभी तक बजट आवंटन हुआ है। यहां के लिए स्वीकृत मूलभूत सुविधाएं भी अन्य स्टेशनों को दी जा रही है। इसमें कोच गाइडेंस इलेक्ट्रॉनिक टाइम-टेबल डिस्प्ले, दोनों प्लेटफाॅर्म के सौंदर्यीकरण के साथ ही प्लेटफाॅर्म नंबर-3 का निर्माण शामिल है।

इन सुविधाओं की स्वीकृति हो चुकी थी लेकिन अधिकारिक स्तर, राजनीतिक कारणों एवं नेताओं के उदासीन रवैये के कारण इस स्वीकृति को भी नजरअंदाज किया गया। सुवासरा- मंदसौर रेल लाइन संपूर्ण मालवा- मेवाड़- हाड़ाेती को जोड़ने वाली एवं लगभग 50 लाख से अधिक आबादी को लाभ देने वाली रेल लाइन है लेकिन सर्वे लागत और एस्टीमेट बनने के बाद भी अभी तक बजट में सुवासरा- मंदसौर रेल लाइन के लिए कुछ भी नहीं करना क्षेत्र की सीधे-सीधे उपेक्षा है।

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