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MP में PPE किट डिस्पोजल घोटाला:जिस बायो वेस्ट प्लांट को PPE किट को नष्ट करने का जिम्मा, वह इन्हें गर्म पानी में धोकर सतना-भोपाल के खुले बाजार में बेच रहा

सतना5 महीने पहले
बायो वेस्ट प्लांट में गर्म पानी से धुलकर रखे PPE किट के बंडल।

मध्यप्रदेश के सतना जिले में आपदा को अवसर में बदलने का डरावना और शर्मनाक वीडियो वायरल हुआ है। यहां बड़खेरा बायो वेस्ट डिस्पोजल प्लांट में सिंगल यूज PPE किट को गर्म पानी में धोकर बंडल बनाए जा रहे हैं। इसके बाद कबाड़ियों के माध्यम से सतना और भोपाल के खुले बाजार में दोबारा PPE किट के तौर पर बेचा जा रहा है। इस मामले में कमिश्नर ने जांच के आदेश दिए हैं।

शासन की गाइडलाइन के मुताबिक PPE किट, ग्लव्स और मास्क को वैज्ञानिक तरीके से नष्ट करने के लिए बड़खेरा में इंडो वाटर बायो वेस्ट डिस्पोजल प्लांट में भेजा जाता है, लेकिन प्लांट में ऐसा नहीं किया जा रहा है। यहां कर्मचारी प्लांट प्रबंधन के इशारे पर PPE किट को गर्म पानी से धोकर बाकायदा अलग बंडल बनाकर रख देते हैं। इसके बाद गोपनीय तरीके से इसे बेच दिया जाता है।

मंगलवार देर रात 11 से 12 बजे के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ। पड़ताल में पता चला कि बड़खेरा गांव के एक स्थानीय युवक ने चोरी-छिपे बायो वेस्ट डिस्पोजल प्लांट के अंदर चल रही करतूत का वीडियो मोबाइल फोन में कैद कर वायरल किया था।

वीडियो में स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि PPE किट और ग्लव्स को एक टब में गर्म पानी में डालने के बाद धोकर सुखाया जाता है। इसके बाद प्लांट के अंदर काम कर रहे मजदूर बंडल तैयार करते हैं। इसके बाद यह हूबहू नए बंडल की तरह ही दिखने लगता है। वीडियो वायरल होने के बाद अब जिला प्रशासन कार्रवाई करने का आश्वासन दे रहा है।

तीन विभागों की होती है जिम्मेदारी
बताया गया कि बायो वेस्ट डिस्पोजल प्लांट के रखरखाव और देखरेख की ​जिम्मेदारी प्रदूषण विभाग, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की होती है, लेकिन सूत्रों की मानें तो किसी भी विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कभी भी मौके पर नहीं जाते। ऐसे में बायो वेस्ट एजेंसी मनमाने तरीके से काम कर रही है।

मामले में CMHO डॉ. अशोक कुमार अवधिया का कहना है कि बायो वेस्ट के मामले में जो वीडियो वायरल हुआ है। उसके बारे में बायो वेस्ट एजेंसी वाले ही बता सकते हैं। हम तो बायो वेस्ट उठाने के पैसे देते हैं।

PPE किट का न करें दोबारा इस्तेमाल
जिला अस्पताल के डॉ. सीएम तिवारी का कहना है कि सिंगल यूज PPE किट इसीलिए बनाई जाती है, क्योंकि उसका दोबारा इस्तेमाल न हो। धोने से उसके रेशों का गैप बढ़ सकता है और तब यह सुरक्षित नहीं रहेगा। गर्म पानी में धोने से वायरस नष्ट हो जाता है या नहीं, इस​का दावा नहीं किया जा सकता।

मामले में संभागायुक्त अनिल सुचारी का कहना है कि बड़खेरा बायो बेस्ट डिस्पोजल प्लांट का मामला मेरे जानकारी ​में नहीं था। आप से बात करने के बाद कलेक्टर सतना को बोल दिया है। वीडियो में जो दिख रहा है, गलत है। जल्द ही मामले की जांच होगी। दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी के मुताबिक पीपीई किट का निपटान लैंड फिल और भस्मीकरण के तहत किया जा सकता है। CPCB की कोविड गाइडलाइन के अनुसार इसके लिए भस्मीकरण के निर्देश हैं। इसे रिसाइकिल नहीं किया जा सकता। अगर ऐसा हो रहा है, तो गलत है। डायरेक्टर NHM पंकज शुक्ला ने वीडियो को संज्ञान में लेकर स्वास्थ्य महकमे को जांच के निर्देश दिए हैं।

क्या है गाइडलाइन?
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइन के मुताबिक PPE किट, ग्लव्स और मास्क को एक बार ही इस्तेमाल करना है। साथ ही, इनको सार्वजनिक जगह पर नहीं फेंकना है, बल्कि वैज्ञानिक तरीके से बायो वेस्ट डिस्पोजल प्लांट में नष्ट कराना है।

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