6 करोड़ से इलाज कराने वाले की विदाई:रीवा में अपने मसीहा को कफन में देख रो पड़ा पूरा गांव,अंतिम यात्रा में गुलाबी हुई गांव की गलियां

रीवा4 महीने पहले

कोरोना से सबसे लंबी जंग लड़ने वाले रीवा के रकरी गांव के 50 वर्षीय किसान धर्मजय सिंह की अंतिम विदाई पर पूरा गांव रो पड़ा। मऊगंज के समीप ग्राम रकरी में प्रतिष्ठित किसान धर्मजय सिंह के निधन के बाद शुक्रवार दोपहर अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोग पहुंचे। अपने मसीहा को कफन में देखने के बाद हर किसी की आंखें नम हो गईं। पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उनके चाहने वालों ने कहा- अब गांव और परिवार की जिम्मेदारी कौन उठाएगा। हम किसके पास अपना दुखड़ा सुनाने जाएंगे। भगवान ने नौ महीने तक जिंदा रख आशा दी थी। अब हम लोगों को अंधेरा देकर दादा चले गए हैं। ग्रामीणों ने कहा कि गांव में अस्पताल और मार्डन स्कूल का सपना अधूरा रह गया है। अब ये विरासत हम सभी बड़े बेटे के साथ मिलकर आगे बढ़ाएंगे। बता दें कि उनके इलाज पर 6 करोड़ रुपए खर्च हुए थे।

बड़े बेटे ने मुखाग्नि दी देश-विदेश में गुलाब की खेती के लिए मशहूर किसान की अंतिम यात्रा के समय गांव की गलियां गुलाबी हो गई। श्रद्धाजंलि देने वालों ने गुलाब का ही पुष्प अर्पित किया। वहीं, शांति धाम तक गुलाब के पुष्प बिखेरते हुए हर कोई राम नाम सत्य बोलते हुए आगे बढ़ रहा था। गांव के पुरोहित ने विधि विधान से हिन्दू धर्म के रीति-रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया कराई। अंत में बड़े बेटे ने मुखाग्नि दी।

पत्नी बेहोश, छोटे बेटे के आंसू थम नहीं रहे
अंतिम दर्शन के समय किसान की पत्नी बेहोश हो गई। वे सिर्फ देख रही थीं, लेकिन बोल नहीं पा रही थीं। जबकि मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छोटे बेटे की आंख से आंसू नहीं थम रहे थे। फिर मृत किसान के बड़े भाई अधिवक्ता प्रदीप सिंह ने समझाइश देकर शांत कराया।

श्रद्धांजलि देने पहुंचे कई राज्यों के बिजनेसमैन
प्रतिष्ठित किसान के निधन की सूचना पर देश प्रदेश के कई कारोबारी और बिजनेसमैन रकरी गांव पहुंचे हैं। जिसमें UP के प्रयागराज, बनारस, मिर्जापुर, बिहार, झारखंड सहित दिल्ली के व्यापारी शामिल हैं। वहीं, रीवा के सहयोगी साथी, पूर्व विधायक मऊगंज सुखेन्द्र सिंह बन्ना, विस अध्यक्ष गिरीश गौतम के बेटे राहुल गौतम सहित क्षेत्र के नेता, जमीदार शामिल रहे।

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