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6 करोड़ खर्च कर जान गंवाने वाले किसान की कहानी:दूसरी लहर में 1200 लोगों को रोजा बांटते थे राशन, घर को बना दिया था किराना गोदाम

रीवा13 दिन पहलेलेखक: सुरेश मिश्रा
धर्मजय काफी जिंदादिल थे।- फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
धर्मजय काफी जिंदादिल थे।- फाइल फोटो
  • मऊगंज क्षेत्र के रकरी गांव के रहने वाले थे किसान धर्मजय सिंह

MP के रीवा जिला अंतर्गत मऊगंज (रकरी गांव) निवासी प्रतिष्ठित किसान धर्मजय सिंह का चेन्नई के अपोलो अस्पताल में 11 जनवरी की रात निधन हो गया। चर्चा है कि कोरोना के इलाज में 8 माह के अंदर 6 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में चचेरे भतीजे रवीन्द्र सिंह सेंगर ने कोरोना काल की दूसरी लहर के समय सेवा की पूरी कहानी बताई। कहा, 15 अप्रैल 2021 को लॉकडाउन लगते ही रकरी गांव के गरीब मजदूर भाइयों की सेवा के लिए चाचा धर्मजय सिंह ने अपने घर को किराने का गोदाम बना दिया था। वह रोजाना गांव-गांव घूम-घूमकर 1200 लोगों की सेवा का जिम्मा उठाए हुए थे। इसी बीच 1 मई को सं​क्रमित हुए। 18 मई को एयर एंबुलेंस से चेन्नई के अपोलो अस्पताल शिफ्ट किया गया। करीब 8 माह के बाद अब हम लोगों को कभी न भूलने वाला दर्द देकर चले गए है।

पका खाना से लेकर सूखा राशन का होता था वितरण
रवीन्द्र ने कोरोना काल का किस्सा शेयर किया। बताया कि धर्मजय सिंह ने अपने घर में दो ट्रक से ज्यादा किराने का सामान सेवा करने के लिए स्टाक किया था। जो ज्यादा मजबूर होता था। उसको पके खाने का पैकेट व बाकी लोगों को सूखा राशन का वितरण करते थे। साथ ही मास्क, सैनिटाइजर आदि का वितरण करते हुए दो गज की दूरी मास्क है जरूरी का संदेश देते थे।

एक सप्ताह का देते थे राशन
महामारी के समय बाहर से लौट कर आए जरूरतमंद गरीब परिवार और मजदूरों को एक सप्ताह का सूखे राशन दिया जाता था। वहीं भूखे लोगों को पके खाने का पैकेट व बच्चों को बिस्किट और ब्रेड देते थे। उनकी ज्यादातर सेवा घर पहुंच थी। जिसमे आटा, दाल, चावल, सब्जी, नमक, तेल, मशाले, हल्दी और शक्कर आदि शामिल होता था।

ऐसा था परिवार
बड़े भाई प्रदीप कुमार सिंह जबलपुर हाईकोर्ट में सीनियर अधिवक्ता है। जबकि दूसरे नंबर के भाई धनंजय सिंह चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में पीटीआई थे। वहीं धर्मजय सिंह सबसे छोटे और पूरे परिवार के लाड़ले भाईयों में शामिल थे। उनका व्यापार पाली हाउस, कृषि कार्य, सब्जी की खेती, पशुपालन कराते थे। साथ ही क्षेत्र के सामाजिक कार्यों में बढ़चढ़कर हिस्सा लेते थे।

दो बेटा और एक बेटी उनके पीछे
मृतक किसान के दो बेटा और एक बेटी थी। बड़ा बेटा नृपेन्द्र सिंह (28) मैकेनिकल इंजीनियरिंग, दूसरा बेटा यशवर्धन उर्फ राम सिंह (26) देहरादून में रहकर मेडिकल की पढ़ाई तो बेटी ​अंकिता सिंह (25) वनस्थली कॉलेज जयपुर राजस्थान में रहकर अध्ययन कर रही है। वह 150 एकड़ जमीन के साथ गांव के जमींदार है। इलाज में कई रिश्तेदारों ने भी मदद किया है।

धर्मजय कुछ इस तरह का गोदाम घर में बनाए थे।
धर्मजय कुछ इस तरह का गोदाम घर में बनाए थे।

आज होगा अंतिम संस्कार
मृतक किसान धर्मजय सिंह की डेड बॉडी गुरुवार- शुक्रवार की दरमियानी रात्रि 2 बजे गृह ग्राम रकरी गांव पहुंच गया है! शुक्रवार की सुबह 9 बजे देह को अंतिम दर्शन के लिए रखा है! जिनका अंतिम संस्कार दोपहर 2 बजे होगा

चेनई से बनारस, फिर पहुंचे गांव
बड़े भाई प्रदीप सिंह की माने तो पार्थिव शरीर गुरुवार की शाम 7 बजे चेन्नई से बनारस एयर एम्बुलेंस से लाया गया था, जहां सड़क मार्ग से रात 2 बजे पार्थिव देह पहुंची थी

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