आत्मनिर्भर विंध्य की ओर रीवा:सोलर बिजली से आत्मनिर्भर हो रहे रीवा के सरकारी संस्थान, 14 जगहों पर 2 हजार किलोवाट के सोलर पैनल लगे

रीवा23 दिन पहले
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फाइल फोटो - Dainik Bhaskar
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रीवा जिले के सरकारी संस्थान धीरे-धीरे आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे है। यहां अपने-अपने कार्यालयों का खर्चा कम करने के लिए सरकारी संस्थान सोलर बिजली का उपयोग तेजी से कर रहे है। बता दें कि रीवा शहर में संजय गांधी चिकित्सालय और मेडिकल कॉलेज ​सहित एक दर्जन से ज्यादा संस्थान ऐसे हैं। जो सोलर पैनल लगवाया चुके है।

वहीं बाकी बचे हुए सरकारी कार्यालय सोलर पैनल लगाने के लिए ऊर्जा विकास निगम में आवेदन किया है। अभी सरकारी संस्थानों से 2 हजार किलोवाट की क्षमता का सोलर पैनल लग चुका है। आगे राज्य सरकार का प्रयास है कि सरकारी और निजी संस्थान भी सोलर बिजली का उपयोग करें।

सबसे पहले गुढ़ में लगा सोलर प्लांट
सबसे पहले सोलर प्लांट गुढ़ की बदवार पहाड़ी पर स्थापित हुआ। यहा 250-250 मेगावाट के तीन प्लांट लगाए गए है। ओवर हाल प्लांट पर सोलर बिजली की 750 मेगावाट क्षमता है। अधिकारियों की मानें तो गुढ़ में सोलर प्लांट स्थापित होने के बाद धीरे-धीरे अन्य सरकारी संस्थानों ने भी रूचि दिखाई। नतीजन आज रीवा शहर में 2 हजार किलोवाट की बिजली शहर के अंदर विभिन्न कार्यालयों में तैयार होने लगी है।

मेडिकल कॉलेज में लगे तीन बड़े पैनल
ऊर्जा विकास निगम के अधिकारियों ने बताया कि सबसे पहले अधिक क्षमता के सोलर पैनल संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय और श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में लगाए गए हैं। इन दोनों संस्थानों में कुल मिलाकर 3 सोलर पैनल लगाए गए हैं। जिनकी क्षमता कम से 500 किलोवाट, 450 किलोवाट और 392 किलोवाट की है। रख रखाव और मेंटीनेस का जिम्मा ऊर्जा विकास निगम के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग देखता है।

इस तरह सरकारी कार्यालय हुए आत्मनिर्भर
नवीन कलेक्ट्रेट भवन में 100-100 किलोवाट के दो पैनल लगे हैं। वहीं बीएसएनल कार्यालय में 30 किलोवाट, एपीएसयू में 25-25 किलोवाट के दो पैनल, इंजीनियरिंग कॉलेज में 100 किलोवाट, जिला अस्पताल में 50 किलोवाट, जिपं में 25 किलोवाट, महिला आईटीआई में 25 किलोवाट, डाइट में 30 किलोवाट, गर्ल्स हॉस्टल में 20 किलोवाट और बालक हॉस्टल में 20 किलोवाट का पैनल व पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन में 30 किलोवाट के पैनल लगे हैं।

पावर ग्रिड से जुड़ी होती है बिजली
ऊर्जा विकास निगम की मानें तो सरकारी संस्थाओं में स्थापित सोलर पैनल सीधे पावर ग्रिड से जुड़े होते है। यहां उत्पादित होने वाली बिजली यदि उपयोग से ज्यादा होती है तो एमपीईबी के पावर ग्रिड में चली जाती है। ऐसे में अगले माह आने वाले बिजली में इसे समायोजित कर दिया जाता है। यदि सोलर बिजली कम क्षमता के पैनल की वजह से कम बनी तो कार्यालय द्वारा शेष पूर्ति एमपीईबी की बिजली से कर ली जाती है। जिन संस्थानों में सोलर पैनल लगवाया है। उनका बिजली बिल का मासिक खर्च कम हो गया है।

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