विंध्य में डेंगू का कहर:रीवा जिले में एक सप्ताह के भीतर आए डेंगू के 16 नए केस, सर्वाधिक मरीज शहरी क्षेत्र के, नईगढ़ी ब्लॉक से ग्रामीण क्षेत्र में डेंगू ने दी दस्तक

रीवा3 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

मध्यप्रदेश के अन्य जिलों की भांति रीवा जिले में भी डेंगू ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। बीते वर्षों की अगर बात करें तो उस हिसाब से इस साल ज्यादा केस आ रहे है। अब तक 896 जांचों में 61 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। जिसमें एक सप्ताह के भीतर 16 नए केस आए आएं है। वहीं डेंगू मरीज से अछूते रहे नईगढ़ी ब्लॉक में भी दस्तक हो गई है।

बता दें कि बीते वर्ष अब तक की स्थिति में कुल 2 केस मिले थे। लेकिन इस वर्ष 16 केस मिलने से प्रशासन के दावों की पोल खुल रही है। हालांकि डेंगू को कंट्रोल करने के लिए सरकारी मशीनरी दौड़ रही है, लेकिन जनता की सहभागिता के बिना राह आसान नहीं है।

16 केसों में सर्वाधिक मरीज रीवा शहरी क्षेत्र के हैं। वहीं शहर से लगे ब्लॉक गोविंदगढ़, रायपुर कर्चुलियान व सिरमौर के नगरी व ग्रामीण इलाकों में रोगियों की संख्या में वृद्धि हुई है। डेंगू के केस में वृद्धि का दूसरा कारण डेगू संक्रमण ग्रस्त दूसरे जिलों और पड़ोसी राज्यों से माइग्रेशन भी रहा है।

दो जगह हो रही जांचे
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. स्मि​ता नामदेव ने बताया कि जिले में डेंगू जांच की सुविधा जिला चिकित्सालय ​बिछिया और संजय गांधी ​स्मृति हॉस्पिटल में है। जहां जांच रिपोर्ट नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती है। डेंगू सहित अन्य मच्छर जनित बीमारियां पर सामूहिक प्रयास से ही नियंत्रण किया जा सकता है। डेंगू बीमारी की कोई स्पेस्फिक दवा मौजूद नहीं है। ऐसे में बीमारी होने पर डॉक्टर की सलाह अनुसार ही दवाईयां ले।

दिन में काटता है एडीज मच्छर
चिकित्सकों ने बताया कि डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर प्रमुख्यतः दिन में काटता है। ऐसे में व्यक्तिगत तौर पर मच्छरों के काटे जाने से बचे। प्रयास करें कि पूरी आस्तीन के कपड़े हो। शाम को नीम की पत्ती का धुंआ करें। सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें। खिड़की दरवाजों में मच्छर रोधी जाली लगवाए। गाय, भैंस दुहने जाने के पूर्व शरीर में सरसों का तेल लगाएं।

आपसी तालमेल का आभाव
दावा है कि डेंगू से जीतना किसी चुनौती से कम नहीं है। यहां नगरीय निकायों एवं स्वास्थ्य विभाग में आपसी तालमेल का अभाव। क्योंकि शहरी क्षेत्र में बड़ी आबादी रहती है। साथ ही बड़ी संख्या में खाली प्लाटों में पानी भरा रहता है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में फंगिंग मशीन आदि की पर्याप्त उपलब्धता नहीं है। साथ ही मलेरिया विभाग में स्टाफ और संसाधन सीमित है।

खबरें और भी हैं...