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6 करोड़ से इलाज कराने वाले कर्मठ किसान की कहानी:पत्थरों पर पैदा किए स्ट्रॉबेरी और गुलाब, गांव से दुबई तक घोली मिठास और महक

मध्यप्रदेश4 महीने पहलेलेखक: राजेश शर्मा

कोरोना से सबसे लंबी जंग लड़ने वाले रीवा के 50 वर्षीय किसान धर्मजय सिंह ने पथरीली जमीन पर गुलाब और स्ट्रॉबेरी पैदा कर दिए। उनके खेतों के गुलाब और स्ट्रॉबेरी दुबई तक जाते हैं। किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की सरकारी योजना तो बाद में अस्तित्व में आई, धर्मजय ने तो 2015 में ही अपने बूते इसकी शुरुआत कर दी थी। वे अपने रकरी गांव में करीब 150 एकड़ जमीन पर खेती के लिए शासन-प्रशासन की योजना पर निर्भर नहीं थे। गांव वाले उन्हें दादा के नाम से पुकारते हैं।

रकरी गांव के शेरूखान बताते हैं, दादा से मना किया गया था कि पथरीली जमीन पर फूल की खेती करने में बड़ा रिस्क है, लेकिन दादा ने भू-वैज्ञानिकों से मिट्‌टी की जांच कराई। जांच रिपोर्ट में पाया कि यहां गुलाब की खेती हो सकती है, लेकिन पत्थर के कारण यह संभव नहीं था। फिर उन्होंने पत्थर पर मिट्‌टी डलवा कर गुलाब के पौधे लगाए। आज यहां के गुलाब देश ही नहीं, बल्कि दुबई तक सप्लाई हो रहे हैं। इतना ही नहीं, इस जमीन पर स्ट्रॉबेरी की खेती को उन्होंने संभव बनाया। हालांकि, इस बार स्ट्रॉबेरी नहीं हो पाई, क्योंकि दादा (धर्मजय) बीमार हो गए थे।

गांव के ही 76 वर्षीय रिटायर्ड टीचर कदम्य ऋषि ने एक किस्सा बताया- वे जो करते थे, उसको लेकर पूरे गांव को बताते थे। उन्होंने नदी की जमीन पर पंचायत भवन बनवा दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने बेसमेंट में आंगनबाड़ी स्वीकृत करवा कर निर्माण करा दिया। सरकार की स्कीम को गांव में लागू कराने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी। उनकी मंशा गांव के हर किसान को आत्मनिर्भर बनाने की थी। उन्होंने अपनी जमीन पर खेती करने के लिए सोलर प्लांट लगवाया। इसके बाद गांव के किसानों को बिजली की समस्या से निजात दिलाई।

उन्होंने हर खेत के लिए मेड़ बंधन कराया। हमने मना किया कि 150 से ज्यादा किसानों को एकजुट करना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने किया। वे कहते थे, यदि कोई किसान सरकार की योजना को लागू नहीं करेगा तो वे खुद ही जेसीबी चलवा देंगे। उनके रहते तक कोई किसान सरकारी योजना का पैसा हजम नहीं कर पाया।

पॉली हाउस के बाहर लगे सोलर ऊर्जा पैनल।
पॉली हाउस के बाहर लगे सोलर ऊर्जा पैनल।

मॉडर्न गांव बनाने का सपना अधूरा रह गया

धर्मजय रकरी को मॉडर्न गांव बनाना चाहते थे, लेकिन उनका यह सपना अधूरा रह गया। रकरी पंचायत के सहायक सचिव बृजेश मिश्रा बताते हैं कि वे गांव में बेहतर अस्पताल व स्कूल खोलना चाहते थे, इसलिए उनका बेटा MBBS की पढ़ाई कर रहा है। उनके काम करने का तरीका यूनिक था। कोरोना के कारण दो साल से काम नहीं हुए, लेकिन वे गांव की पूरी मदद करते रहे। पूरे गांव को सैनिटाइज कराया। हर तीन दिन में शहर से मटेरियल लाकर गांव में ही सैनिटाइजर तैयार किया।

खाद प्लांट बनाने का सपना अधूरा रह गया
रीवा जिले में जितनी गौशालाएं हैं, सबसे ज्यादा गाय रकरी की गोशाला में है। वे ऑर्गेनिक खाद बनाना चाहते थे। गोबर और केंचुए लाकर खाद का प्लांट लगाने का प्लान बनाया था, ताकि फसल के लिए कम कीमत पर खाद उपलब्ध हो सके, लेकिन उनके निधन से यह प्लान कागज पर ही रह गया।

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